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जो नेता पराई पीर को जानता है, उसे हर कोई मानता हैं

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  • अपने घायल रक्षकों को छोड़ निकल गए पूर्व सांसद दिनेश, सांसद बैज ने की मदद

जगदलपुर,(अर्जुन झा)। जो नेता पराई पीर को जानता है, उसे हर कोई मानता है। बस्तर में एक सड़क हादसे ने दो बड़े नेताओं के बीच के एक बहुत बड़े फासले को बयां कर दिया है. बस्तर सांसद दीपक बैज और पूर्व सांसद दिनेश कश्यप में क्या राजनीतिक फर्क है यह तो दोनों के संसदीय कार्यकाल के प्रदर्शन के आधार पर जनता तुलना कर रही है कि दिनेश के संसदीय काल में बस्तर संसदीय निर्वाचन क्षेत्र के हालात के मुकाबले दीपक ने तीन साढ़े तीन साल में क्या बदलाव किया.

बात व्यवहार की हो तो भी जनता देख रही है कि दोनों दिग्गजों में क्या अंतर है। अब सबसे बड़ा पैमाना अगर मानवीयता का है तो सांसद दीपक बैज और पूर्व सांसद दिनेश कश्यप के मध्य इस मामले में दीपक कोसों आगे निकल गए हैं. बीती रात एक सड़क हादसे के बाद के घटनाक्रम ने दोनों सियासी शूरवीरों की फितरत उजागर कर दी है. पूर्व सांसद की अति सावधानी या कहें कि संवेदनहीनता का नमूना तब देखने को मिला, जब उनकी सुरक्षा के लिए चौबीसों घंटे सजग रहने वाले जवानों का वाहन हादसे का शिकार हो गया. जवान दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे रहे और पूर्व सांसद ने उनकी सुध लेने की जरूरत भी नहीं समझी. सुरक्षा जवानों को उनके हाल पर छोड़कर नेताजी अपनी बुलेट प्रूफ गाड़ी में सवार होकर आगे निकल लिए. ये तो गनीमत रही कि उसी रास्ते से गुजर रहे सांसद दीपक बैज देवयोग से वहां पहुंच गए, जिन्होंने वाहन में फंसे जवानों को निकालने में मदद की. राजनीति की नब्ज टटोलने वाला ये हादसा लोहंडीगुड़ा से कोडेनार पहुंच मार्ग पर हुआ. पूर्व भाजपा सांसद दिनेश कश्यप भाजपा नेताओं और सुरक्षा जवानों के काफिले के साथ इस रास्ते से होकर कहीं जा रहे थे. इसी दौरान उनके काफिले में शामिल एक बुलेटप्रूफ गाड़ी दुर्घटनाग्रस्त होकर पलट गई। इस गाड़ी में श्री कश्यप के सुरक्षा कर्मी सवार थे. ये सुरक्षा कर्मी दिन रात साये की तरह श्री कश्यप के इर्दगिर्द रहकर उनकी हिफाज़त में लगे रहते हैं। हादसे के बावजूद पूर्व सांसद श्री कश्यप न तो वहां रुके और न ही उन्होंने दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे जवानों का हालचाल जानने की जरूरत समझी. मदद करना तो दूर की बात रही. कश्यप अपने सुरक्षा जवानों को उनके हाल पर छोड़कर अपनी बुलेटप्रूफ गाड़ी में सवार होकर आगे बढ़ गए. ये तो गनीमत थी की उसी रास्ते से अपने काफिले के साथ गुजर रहे बस्तर के मौजूदा कांग्रेस सांसद दीपक बैज वहां पहुंच गए. बैज ने मानवता का परिचय दिया. उन्होंने अपनी व काफिले में शामिल सभी गाड़ियों को रुकवाया और वे अन्य लोगों के साथ मिलकर दुर्घटनाग्रस्त वाहन में फंसे जवानों को बाहर निकालने तथा पलटे वाहन को सीधा करने में जुट गए. सभी जवानों को बाहर निकालने और गाड़ी सीधा करने के बाद ही बैज आगे रवाना हुए. कश्यप के इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार और कांग्रेस सांसद श्री बैज की सदाशयता की अंचल में खूब चर्चा हो रही है.

लक्ष्मी जगार में शामिल हुए संसदीय सचिव रेखचंद जैन

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  • ग्राम पुसपाल में हुआ मां लक्ष्मी की आराधना का भव्य कार्यक्रम


जगदलपुर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव नगरीय प्रशासन तथा श्रम विभाग रेखचंद जैन ग्राम पंचायत पुसपाल में आयोजित ‘लक्ष्मी जगार’ कार्यक्रम में शामिल हुए. उन्होंने माता लक्ष्मी से बस्तर छत्तीसगढ़ के लिए सुख शांति व समृद्धि की कामना की.

जैन ने कहा कि माता लक्ष्मी जगार कार्यक्रम हमारे बस्तर में माता की आराधना की पुरातन संस्कृति है. माता की आराधना कर धन धान्य समृद्धि की कामना की जाती है. उन्होंने माता लक्ष्मी से कामना की कि माता आपके गांव समेत बस्तर छत्तीसगढ़ को भी सुख शांति समृद्धि दे. इस अवसर पर सरपंच पदम नाग, वरिष्ठ नेता विश्वनाथ सेठिया, श्यामो गोनो सेठिया, रामदास, खगपति सेठिया, कमल सेठिया, विनोद सेठिया, भोलाराम पुजारी, भोला नाग, सीताराम, ऋषि सेठिया, मुरली सेठिया, बामदेव, कोमो नाग, शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हेमू उपाध्याय, विधि विभाग के जिला अध्यक्ष अवधेश झा, पार्षद सूर्या पाणी, शहर जिला कांग्रेस कमेटी के संयुक्त महामंत्री रामशंकर पिल्ले समेत ग्रामीण उपस्थित थे ।

क्षेत्र के विकास में धन की कमी आड़े नहीं आएगी : सांसद बैज

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  • सांसद दीपक बैज ने गांवों को दी करोड़ों के विकास कार्यों की सौगात
  • क्षेत्र के नागरिकों की उम्मीदों को पूरा करना पहली प्राथमिकता


जगदलपुर. बस्तर के सांसद दीपक बैज ने क्षेत्र के कई गांवों में लाखों रु. के विकास एवं निर्माण कार्यों का भूमिपूजन किया. उन्होंने कहा कि बस्तर के लोगों की उम्मीदों को पूरा करना उनकी पहली प्राथमिकता है और क्षेत्र के विकास में कभी धन की कमी आड़े नहीं आएगी.
सांसद बैज ने ग्राम बेलर, धुरागांव, टहाकापाल में ग्रामीणों को संबोधित भी किया।

उन्होंने विकासखंड लोहंडीगुड़ा की ग्राम पंचायत बेलर में बरसों पुरानी मांग पर 27 लाख रुपए की लागत से सड़क निर्माण कार्य, नल जल योजना 2 करोड़ 95 लाख रुपए, मातागुड़ी निर्माण 3 लाख रु., ग्राम पंचायत धुरागांव में 3 लाख रु की लागत से सामुदायिक भवन व तोकापाल के ग्राम गुमियापाल में सांसद निधि से 6.21 लाख रु. की लागत से सीसी रोड निर्माण कार्य का भूमिपूजन किया. सांसद दीपक बैज को सुनने उमड़ी लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी.सभा को संबोधित करते हुए बैज ने कहा कि मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के आशीर्वाद से क्षेत्र के विकास के लिए अब धन की कमी नहीं होगी. क्षेत्रवासियों की मांगों को पूरा करना हमारी जिम्मेदारी है

और प्राथमिकता के आधार पर क्षेत्र का विकास करेंगे. सड़क, बिजली, पानी की आवश्यकता के अनुरूप विकास कार्य करेंगे।क्षेत्र का सर्वांगीण विकास करना ही हमारा लक्ष्य है। कार्यक्रम में जनपद अध्यक्ष महेश कश्यप, जनपद उपाध्यक्ष योगेश बैज, तोकापाल ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष सहदेव नाग, जनपद सदस्यगण प्रेमवती भारद्वाज, रामबती, समलू राम, चैती बाई, पद्ममनी कश्यप, गोमती बाई, सुभाष बघेल व सोनी बाई, सांसद प्रतिनिधि सुखदेव सेठिया, सरपंच बेलर बोदाराम, सरपंच धुरागांव दीप्ति बघेल, सरपंच ओजेश्वरी भारद्वाज फोटका रामभरोसे नाग, लोहंडीगुड़ा के सीईओ प्रणव दीवान सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण एवं कांग्रेस कार्यकर्ता मौजूद थे।

लेकिन यहां तो खा रहे हैं और खिला भी रहे हैं प्रधानमंत्री जी

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  • प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की सड़कों के निर्माण में भ्रष्टाचार
  • पेटी कान्ट्रेक्टर गुणवत्ता की उड़ा रहे हैं धज्जियां, निर्माण पूर्ण होने से पहले ही उखड़ गईं सड़कें

अर्जुन झा
जगदलपुर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ईमानदारी और नियत पर कोई सवाल नहीं उठा सकता. वे भारत को भ्रष्टाचार मुक्त देश बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं. श्री मोदी ना खाऊंगा, ना खाने दूंगा के संकल्प के साथ देश को आगे बढ़ाने में लगे हुए हैं, लेकिन बस्तर जिले में प्रधानमंत्री की एक महत्वकांक्षी योजना को अधिकारी और ठेकेदार मिलकर पलीता लगा रहे हैं. अफसर तथा ठेकेदार ‘खाएंगे और खिलाएंगे भी’ के संकल्प के साथ काम करते नजर आ रहे हैं. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत जिले में बनाई जा रही सड़कों का हाल देखकर साफ नजर आता है कि सड़क निर्माण के लिए मिली रकम की जमकर बंदरबांट हो रही है.
बस्तर जिले में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत बनाई जा रही ज्यादातर सड़कों के निर्माण में अमानक स्तर की सामग्री का उपयोग किया जा रहा है। जिन ठेकेदारों को प्रधानमंत्री सड़कों के निर्माण का काम दिया गया है, उन्होंने पेटी कॉन्ट्रैक्टरों को टुकड़े टुकड़े में निर्माण की जिम्मेदारी दे रखी है. ये पेटी कान्ट्रेक्टर अपनी जेब गर्म करने के फेर में गुणवत्ता की सरेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। इसका जीता जागता उदाहरण है गारेंगा से चारगांव तक बनाई जा रही 23 किमी लंबी सड़क. प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना की इस सड़क के निर्माण में इस कदर भ्रष्टाचार किया गया है कि निर्माण के दौर में ही इस सड़क की धज्जियां उड़ गई हैं. इस सड़क का निर्माण कार्य अभी पूर्ण भी नहीं हुआ और पहली बारिश में ही उसकी गुणवत्ता की पोल खुल गई है। इस निर्माणाधीन सड़क के आसपास स्थित गांवों के ग्रामीणों द्वारा विभाग के अधिकारियों को कई बार अवगत कराए जाने के बाद भी गुणवत्ता सुधार में कोई रूचि नहीं दिखाई जा रही है, बल्कि बचे कार्य को भी पुराने ढर्रे पर ही बनाया जा रहा है। ऐसे घटिया निर्माण कार्य को अंजाम देकर अधिकारी और ठेकेदार अपनी जेबें भरने में लगे हुए हैं.
क्षेत्रीय विधायक भी गुणवत्ता को लेकर पूर्व में नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं। शासन की मंशा है कि सभी ग्रामीण सड़कों को बेहतर गुणवत्ता के साथ बनाकर जिला मुख्यालय की सड़कों से जोड़ा जाए, ताकि जिले भर में आवागमन के बेहतर साधन उपलब्ध हो सकें।
विधायक की नाराजगी भी बेअसर
अधिकारी-ठेकेदार आपसी सांठगांठ से घटिया सड़क निर्माण कर अवैध रूप से बेतहाशा धन कमाने तथा शासन की छवि को धूमिल करने में लगे हुए हैं. ऐसा कृत्य करके वे विपक्षी दल को हल्ला मचाने का मुद्दा मुहैया करा रहे हैं। गुणवाा को लेकर बस्तर विधायक लखेश्वर बघेल भी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं. श्री बघेल ने गुणवत्ता में सुधार के निर्देश विभाग के अफसरों को दिए थे, लेकिन इसका कोई असर नहीं दिखा, बल्कि पहली बारिश में ही सड़क निर्माण की गुणवत्ता की पोल खुल गई।
देर भी और अंधेर भी
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत पैकेज क्रमांक सीजी 01261 के तहत बस्तर जिले के बकावंड एवं बस्तर विकासखंड के गारेंगा से चारगांव तक 1616.75 लाख रु. की लागत से 23 किमी लंबी डामरीकृत एवं सीसी सड़क निर्माण कार्य करने की स्वीकृति प्रदान की गई है. इसका ठेका जशपुर के ठेकेदार विनोद जैन को दिया गया है। यह कार्य 31 जनवरी 2021 को प्रारंभ किया गया और 18 माह में निर्माण पूर्ण करने की समयावधि निर्धारित की गई है। लेकिन निर्माण में अंधेरगर्दी तो मचाई ही जा रही है, पूर्णता में देरी भी की जा रही है. निर्माण कार्य आधे से अधिक भाग तक किया जा चुका है. अब तक जितना भी सड़क निर्माण कार्य पूर्ण हुआ है, उसमें घटिया सामग्री का उपयोग किया गया है. पूरी तरह गुणवत्ताविहीन सड़क निर्माण कराया गया है. गारंटी अवधि पूर्ण होने के पहले ही सड़क कई स्थानों पर गुणवत्ता की अनदेखी को बयां करने लगी है। जिस ठेकेदार को काम दिया गया है उसे शायद इसका पता नहीं होगा. मुख्य ठेकेदार ने जशपुर से बस्तर जिले तक दौड़धूप से बचने और घर बैठे रहकर मोटी रकम कमाने के फेर में पेटी कान्ट्रेक्टर को काम सौंप दिया है. इधर पेटी कांट्रेक्टर भी ज्यादा कमाने और अफसरों की जेबें गर्म करने के चक्कर में गुणवत्ता को ताक पर रखकर निर्माण कार्य को पूर्ण करने में जुटा हुआ है।
वर्जन
होगी कड़ी कार्रवाई
मामले की जांच कराई जाएगी। निर्माण कार्यो की गुणवाा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। घटिया निर्माण पाए जाने पर विभाग प्रमुख के खिलाफ भी कार्रवाई होगी।
-चंदन कुमार
कलेक्टर, बस्तर

पदस्थापना में भर्राशाही, दर्जनों स्कूल हो गए शिक्षक विहीन

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  • पदोन्नति-पदस्थापना के बाद जिले के 50 से अधिक स्कूल हुए वीरान
  • सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य से डीईओ ने किया सरेआम खिलवाड़

अर्जुन झा
जगदलपुर। बस्तर शिक्षा जिले में शिक्षकों की पदोन्नति और पदस्थापना में जिला शिक्षा अधिकारी द्वारा की गई मनमानी ने सैकड़ों विद्यार्थियों के भविष्य को अंधकारमय बना दिया है. रुपयों की उगाही के चक्कर में पदोन्नत शिक्षकों को उनकी मनचाही शालाओं में तैनात करने का ऐसा खेल खेला गया कि जिले के करीब 50 शालाएं अब पूरी तरह शिक्षक विहीन हो गई हैं. जिला शिक्षा अधिकारी के इस रवैये से पालकों में भारी रोष देखा जा रहा है.
शिक्षा जिला बस्तर में 1200 शिक्षकों को पदोन्नत कर प्रधान पाठक बनाया गया है. पदोन्नत शिक्षकों में में लगभग 50 शिक्षक ऐसे हैं, जो अपनी पूर्व शाला का संचालन अकेले करते आ रहे थे यानि उनका स्कूल एकल शिक्षक वाला था. अब इन शिक्षकों को भी दूसरी शालाओं में पदस्थ कर दिया गया है. इन शिक्षकों को अन्यत्र पदस्थ कर दिए जाने से उनकी पूर्व शाला अब शिक्षक विहीन हो गई है. उल्लेखनीय है कि बस्तर शैक्षणिक जिले के 1200 शिक्षक – शिक्षिकाओं को पदोन्नति देने के मामले में शिक्षकों की वरीयता का भी ध्यान नहीं रखा गया. अनेक ऐसे शिक्षकों को भी पदोन्नत कर दिया गया, जो पात्र ही नहीं थे. ऐसा धन बल के प्रभाव में आकर किया गया. पदोन्नति प्राप्त शिक्षक – शिक्षिकाओं की पदस्थापना के मामले में भी धन की अवैध उगाही का खेल जमकर खेला गया. अवैध उगाही में जिला शिक्षा कार्यालय के तीन बाबुओं और शिक्षक संघ के कुछ पदाधिकारियों को लगाया गया था. जिन पदोन्नत शिक्षकों ने अधिकारी की डिमांड पूरी की उन्हें उनकी पसंदीदा शालाओं में पदस्थ कर दिया गया तथा डिमांड से कम रकम देने वाले शिक्षकों को दूरस्थ शालाओं में भेज दिया गया. पदोन्नत शिक्षकों की पदस्थापना में संचालक लोक शिक्षण द्वारा जारी गाइड लाईन का खुलकर उल्लंघन किया गया. शिक्षकों की पदस्थापना करते समय इस बात का भी ध्यान नहीं रखा गया कि शालाएं शिक्षक विहीन या एकल शिक्षकीय हैं. इसका नतीजा अब सामने आने लगा है. जिला शिक्षा कार्यालय के बाबू और शिक्षक संघ के कुछ पदाधिकारी पदोन्नत शिक्षकों से उगाही कर अधिकारी को प्रसन्न करने तथा कमीशन के रूप में स्वयं मोटी रकम पाने में कामयाब तो हो गए, लेकिन जिले में शिक्षकों की नई पदस्थापना के बाद 50 से अधिक स्कूलों के शिक्षक विहीन हो जाने की खबर सामने आई है. उगाही के चक्कर में अधिकांश शिक्षकों की नियम विरूद्ध पदस्थापना की जाने की बात शिक्षा विभाग के राजधानी स्थित मुख्यालय तक पहुंच गई है. जिन शिक्षकों को मनपसंद शाला नहीं मिली है, वे नई पदस्थापना वाले स्कूलों में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रहे हैं.ऐसे शिक्षकों की नई शाला में ज्वाइनिंग के लिए आज अंतिम अवसर है। ऐसे शिक्षकों को उनकी पसंदीदा शाला में पदस्थ कराने बाबू और शिक्षक संघ के तथाकथित पदाधिकारी अब फिर से जुगाड़ में लगगए हैं। ज्ञातव्य हो कि बस्तर जिले में शिक्षकों की पदोन्न्नति और पदस्थापना के नाम पर लाखों रु. की सौदेबाजी हुई है. खबर है कि इसकी जानकारी लोक शिक्षण संचालनालय तक भी पहुंच चुकी है। मामले का संज्ञान में भी लिए जाने की तैयारी है। लोक शिक्षण संचालनालय मामले में गंभीरता दिखाता है, तो बस्तर के शिक्षा विभाग में बड़ा घोटाला उजागर हो सकता है।
नेताओं के नाम पर भी उगाही
सूत्रों से जानकारी मिली है कि पदोन्नति प्राप्त शिक्षकों से वसूली करने में लगे रहे अधिकारी के एजेंटो ने सत्ताधारी दल के नेताओं के नाम पर भी जमकर उगाही की है. इस कृत्य में डीईओ की भी भूमिका को कतई नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। अधिकारी के इन एजेंटो ने खुद को नेताओं का करीबी बताकर पदोन्नति एवं पदस्थापना में नेताओं के नाम पर भी जमकर उगाही की है। इस बात की भनक लगने के बाद नेता भी बेहद खफा हैं। अधिकारी के एजेंट तो उगाही कर अपने विभाग प्रमुख को प्रसन्न करने में कामयाब रहे लेकिन नियम विरूद्ध पदस्थापना की जाने से राज्य स्तर के बड़े अफसर नाराज हो गए हैं। वैसे भी शिक्षा अधिकारी की कार्यप्रणाली ने नाराज चल रहे वरिष्ठ अफसर पूर्व में जिला शिक्षा अधिकारी को फटकार भी लगा चुके हैं। स्थानीय शिक्षा विभाग के एवं लोक शिक्षण संचालनालय के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार नियमों के तहत पदोन्नति के बाद शिक्षकों की उसी शाला में पदस्थापना को प्राथमिकता देनी होती है, लेकिन बस्तर शिक्षा जिले में थोक के भाव में पदोन्नत शिक्षकों को उनकी पसंद की शालाओं में पदस्थ किया जाना घोर अनियमितता को दर्शाता है। ऐसी खबर है कि इस मामले में लोक शिक्षण संचालनालय रायपुर डीईओ को तलब कर सकता है।
ये स्कूल हो गए शिक्षक विहीन पदस्थापना में की गई भर्राशाही ने जिले की दर्जनों शालाओं को शिक्षक विहीन बना दिया है. बस्तर विकासखंड के संकुल केंद्र आड़वाल की प्राथमिक शाला भरनी व प्राथमिक शाला झपटगुड़ा तथा एकटगुड़ा संकुल केंद्र की प्राथमिक शाला टाकरागुड़ा व प्राथमिक शाला महुपाल बरई के पूरी तरह शिक्षक विहीन हो जाने की पुष्टि इन गांवों के ग्रामीणों ने की है. इन शालाओं के आलावा जिले के अन्य कई शालाएं भी या तो शिक्षक विहीन हो गई हैं या फिर एकल शिक्षकीय. मुख्यालय तक इस भर्राशाही की जानकारी पहुंच जाने की खबर से शिक्षा विभाग के जिम्मेदार अफसर एवं वसूली करने वाले एजेंट दहशत में हैं. अब ये लोग यह कहते फिर रहे हैं कि जो करना था, कर चुके हैं, आगे जो होगा देखा जाएगा. ये तथाकथित एजेंट यह भी कह रहे हैं कि वसूली का हिस्सा उपर तक पहुंचाया गया है, तो फिर डर काहे का ? आवभगत में जुटे बीईओ
शिक्षा विभाग के संयुक्त संचालक की मौत एवं जिले में शिक्षा विभाग को आबंटित करोड़ों रूपए की बंदरबाट के मामले की जांच करने रायपुर से 4 सदस्यीय टीम जगदलपुर पहुंची है. यह टीम बीईओ जगदलपुर से जुड़े मामले की पड़ताल कर रही है। ऐसी खबर है कि एक निजी होटल ठहरे जांच दल के अधिकारियों की खूब खातिरदारी बीईओ द्वारा की जा रही है। जांच के लिए आए अफसरों को खुश करने में कोई कसर बाकी नहीं रखी जा रही है. ऐसे में जांच का नतीजा कैसा रहेगा इसका अंदाजा लगाया जा सकता है.

जरूरतमंदों को समय पर सामाजिक सहायता योजनाओं का मिले लाभ: श्रीमती भेंड़िया

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  • दिव्यागों और उभयलिंगी समुदाय को पहचान पत्र बनाने लगाएं शिविर
  • मैदानी क्षेत्रों में योजनाओं के क्रियान्वयन में लाएं कसावट
  • कोरबा जिले में योजनाओं की संतोषजनक प्रगति नहीं होने पर उप संचालक को निलंबित करने के दिए निर्देश
  • सुकमा, कोण्डागांव और महासमुंद के अधिकारियों को कारण बताओं नोटिस
  • समाज कल्याण मंत्री ने की योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा

समाज कल्याण मंत्री श्रीमती अनिला भेंड़िया ने कहा है कि जरूरतमंदों को समय पर सामाजिक सहायता योजनाओं का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने समाज कल्याण विभाग के अधिकारियों को मैदानी स्तर पर योजनाओं के क्रियान्वयन में कसावट लाने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि आगामी दो माह के भीतर सभी योजनाओं के क्रियान्वयन में प्रगति दिखनी चाहिए। लापरवाही मिलने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। श्रीमती भेंड़िया आज यहां मंत्रालय महानदी भवन में विभागीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रही थीं।

श्रीमती भेंड़िया ने समीक्षा बैठक में कोरबा जिले में योजनाओं की संतोषजनक प्रगति नहीं पाए जाने और बैठक में अनुपस्थिति को गंभीरता से लेते हुए विभागीय उप संचालक बेलार मिंज बेक को निलंबित करने के निर्देश दिए। इसके साथ ही उन्होंने सुकमा के जिला अधिकारी की अनुपस्थिति, कोण्डागांव जिला अधिकारी द्वारा अधूरी जानकारी भेजने और महासमुंद के बहु विकलांग गृह के अधीक्षक को संस्था में बच्चों के कम प्रवेश पर भी गहरी अप्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कोण्डागांव और सुकमा के जिलाधिकारी सहित महासमुंद के बहु विकलांग गृह के अधीक्षक को कारण बताओं नोटिस देने के निर्देश दिए। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के सचिव श्री भुवनेश यादव और संचालक श्री रमेश कुमार शर्मा भी उपस्थित थे।

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श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि राज्य सरकार ने निराश्रितों, दिव्यांगों, उभयलिंगी समुदाय के लिए योजनाएं संचालित कर रही है। इसका लाभ सभी जरूरतमंद व्यक्तियों को समय पर मिलना सुनिश्चित करें। राज्य सरकार जरूरतमंद व्यक्तियों के लिए पैसा खर्च कर रही है, जिसका लाभ लोगों तक पहुंचना चाहिए। अधिकारी बेहतर काम कर के दिखाएं। दो महीने बाद काम-काज की फिर समीक्षा होगी। योजनाओं के क्रियान्वयन में लापरवाही बरतने और अपेक्षित प्रगति नहीं होने पर सख्त कार्यवाही की जाएगी। उन्होंने शासकीय संस्थाओं में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को पढ़ाने के लिए तृतीय लिंग समुदाय के प्रशिक्षित व्यक्तियों को लेने पर भी सहमती जतायी।

श्रीमती भेंड़िया ने कहा कि दिव्यागों और उभयलिंगी समुदाय को पहचान पत्र प्रदान करने के लिए हर 15 दिन में शिविर लगाएं जाएं। लोगों तक शिविर की जानकारी के लिए पर्याप्त प्रचार-प्रसार करें, जिससे लोगों को शिविर की जानकारी मिल सकें। उन्होंने कहा कि दिव्यागों की पहचान और उनकों योजनाओं के लाभ के लिए यूडीआईडी कार्ड बहुत महत्वपूर्ण हैं। इस पर विशेष ध्यान देकर समय-सीमा में सभी दिव्यांगजन का पहचान पत्र बनाना सुनिश्चित करें। श्रीमती भेंड़िया ने सामाजिक सहायता कार्यक्रम के तहत संचालित पेंशन योजना, डोर-टू-डोर सर्वेक्षण, दिव्यांगजनों को कृत्रिम अंग और सहायक उपकरण वितरण, शासकीय संस्थाओं के विशेष विद्यालयों में प्रवेश, यूडीआईडी कार्ड वितरण, संस्थाओं को अनुदान, भारतमाता वाहिनी गठन की स्थिति सहित राज्य में संचालित वृद्धाश्रम, प्रशामक देख-रेख गृह और नशामुक्ति केन्द्रों की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि डोर-टू-डोर सर्वेक्षण की प्रगति का मूल्यांकन करें और काम नहीं कर रही ऐजेंसियों पर कार्यवाही करें।

समाज कल्याण विभाग के सचिव भुवनेश यादव ने कहा कि समाज के जरूरतमंद लोगों तक विभागीय योजनाओं के माध्यम से मदद के लिए सक्रियता से काम करें। इसके लिए सामाजिक संस्थाओं से सम्पर्क बढ़ाएं और लोगों तक पहुंचे। संस्थाओं को समय पर अनुदान देने की कार्यवाही पूरी करें ताकि जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि जिन दिव्यांजनों के यूडीआईडी कार्ड बन गए हैं, उन्हें आगामी सात दिनों के भीतर शिविर लगाकर वितरण सुनिश्चित करें। साथ ही चिन्हांकित दिव्यांगजनों के कार्ड जल्द बनवाएं। इस अवसर पर समाज कल्याण विभाग के सभी जिलों के अधिकारियों सहित संचालनालय के प्रभारी अधिकारी भी मौजूद थे।

सिटू का भूख हड़ताल सिर्फ दिखावा, भारतीय मजदूर संघ

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राजहरा खदान समूह के सीटू से सम्बद्ध श्रम संगठन ने राजहरा में कार्यरत सुरक्षा गार्ड्स के तीन सूत्रीय समस्याओं को लेकर 14.10.2022 से क्रमिक भूख हड़ताल करने बाबत ज्ञापन दिया है और समाचार के माध्यम से इसकी जानकारी सार्वजानिक की है। इस सम्बन्ध में भारतीय मजदूर संघ से सम्बद्ध खदान मजदूर संघ भिलाई के अध्यक्ष एम.पी.सिंह ने जानकारी देते हुए बताया के वास्तविकता तो ये है के सीटू श्रम संगठन सुरक्षा गार्ड्स की समस्याओं को लेकर जिस क्रमिक भूख हड़ताल की बात कर रहा है वो केवल एक ढकोसला और दिखावा है। अपने जिन तीन सूत्रीय मांग को लेकर सीटू द्वारा दिनांक 14.10.2022 से क्रमिक भूख हड़ताल करने की बात की जा रही है उन समस्याओं पर बिंदुवार जानकारी देते हुए भा.म.सं. ने कहा कि –

(1) सीटू द्वारा वर्ष 2019 से उप मुख्य श्रमायुक्त केंद्रीय (रायपुर) के कार्यालय में एक औद्योगिक विवाद दायर की गयी थी जिसमें आईओसी राजहरा के सुरक्षा गार्ड्स को केंद्र सरकार द्वारा खदान में कार्यरत ठेका श्रमिकों के अर्ध-कुशल कामगार का वेतन दिलवाने की मांग की गयी थी। उक्त विवाद दो साल तक चलता रहा किन्तु कोई समाधान नहीं हो पाया। इस बीच भारतीय मजदूर संघ ने जनवरी 2022 में उप मुख्य श्रमायुक्त केंद्रीय (रायपुर) के कार्यालय में एक औद्योगिक विवाद दायर की जिसमें संघ ने इन सुरक्षा गार्ड्स को केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा गार्ड्स हेतु शहरों के आधार पर तय किये गए न्यूनतम वेतन दिलवाने की मांग की गयी थी। चूँकि दोनों श्रम संगठनों द्वारा की गयी मांग न्यूनतम वेतन से सम्बंधित थी अतएव उप मुख्य श्रमायुक्त केंद्रीय (रायपुर) ने दोनों प्रकरण को एक साथ जोड़कर सुनवाई की और अंततः दिनांक 22.06.2022 को संघ की मांग को सही मानते हुए सुरक्षा गार्ड्स के लिए क्लेम दर्ज करने का दिशा निर्देश दिया। उक्त बैठक में न केवल सीटू के पदाधिकारी उपस्थित थे बल्कि उन्होंने भी इस मामले में नोट शीट पर स्वयं भी हस्ताक्षर किये।

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किन्तु इसके बाद जहाँ भा.म.सं. ने अपने सदस्यों के लिए माननीय क्षेत्रीय श्रमायुक्त केंद्रीय (रायपुर) के कार्यालय में क्लेम फॉर्म जमा कर दिया वहीँ सीटू ने ऐसा नहीं किया। इस मुद्दे पर और स्पष्ट जानकारी देते हुए एम.पी.सिंह ने कहा कि शुरू से ही सीटू की मांग गलत थी क्योंकि कोई भी सुरक्षा कर्मी का कार्यक्षेत्र माइंस एक्ट और माइंस रूल के हिसाब से माइंस की परिभाषा के अंतर्गत नहीं आता है। इसका सबसे बड़ा सबूत यही है कि परिभाषित खदान क्षेत्र में काम करने वाले प्रत्येक कर्मी का, चाहे वह नियमित हो या ठेका कर्मी, खदान अधिनियम के तहत A-Form पंजीयन अनिवार्य है। जबकि आईओसी राजहरा में कार्यरत किसी भी सुरक्षा गार्ड्स का A-Form पंजीयन नहीं है क्योंकि कोई भी कर्मी परिभाषित खदान क्षेत्र में कार्यरत नहीं है।

यहाँ यह भी सोंचने की बात है कि सीटू जो वेतन दिलवाने हेतु इतना प्रपंच कर रहा है और जिस वेतन हेतु संघ ने वाद दायर की और माननीय उप श्रमायुक्त केंद्रीय ने क्लेम करने का दिशा निर्देश दिया है वो वेतन सीटू द्वारा मांगे गए और मांगे जा रहे वेतन से अधिक है। सीटू के इस प्रपंच से यह साफ़ हो जाता है कि सीटू प्रबंधन के गोद में बैठने हेतु अपने श्रमिकों का नुकसान करना चाहता है और उन्हें कम वेतन दिलवाकर प्रबंधन से वाहवाही लूटना चाहता है। जहां तक संघ की बात है तो संघ ने क्लेम जमा कर दिया है और उसपर सुनवाई भी जारी है। अगर वास्तव में सीटू श्रमिकों का हितैषी होता तो वो भी अबतक क्लेम जमा कर चुका होता किन्तु सीटू के नेताओं की नियत में खोट है जिसका खामियाजा सुरक्षा गार्ड भुगत रहे हैं। यहाँ यह भी गौर करने की बात है कि भा.म.सं द्वारा वाद दायरा करने के पश्चात केंद्र सरकार के लेबर एनफोर्समेंट अधिकारी ने भी खदान का दौरा किया और जांच करने के उपरान्त माननीय क्षेत्रीय श्रमायुक्त केंद्रीय (रायपुर) के समक्ष केंद्र सरकार द्वारा सुरक्षा गार्ड्स हेतु शहर के आधार पर तय किये गए वेतन सुरक्षा गार्ड्स को दिलवाने हेतु न केवल सिफारिश की बल्कि नियमानुसार 06 माह का क्लेम भी पेश किया है।
इन सब तथ्यों को सीटू के नेतागण भी जानते हैं किन्तु श्रेय लेने की होड़ में और प्रबंधन की गोद में बैठने की चाहत में ये लोग कर्मियों का नुकसान करने से भी बाज नहीं आते हैं। सीटू के नेतागण तो अपने द्वारा किये गए समझौते को, सार्वजानिक करना तो दूर की बात है, अपने ही श्रमिकों को नहीं दिखाते हैं। ऐसे में इनके नियत में छिपी खोट स्वयं उजागर हो जाती है।
(2) जहाँ तक खदान भत्ता और रात्रि पाली भत्ते की बात है तो इस मुद्दे पर भी सीटू द्वारा कर्मियों को बरगलाया ही जा रहा है क्योंकि इस मुद्दे पर संघ ने महाप्रबंधक कार्मिक (खदान मुख्यालय) से चर्चा की थी जिसपर उन्होंने यह कहा कि चूँकि उक्त ठेका भिलाई से संचालित हो रहा है अतः आईओसी राजहरा के सुरक्षा कर्मियों को खदान भत्ता और रात्रि पाली भाता देने हेतु अलग से स्वीकृति लेनी होगी जिसका प्रयास शुरू किया जा चुका है।
(3) जहाँ तक संवेदनशील जगहों पर गार्ड्स की कमी की बात है तरो इसके लिए भी सीटू के ही नेतागण जिम्मेदार हैं। ठेका शर्तों के मुताबिक हर दो माह में गार्ड्स का रोटेशन होना लिखा गया है किन्तु संघ की जानकारी के अनुसार आज आईओसी राजहरा में सीटू के कुछ नेतागण के करीबी रिश्तेदार सुरक्षा गार्ड के पद पर कार्यरत हैं और उनके कार्यस्थल को सुरक्षित रखने हेतु सीटू द्वारा रोटेशन का विरोध किया गया और उसे बंद करा दिया गया। ऐसे में ये दिखावे की नौटंकी को बंद करते हुए सीटू के नेतागण सीधे तरीके से कर्मियों के हितार्थ क्लेम जमा करें और रोटेशन पद्धति को पुनः शुरू करें।
अंत में उन्होंने कहा कि दरअसल में सीटू एक ऐसा श्रम संगठन है जो केवल समस्या को पैदा करना और उसे जिन्दा रखने में विश्वास करता है। उसे समस्या के समाधान से कोई लेना देना नहीं है। सीटू द्वारा आह्वान किया गया उक्त क्रमिक भूक हड़ताल को केवल नौटंकी कहते हुए एमपी सिंह ने कहा कि जब समस्या समाधान की तरफ बढ़ रहा है तो ऐसे में समाधान के दिशा में न बढ़कर इस दिखावे की क्या आवश्यकता है इसका खुलासा सीटू के नेतागण करें। जहाँ तक संघ की बात है तो संघ ने क्लेम कर दिया है, सुनवाई जारी है और अगर सीटू के इस दिखावे की नौटंकी से सुरक्षा कर्मियों को अगर कोई नुकसान होता है तो संघ इस मामले तो समुचित न्यायलय के समक्ष रखते हुए प्रबंधन एवं सीटू को भी पार्टी बनाने से नहीं चुकेगा। एम पी सिंग केन्द्रीय अध्यक्ष खदान मजदूर संघ भिलाई संबद्ध भारतीय मजदूर संघ

तेलंगाना पुलिस के सामने क्या सत्य उजागर किया है सत्यम ने

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  • नक्सलियों के साथ कांग्रेस नेता की गिरफ्तारी से मचा सियासी बवाल
  • एक -दूसरे पर नक्सलियों से मिले होने का आरोप लगा रहे हैं कांग्रेस और भाजपा के नेता
  • तेलंगाना पुलिस को दिया गया सत्यम का बयान उजागर हो : सिंह


अर्जुन झा
जगदलपुर. बीजापुर जिले के एक युवा नेता की तेलंगाना में दो नक्सलियों के साथ गिरफ्तारी ने बस्तर संभाग में सियासी बवाल मचा दिया है. गिरफ्तार युवक केजी सत्यम को कांग्रेस का पदाधिकारी बताया जा रहा है. हालांकि प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने सत्यम का कांग्रेस से किसी भी तरह का संबंध होने की बात से इंकार किया है. वहीं सत्यम की गिरफ्तारी के बाद कांग्रेस और भाजपा के नेता एक – दूसरे पर नक्सलियों से मिले होने का आरोप लगा रहे हैं. आरोप प्रत्यारोप के दौर के बीच राज्य युवा आयोग के सदस्य अजय सिंह ने सत्यम द्वारा तेलंगाना पुलिस के समक्ष दिए गए बयान का पता लगाने की अपील छत्तीसगढ़ सरकार से की है. वैसे माना जा रहा है कि सत्यम का बयान बीजापुर के कई नेताओं का सत्य उजागर कर सकता है.


करीब सप्ताह भर पहले पड़ोसी राज्य तेलंगाना के हनमा थाना की पुलिस ने बस्तर संभाग के बीजापुर जिले के एक युवक को महिला नक्सलियों के साथ गिरफ्तार किया है. केजी सत्यम नामक यह युवक दोनों महिला नक्सलियों को उनका ईलाज कराने तेलंगाना के वारंगल ले जा रहा था. बताया जाता है कि केजी सत्यम बीजापुर जिला अंतर्गत भोपाल पट्टनम ब्लॉक कांग्रेस कमेटी का महामंत्री है तथा वह जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर का उपाध्यक्ष भी रह चुका है. सत्यम के महिला नक्सलियों के साथ तेलंगाना में पकड़े जाने की खबर जैसे ही बस्तर पहुंची, पूरे संभाग में जैसे सियासी तूफान ही खड़ा हो गया और भारतीय जनता पार्टी के नेताओं को तो कांग्रेस पर हमला बोलने के लिए बैठे बिठाए ही बड़ा हथियार मिल गया. ख़ासकर बीजापुर जिले के भाजपा नेता आक्रामक मुद्रा में आ गए. पूर्व विधायक महेश गागड़ा तथा अन्य भाजपा नेता कांग्रेस के खिलाफ बयानबाजी पर उतर आए. भाजपा नेताओं ने आरोप लगाना शुरू कर दिया कि नक्सलियों के साथ कांग्रेस की सांठगांठ है और दोनों एक दूसरे की मदद करते हैं. वहीं भाजपा के हमलों के बाद प्रदेश कांग्रेस कमेटी की ओर से तुरंत बयान आ गया कि सत्यम कांग्रेस का सदस्य है ही नहीं तथा उससे कांग्रस का कोई लेनादेना भी नहीं है. बीजापुर के भाजपा नेताओं के आरोपों का जवाब देने के लिए बीजापुर के मौजूदा कांग्रेस विधायक विक्रम शाह मंडावी और जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर के अध्यक्ष लालू राठौर ने बीजापुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर माना कि सत्यम कांग्रेस का कार्यकर्त्ता जरूर है, लेकिन नक्सलियों से बीजापुर के कांग्रेस नेताओं का कोई वास्ता नहीं है. इसके साथ ही विधायक श्री मंडावी ने भाजपा नेताओं को याद दिलाया कि जब प्रदेश में भाजपा की सरकार थी तब विधायक रहते महेश गागड़ा ने अपनी पार्टी के तात्कालीन मंडल अध्यक्ष गुट्टा राम को तब बचाने का प्रयास किया था, जब गुट्टाराम नक्सली को ईलाज के लिए ले जाते समय पुलिस ने पकड़ा गया था. श्री शाह ने यह भी कहा कि कांग्रेस के कई नेता नक्सलियों के हाथों मारे जा चुके हैं. झीरम घाटी में प्रदेश के अनेक वरिष्ठ नेताओं के साथ बीजापुर के हमारे नेता बुधराम राणा और विक्रम मांझी भी शहीद हुए थे. अगर नक्सलियों से कांग्रेस की सांठगांठ होती तो नक्सली हमारे नेताओं की हत्या क्यों करते? श्री मंडावी व श्री राठौर ने आरोप लगाया कि भाजपा और नक्सलियों के बीच गहरा रिश्ता है.
ठंड की दस्तक के बीच चढ़ा सियासी पारा
ठंड की दस्तक के बीच चल रहे इस तरह के आरोप – प्रत्यारोपों से बस्तर संभाग में सियासी पारा चढ़ने लगा है. आगामी विधानसभा चुनावों में नक्सलियों से मिलीभगत के मुद्दे को दोनों ही दलों के नेता एक – दूसरे के खिलाफ चुनावी हथियार के रूप में खुलकर इस्तेमाल करेंगे, यह तय है. बस्तर संभाग नक्सली समस्या से जूझ रहा है. बीजापुर जिला इस समस्या से कुछ ज्यादा ही ग्रसित है. ये सच है कि संभाग के अंदरूनी भागों में रहने वाले नेताओं, आम लोगों, व्यापारियों और शासकीय कर्मियों को मज़बूरीवश नक्सलियों के आगे झुकना पड़ता है और उनकी हर जायज नाजायज बातें व मांगें माननी ही पड़ती हैं. सियासी दलों के लोगों को तो एक दूसरे पर कीचड़ उछालने का मौका मिलना चाहिए. ऐसे में चुनावों के समय इस तरह के आक्षेप के तीर छोड़ने से भला नेता कैसे चुकेंगे ? तय है कि अगले साल होने वाले चुनाव में यह मुद्दा हावी रहेगा.
सच्चाई सामने लाए सरकार
राज्य युवा आयोग के सदस्य एवं कांग्रेस के निष्कासित नेता अजय सिंह ने राज्य सरकार से केजी सत्यम क़ी गिरफ्तारी तथा तेलंगाना पुलिस में सत्यम द्वारा दिए गए बयान क़ी सच्चाई सामने लाने का आग्रह किया है. अजय सिंह ने सत्यम के कांग्रेस कार्यकर्त्ता होने या ना होने के संबंध में प्रदेश कांग्रेस कमेटी तथा बीजापुर विधायक व जिला कांग्रेस अध्यक्ष के बयानों को विरोधाभासी बताया है. उन्होंने कहा है कि पांच माह पहले तक सत्यम जिला कांग्रेस कमेटी बीजापुर का उपाध्यक्ष रहा है, फिलहाल वह संगठन के किस पद पर हैं, यह पता नहीं. श्री सिंह ने कहा है कि पूर्व विधायक महेश गागड़ा ने नक्सली सहयोगी मंडल अध्यक्ष गुट्टा राम को पुलिस कार्रवाई से बचाने की कोशिश की थी. जिस नक्सली को गुट्टा राम ईलाज के लिए ले जाते पकड़ाए थे, उस नक्सली से मेरी जेल में मुलाक़ात हुई थी. अजय सिंह ने कहा है कि जिस समय की यह घटना है उस समय वर्तमान कांग्रेस विधायक विक्रम शाह मंडावी जिला कांग्रेस के उपाध्यक्ष थे, तब उन्होंने इस मसले को पुरजोर तरीके से क्यों नहीं उठाया तथा जिला कांग्रेस कमेटी ने सत्यम के खिलाफ अब तक कार्रवाई क्यों नहीं की है ? अजय सिंह ने सवाल उठाया है कि सत्यम ने तेलंगाना पुलिस के समक्ष ऐसा क्या बयान दे दिया है कि विधायक श्री शाह और जिला कांग्रेस कमेटी उस पर कार्रवाई करने से बच रहे हैं. इससे पार्टी और सरकार की छवि धूमिल हो रही है. अजय सिंह ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार से अपेक्षा की है कि सत्यम के बयान का पता लगाया जाए और यदि उसके बयान में किसी स्थानीय नेता का नाम आया हो तो उस नेता पर भी कार्रवाई की जाए.

सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने ब्लैक स्पॉट क्षेत्र बालोदगहन मरकाटोला में रोड़ किनारे उगे झाड़ियों की किया गया साफ सफाई

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  • दिनांक 12.10.2022 को विषेश अभियान चलाकर लापरवाह वाहन चालकों पर एम व्ही एक्ट के कुल 65 प्रकरण में समन शुल्क 16,000/- रूपये का किया गया चालानी कार्यवाही ।
  • आम नागरिकों एवं वाहन चालकों से यातायात नियमों का पालन करने किया गया अपील।

पुलिस अधीक्षक बालोद जितेन्द्र यादव के दिशानिर्देश, श्रीमान् अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हरीश राठौर एवं उप पुलिस अधीक्षक श्री राजेश बांगडे के मार्गदर्षन एवं यातायात प्रभारी श्री दिलेश्वर चंद्रवंशी के नेतृत्व में दिनांक 12.10.2022 को जिला बालोद के समस्त थाना/चौकी में विषेश अभियन चलाकर मोटरयान अधिनियम के तहत् कार्यवाही करने निर्देषित किया गया, जिससे जिले में मोटरयान अधिनियम के उल्लंघन करने वाले 65 लापरवाह वाहन चालकों पर वैधानिक कार्यवाही कर 16,000 रूपये समन शुल्क वसूल किया गया

तथा यातायात बालोद पुलिस द्वारा मरकाटोला चौक के पास चेकिंग अभियान के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाने के उद्देष्य से सड़क किनारे अनियंत्रित रूप से उगे झाड़ियों की साफ सफाई का अभियान चलाया गया जिससे वाहन चलाने के द्वारा चालकों को सामने से आ रहे वाहनों का स्पष्ट देखा जा सकें । यातायात पुलिस द्वारा कार्यवाही के दौरान आम नागरिकों को यातायात नियमों के पालन करने एवं वाहन चलाते समय हेलमेट सीट बेल्ट का प्रयोग करने की समझाईश के साथ-साथ यातायात नियमों का पालन नहीं करने वाले चालकों पर मोटरयान अधिनियम के विभिन्न धाराओं के उल्लंघन जैसे बिना सीट बेल्ट लगाये वाहन चलाने, दोपहिया वाहन में तीन सवारी बैठाकर चलाने, शराब सेवन कर वाहन चलाने, नम्बर प्लेट का स्पष्ट न लिखा होना, एवं मौके पर वाहन के दस्तावेज पेश नहीं करने, रेड़ सिग्नल जंप करने पर चालानी कार्यवाही की गई है।

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भतरा समाज एवं नाई सेन समाज के प्रतिनिधियों ने सामाजिक भवन हेतु जमीन मिलने पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन का आभार व्यक्त किया

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भतरा समाज के प्रतिनिधियों ने विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन समेत एक दूसरे का मूंह मीठा कराकर खुशियां मनाई

विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव (नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग) रेखचंद जैन के प्रयासों से प्रदेश के यशस्वी मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी ने भतरा समाज एवं सर्व नाई सेन समाज समेत 14 समाजों को प्रदान की है सामाजिक भवन हेतु भूमि पट्टा

भतरा समाज एवं सर्व नाई सेन समाज के प्रतिनिधियों ने विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन से सौजन्य भेंट कर सामाजिक भवन हेतु भूमि उपलब्ध कराने के लिए आभार व्यक्त किया

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा की हमारे प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी जो खुद एक किसान पुत्र हैं सामाजिक संगठनों एवं सामाजिक व्यवस्था के महत्व को समझते हैं इसलिए वे पूरे प्रदेश विभिन्न सामाजिक संगठनों को सामाजिक भवन हेतु भूमि एवं धन राशि उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए हैं जिसके परिपालन में कल 14 समाजों को भूमि पट्टा उपलब्ध कराया गया है

इस अवसर पर समाज के प्रतिनिधियों ने कहा की प्रदेश के संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जी के निर्देश तथा विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन के अथक प्रयासों से उनके सामाजिक भवनों के लिए जो भूमि प्रदान की गई है इसके लिए पूरा समाज माननीय मुख्यमंत्री जी प्रभारी मंत्री कवासी लखमा जी एवं विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन का आभार व्यक्त करते हैं

इस अवसर पर भतरा समाज के संभागीय अध्यक्ष रतन कश्यप, जिलाध्यक्ष लैखन बघेल,सियाराम नाग,कुलधर गोयल, नरसिंह बघेल,सामसन कश्यप,रस्सीलाल कश्यप,दयाराम कश्यप,मानसाय बघेल,हरिबंधु नाग,तरु,परम बघेल,डमरू बघेल, घनश्याम नाग,रमेश कश्यप, गणेश गोयल, दशरथ नेताम, राजेंद्र बघेल,धर्म बघेल,रतिराम बघेल, प्रहलाद,सुखराम गोयल,जयराम गोयल एवं सर्व नाई सेन समाज के अध्यक्ष मनोज ठाकुर, राधेश्याम श्रीवास,संदीप श्रीवास, वेंकट स्वामी,कृष्णा राव,रामा राव,वसंत राव,दंडासी,सत्य नारायण,भाष्कर राव,राजू,सियाराम ठाकुर,राजू भाई,गौरी,गुड्डू, जितेन्द्र,हरि समेत समाज प्रतिनिधि उपस्थित रहे

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