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टाटा ग्रुप को दिया जाए नगरनार संयंत्र

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जनभावना: बस्तर अंचल के लोगों का कहना है कि निजी क्षेत्र के हवाले प्रस्तावित संयंत्र को करना ही है तो टाटा से बेहतर विकल्प नहीं – एयर इंडिया की तर्ज पर हो सकेगा नगरनार इस्पात संयंत्र का उद्धार – इस आदिवासी अंचल के लोगों की उम्मीदें भी होंगी फलीभूत

(अर्जुन झा)

जगदलपुर : बस्तर के लोगों की उम्मीदों और सपनों को पंख लगाने में सहायक साबित होने वाले प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र को आकार देने की सरकारी कोशिश तेज हो गई है. चर्चा है कि सरकार इस संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करने जा रही है. ऐसी चर्चाओं के बीच अंचल से अब यह आवाज़ उठने लगी है क़ि नगरनार संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करना ही है, तो क्यों ना उसे टाटा ग्रुप के हवाले कर दिया जाए. इससे संयंत्र का कामकाज बेहतर ढंग से संचालित हो सकेगा और सदैव कर्मचारी एवं श्रमिक हित का ध्यान रखने वाला यह ग्रुप बस्तर के लोगों क़ी उम्मीदों पर खरा भी उतरेगा.

फिलहाल राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधीन प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र क़ी स्थापना के लिए कवायद तेज हो गई है. सूत्र बताते हैं कि सरकार इस इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में सौंपने वाली है. इसके लिए टेंडर भी बुलाए जा रहे हैं. बस्तर के लोग चाहते हैं कि सरकार ही इस संयंत्र को चलाए और अगर निजी हाथों में सौंपने की ही सरकार की मंशा है, तो स्टील उद्योग का विशेषज्ञ माने जाने वाले टाटा उद्योग समूह को नगरनार संयंत्र सौंप दिया जाए. इसके पीछे लोगों की दलील है कि जिस तरह लगातार दुर्दशा का शिकार हो रही सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया टाटा के हाथ में जाने से सारे देश में यह उम्मीद जागी है कि अब इसका संचालन बेहतर तरीके से होगा और यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा। ठीक उसी तरह से टाटा समूह के हाथों में जाने से नगरनार इस्पात संयंत्र भी विकास के आयाम को छुएगा. आज जिन क्षेत्रों में अच्छी विमान सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां तेजी से विकास के रास्ते खुल रहे हैं। इसी भावना से बस्तर के मुख्यालय में विमान सेवा का दायरा बढ़ा है तो इसी सिलसिले में बस्तर में यह चर्चा भी छिड़ गई है कि बस्तर के नगरनार में स्थापित एनएमडीसी के स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने के लिए केंद्र सरकार उतावली है तो क्यों न इस प्लांट का संचालन अपने हाथ में लेने टाटा समूह पहल करे। कुछ साल पहले टाटा ने बस्तर में औद्योगिक विस्तार के लिए रूचि दिखाते हुए जमीन अधिग्रहण किया था। तब टाटा ग्रुप ने यहाँ बड़ी रकम खर्च कि थी. लेकिन बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि टाटा का उद्योग स्थापित नहीं हो सका और आखिरकार समयावधि बीत जाने के बाद जमीन आदिवासियों को वापस हो गई। अगर टाटा का उद्योग बस्तर में स्थापित हो गया होता तो यहां के आदिवासियों को रोजगार के अवसर मिलते। अन्य बस्तरियों का भी भला होता तो बस्तर विकास की संभावनाएं भी तेजी से बढ़तीं। उम्मीद की जा रही थी कि टाटा का उद्योग स्थापित होने पर बस्तर का विकास टाटानगर जमशेदपुर की तर्ज पर संभव होगा। लेकिन किन्हीं कारणों से यह उम्मीद टूट गई। अब टाटा ने एयर इंडिया के उद्धार की पहल की है तो बस्तर में इन संभावनाओं की दस्तक का इंतजार शुरू हो गया है कि टाटा बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के लिए क्या वैसी ही पहल करेगा, जैसी एयर इंडिया के लिए की है? वैसे भी टाटा स्टील उद्योग क्षेत्र का एक विश्वसनीय ग्रुप है। टाटा समूह देश के लोगों के बीच औद्योगिक विकास के साथ साथ सामाजिक सरोकार का भी प्रतीक माना जाता है।
सांसद बैज उठा चुके हैं मुद्दा
नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के प्रयासों का शुरू से ही भारी विरोध होता आया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में संकल्प पारित हो चुका है कि यह प्लांट राज्य शासन को दिया जाय। राज्य इसका संचालन करेगा। बस्तर सांसद दीपक बैज भी निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए लोकसभा में भी यह मामला उठा चुके हैं लेकिन अब तक केंद्र की ओर ले ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि नगरनार स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ सरकार को मिल सकता है। यदि यह राज्य को मिलता है तो सरकार खुद संचालित करे, यह बस्तर के लोग चाहते हैं किंतु तब की स्थिति में अगर राज्य ने किसी औद्योगिक संस्थान को इसके संचालन से जोड़ा तो बात वहीं की वहीं रह जायेगी। अब ऐसी स्थिति में कि जब नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण न होने की कोई गारंटी नहीं है तो स्टील क्षेत्र के अनुभवी उद्योग समूह टाटा द्वारा इस दिशा में पहल की जाय तो बस्तर के विकास की राह आसान हो सकती है। यहां के आदिवासियों ने पूर्व में टाटा को अपनी जमीन आखिर विकास की उम्मीद में ही तो दी थी। अब भी यही भावना है कि बस्तर क्षेत्र के विकास और बस्तरियों के रोजगार की संभावना लेकर टाटा की बस्तर वापसी होती है तो यह भी एक आशाओं से भरा कदम होगा। हम यहां इस मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से परे यह देखें कि यदि निजीकरण से बस्तर का कल्याण होने की उम्मीद निकल सकती है तो इसमें राजनीतिक अड़ंगेबाजी फिजूल है। बस्तर तो सिर्फ यही चाहेगा कि नगरनार स्टील प्लांट का संचालन ऐसा हो कि बस्तर के विकास को गति मिल सके और यहां के लोगों को रोजगार मिले।

टाटा ग्रुप को दिया जाए नगरनार संयंत्र

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जनभावना: बस्तर अंचल के लोगों का कहना है कि निजी क्षेत्र के हवाले प्रस्तावित संयंत्र को करना ही है तो टाटा से बेहतर विकल्प नहीं – एयर इंडिया की तर्ज पर हो सकेगा नगरनार इस्पात संयंत्र का उद्धार – इस आदिवासी अंचल के लोगों की उम्मीदें भी होंगी फलीभूत

(अर्जुन झा)

जगदलपुर : बस्तर के लोगों की उम्मीदों और सपनों को पंख लगाने में सहायक साबित होने वाले प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र को आकार देने की सरकारी कोशिश तेज हो गई है. चर्चा है कि सरकार इस संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करने जा रही है. ऐसी चर्चाओं के बीच अंचल से अब यह आवाज़ उठने लगी है क़ि नगरनार संयंत्र को निजी क्षेत्र के हवाले करना ही है, तो क्यों ना उसे टाटा ग्रुप के हवाले कर दिया जाए. इससे संयंत्र का कामकाज बेहतर ढंग से संचालित हो सकेगा और सदैव कर्मचारी एवं श्रमिक हित का ध्यान रखने वाला यह ग्रुप बस्तर के लोगों क़ी उम्मीदों पर खरा भी उतरेगा.

फिलहाल राष्ट्रीय खनिज विकास निगम (एनएमडीसी) के अधीन प्रस्तावित नगरनार इस्पात संयंत्र क़ी स्थापना के लिए कवायद तेज हो गई है. सूत्र बताते हैं कि सरकार इस इस्पात संयंत्र को निजी हाथों में सौंपने वाली है. इसके लिए टेंडर भी बुलाए जा रहे हैं. बस्तर के लोग चाहते हैं कि सरकार ही इस संयंत्र को चलाए और अगर निजी हाथों में सौंपने की ही सरकार की मंशा है, तो स्टील उद्योग का विशेषज्ञ माने जाने वाले टाटा उद्योग समूह को नगरनार संयंत्र सौंप दिया जाए. इसके पीछे लोगों की दलील है कि जिस तरह लगातार दुर्दशा का शिकार हो रही सरकारी विमानन कम्पनी एयर इंडिया टाटा के हाथ में जाने से सारे देश में यह उम्मीद जागी है कि अब इसका संचालन बेहतर तरीके से होगा और यात्री सुविधाओं में भी इजाफा होगा। ठीक उसी तरह से टाटा समूह के हाथों में जाने से नगरनार इस्पात संयंत्र भी विकास के आयाम को छुएगा. आज जिन क्षेत्रों में अच्छी विमान सेवाएं उपलब्ध हैं, वहां तेजी से विकास के रास्ते खुल रहे हैं। इसी भावना से बस्तर के मुख्यालय में विमान सेवा का दायरा बढ़ा है तो इसी सिलसिले में बस्तर में यह चर्चा भी छिड़ गई है कि बस्तर के नगरनार में स्थापित एनएमडीसी के स्टील प्लांट को निजी हाथों में सौंपने के लिए केंद्र सरकार उतावली है तो क्यों न इस प्लांट का संचालन अपने हाथ में लेने टाटा समूह पहल करे। कुछ साल पहले टाटा ने बस्तर में औद्योगिक विस्तार के लिए रूचि दिखाते हुए जमीन अधिग्रहण किया था। तब टाटा ग्रुप ने यहाँ बड़ी रकम खर्च कि थी. लेकिन बाद में कुछ ऐसे हालात बने कि टाटा का उद्योग स्थापित नहीं हो सका और आखिरकार समयावधि बीत जाने के बाद जमीन आदिवासियों को वापस हो गई। अगर टाटा का उद्योग बस्तर में स्थापित हो गया होता तो यहां के आदिवासियों को रोजगार के अवसर मिलते। अन्य बस्तरियों का भी भला होता तो बस्तर विकास की संभावनाएं भी तेजी से बढ़तीं। उम्मीद की जा रही थी कि टाटा का उद्योग स्थापित होने पर बस्तर का विकास टाटानगर जमशेदपुर की तर्ज पर संभव होगा। लेकिन किन्हीं कारणों से यह उम्मीद टूट गई। अब टाटा ने एयर इंडिया के उद्धार की पहल की है तो बस्तर में इन संभावनाओं की दस्तक का इंतजार शुरू हो गया है कि टाटा बस्तर के नगरनार स्टील प्लांट के लिए क्या वैसी ही पहल करेगा, जैसी एयर इंडिया के लिए की है? वैसे भी टाटा स्टील उद्योग क्षेत्र का एक विश्वसनीय ग्रुप है। टाटा समूह देश के लोगों के बीच औद्योगिक विकास के साथ साथ सामाजिक सरोकार का भी प्रतीक माना जाता है।
सांसद बैज उठा चुके हैं मुद्दा
नगरनार स्टील प्लांट के निजीकरण के प्रयासों का शुरू से ही भारी विरोध होता आया है. छत्तीसगढ़ विधानसभा में संकल्प पारित हो चुका है कि यह प्लांट राज्य शासन को दिया जाय। राज्य इसका संचालन करेगा। बस्तर सांसद दीपक बैज भी निजीकरण का पुरजोर विरोध करते हुए लोकसभा में भी यह मामला उठा चुके हैं लेकिन अब तक केंद्र की ओर ले ऐसा कोई संकेत नहीं मिला है कि नगरनार स्टील प्लांट छत्तीसगढ़ सरकार को मिल सकता है। यदि यह राज्य को मिलता है तो सरकार खुद संचालित करे, यह बस्तर के लोग चाहते हैं किंतु तब की स्थिति में अगर राज्य ने किसी औद्योगिक संस्थान को इसके संचालन से जोड़ा तो बात वहीं की वहीं रह जायेगी। अब ऐसी स्थिति में कि जब नगरनार स्टील प्लांट का निजीकरण न होने की कोई गारंटी नहीं है तो स्टील क्षेत्र के अनुभवी उद्योग समूह टाटा द्वारा इस दिशा में पहल की जाय तो बस्तर के विकास की राह आसान हो सकती है। यहां के आदिवासियों ने पूर्व में टाटा को अपनी जमीन आखिर विकास की उम्मीद में ही तो दी थी। अब भी यही भावना है कि बस्तर क्षेत्र के विकास और बस्तरियों के रोजगार की संभावना लेकर टाटा की बस्तर वापसी होती है तो यह भी एक आशाओं से भरा कदम होगा। हम यहां इस मामले में राजनीतिक दृष्टिकोण से परे यह देखें कि यदि निजीकरण से बस्तर का कल्याण होने की उम्मीद निकल सकती है तो इसमें राजनीतिक अड़ंगेबाजी फिजूल है। बस्तर तो सिर्फ यही चाहेगा कि नगरनार स्टील प्लांट का संचालन ऐसा हो कि बस्तर के विकास को गति मिल सके और यहां के लोगों को रोजगार मिले।

शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी ” के आगे पाना, पेंचिस को हथियार बना किया गरीबी-भुखमरी के असुर का संहार

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नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए रोल मॉडल है हेमवती बस्तर की पहली ऑटो मेकेनिक है यह आदिवासी महिला
अर्जुन शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी ” के आगे पाना, पेंचिस को हथियार बना किया गरीबी-भुखमरी के असुर का संहार नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए रोल मॉडल है हेमवती बस्तर की पहली ऑटो मेकेनिक है यह आदिवासी महिला

अर्जुन झा

बकावंड जगदलपुर : नारी को देवी और शक्ति का दर्जा यूं ही नहीं दिया गया है. आदिकाल से देवी तुल्य मानते आ रहे हैं हम नारी को . इसके पीछे कुछ तो वजह होगी ? वजह हमें नारी के स्वभाव, आचरण, व्यवहार और कार्यों में साफ नज़र आ जाती है. देवी पार्वती की तरह नारी के चेहरे और आंखों से ममता तथा वात्सल्य बरसता है, तो माता दुर्गा जी की तरह विपदाओं तथा बुराई रूपी असुरों से लड़ने की शक्ति भी परिलक्षित होती है. कुछ ऐसी शक्ति स्वरूपा छवि बस्तर की नारी हेमवती नाग में भी नज़र आती है, जिसने पाना, पेंचिस जैसे औजारों को हथियार बनाकर गरीबी और भुखमरी रूपी असुर का संहार किया है.

अपनी काबिलियत के दम पर हेमवती आज बस्तर की अन्य युवतियों तथा महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत और उनका रोल मॉडल बन चुकी है. ऑटो रिपेयरिंग का कार्य करने वाली यह महिला तो पुरुषों को भी ऑटो रिपेयरिंग वाला काम सिखाती है. लोगों का शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी” के आगे. बस्तर ब्लाक गांव रेटावंड निवासी आदिवासी महिला हेमवती नाग ऑटो मैकेनिक का काम कर ना सिर्फ आत्मनिर्भर बन चुकी है, बल्कि अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रही है. वह बस्तर संभाग में ऑटो मेकेनिक का काम करने पहली महिला है. हेमवती नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत तथा रोल मॉडल से कतई कम नहीं है.

वहीं उसका हौसला उन पुरुषों और युवकों के गाल पर तमाचा मारता सा प्रतीत होता है, जो अक्सर बेरोजगारी का रोना रोते रहते हैं. इंसान अगर पूरे जज्बे के साथ कोई भी पेशा अपना ले तो वह हेमवती की तरह ही सम्मान और सुखपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकता है. हेमवती नाग ने आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और कम उम्र में ही कुछ कर दिखाने की ठान ली. उसने ऑटो रिपेयरिंग के क्षेत्र में कदम रखा और सीखते- सीखते इस काम में पारंगत हो गई. शुरू-शुरू में वह सिर्फ मोटर सायकिलों की रिपेयरिंग का काम करती रही. फिर थोड़ी आमदनी बढ़ने पर उसने ऑटो पार्ट्स की छोटी सी दुकान भी ऑटो वर्कशॉप में ही खोल ली. आज उसकी दुकान और ऑटो वर्कशॉप चल पड़ी है. मोटर सायकलों की तकनिकी खराबियों को चंद मिनटों में ही दूर कर लेने की हेमवती की काबिलियत ने उसे अंचल में खासी प्रसिद्धि दिला दी और आज आलम यह है कि उसकी वर्कशॉप में मरम्मत के लिए बाईक लेकर पहुंचने वालों की लाईन लगी रहती है। सुखद अनुभूति देने वाली बात यह है कि हेमवती ने कई युवकों को भी ऑटो रिपेयरिंग के काम में प्रशिक्षित कर दिया है. इनमें से कुछ युवक तो हेमवती की वर्कशॉप में ही काम कर बेहतर ढंग से अपना जीवन यापन कर रहे हैं. हेमवती नाग कहती है कि बाइक रिपेयरिंग के क्षेत्र में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि पुरुष वर्ग का इस सेक्टर में दबदबा रहा है। मगर हेमवती जज्बा और हौसला उसके क़दमों को लगातार आगे बढ़ाते रहे. इसी हौसले और जज्बे के दम पर हेमवती आज इस मुकाम तक़ पहुंच पाई है. अपने इस पेशे से वह इतना कमा लेती है कि किसी भी चीज के लिए उसे मोहताज होना नहीं पड़ता तथा दूसरों के सामने हाथ फैलाना नहीं पड़ता. अपनी रोज की आय से वह कुछ आर्थिक बचत भी कर लेती है. हेमवती की काम के प्रति लगन एवं कर्मनिष्ठा को देख हर किसी का सिर उसके सामने श्रद्धा और सम्मानपूर्वक झुक जाता है. तीन बच्चों की मां है यह मातृशक्ति हेमवती ने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ लोगों ने यह कहते हुए उसे हतोत्साहित करने की कोशिश भी की कि मोटरसाइकिल रिपेयरिंग का काम आसान नहीं है, इसमें काफी मेहनत और ताकत लगती है। हेमवती ऐसे लोगों की बातों को नजरअंदाज कर अपने काम में लगी रही और अब वह इस कार्य में किसी भी मायने में पुरुषों से कतई कमतर नहीं है.:हेमवती नाग तीन बच्चों की मां है और सबसे छोटा बच्चा दो महीने का है. वह एक मां और पालनहार की भूमिका अच्छे ढंग से निभा रही है. युवतियों को दिलाएंगे ट्रेनिंग: बैज हेमवती नाग के हौसले और जज्बे से बेहद प्रभावित बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा है कि हेमवती सचमुच वंदनीय और शक्ति स्वरूपा है. बस्तर की हर युवती और महिला को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. श्री बैज ने कहा कि वे हेमवती को और आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेंगे. इसके साथ ही उनकी वर्कशॉप में बस्तर की अन्य युवतियों को प्रशिक्षण दिलाने का भी प्रयास करेंगे.


बकावंड जगदलपुर. नारी को देवी और शक्ति का दर्जा यूं ही नहीं दिया गया है. आदिकाल से देवी तुल्य मानते आ रहे हैं हम नारी को . इसके पीछे कुछ तो वजह होगी ? वजह हमें नारी के स्वभाव, आचरण, व्यवहार और कार्यों में साफ नज़र आ जाती है. देवी पार्वती की तरह नारी के चेहरे और आंखों से ममता तथा वात्सल्य बरसता है, तो माता दुर्गा जी की तरह विपदाओं तथा बुराई रूपी असुरों से लड़ने की शक्ति भी परिलक्षित होती है. कुछ ऐसी शक्ति स्वरूपा छवि बस्तर की नारी हेमवती नाग में भी नज़र आती है, जिसने पाना, पेंचिस जैसे औजारों को हथियार बनाकर गरीबी और भुखमरी रूपी असुर का संहार किया है. अपनी काबिलियत के दम पर हेमवती आज बस्तर की अन्य युवतियों तथा महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत और उनका रोल मॉडल बन चुकी है. ऑटो रिपेयरिंग का कार्य करने वाली यह महिला तो पुरुषों को भी ऑटो रिपेयरिंग वाला काम सिखाती है. लोगों का शीश स्वतः झुक जाता है बस्तर की इस “देवी” के आगे.
बस्तर ब्लाक गांव रेटावंड निवासी आदिवासी महिला हेमवती नाग ऑटो मैकेनिक का काम कर ना सिर्फ आत्मनिर्भर बन चुकी है, बल्कि अपने परिवार का भरण पोषण भी कर रही है. वह बस्तर संभाग में ऑटो मेकेनिक का काम करने पहली महिला है. हेमवती नई पीढ़ी की युवतियों और महिलाओं के लिए प्रेरणास्त्रोत तथा रोल मॉडल से कतई कम नहीं है. वहीं उसका हौसला उन पुरुषों और युवकों के गाल पर तमाचा मारता सा प्रतीत होता है, जो अक्सर बेरोजगारी का रोना रोते रहते हैं. इंसान अगर पूरे जज्बे के साथ कोई भी पेशा अपना ले तो वह हेमवती की तरह ही सम्मान और सुखपूर्वक जीवन निर्वाह कर सकता है. हेमवती नाग ने आर्थिक तंगी की वजह से पढ़ाई बीच में ही छोड़ दी और कम उम्र में ही कुछ कर दिखाने की ठान ली. उसने ऑटो रिपेयरिंग के क्षेत्र में कदम रखा और सीखते- सीखते इस काम में पारंगत हो गई. शुरू-शुरू में वह सिर्फ मोटर सायकिलों की रिपेयरिंग का काम करती रही. फिर थोड़ी आमदनी बढ़ने पर उसने ऑटो पार्ट्स की छोटी सी दुकान भी ऑटो वर्कशॉप में ही खोल ली. आज उसकी दुकान और ऑटो वर्कशॉप चल पड़ी है. मोटर सायकलों की तकनिकी खराबियों को चंद मिनटों में ही दूर कर लेने की हेमवती की काबिलियत ने उसे अंचल में खासी प्रसिद्धि दिला दी और आज आलम यह है कि उसकी वर्कशॉप में मरम्मत के लिए बाईक लेकर पहुंचने वालों की लाईन लगी रहती है। सुखद अनुभूति देने वाली बात यह है कि हेमवती ने कई युवकों को भी ऑटो रिपेयरिंग के काम में प्रशिक्षित कर दिया है. इनमें से कुछ युवक तो हेमवती की वर्कशॉप में ही काम कर बेहतर ढंग से अपना जीवन यापन कर रहे हैं.
हेमवती नाग कहती है कि बाइक रिपेयरिंग के क्षेत्र में काम करना किसी चुनौती से कम नहीं था, क्योंकि पुरुष वर्ग का इस सेक्टर में दबदबा रहा है। मगर हेमवती जज्बा और हौसला उसके क़दमों को लगातार आगे बढ़ाते रहे. इसी हौसले और जज्बे के दम पर हेमवती आज इस मुकाम तक़ पहुंच पाई है. अपने इस पेशे से वह इतना कमा लेती है कि किसी भी चीज के लिए उसे मोहताज होना नहीं पड़ता तथा दूसरों के सामने हाथ फैलाना नहीं पड़ता. अपनी रोज की आय से वह कुछ आर्थिक बचत भी कर लेती है. हेमवती की काम के प्रति लगन एवं कर्मनिष्ठा को देख हर किसी का सिर उसके सामने श्रद्धा और सम्मान
पूर्वक झुक जाता है.
तीन बच्चों की मां है यह मातृशक्ति
हेमवती ने बताया कि शुरुआती दौर में कुछ लोगों ने यह कहते हुए उसे हतोत्साहित करने की कोशिश भी की कि मोटरसाइकिल रिपेयरिंग का काम आसान नहीं है, इसमें काफी मेहनत और ताकत लगती है। हेमवती ऐसे लोगों की बातों को नजरअंदाज कर अपने काम में लगी रही और अब वह इस कार्य में किसी भी मायने में पुरुषों से कतई कमतर नहीं है.:हेमवती नाग तीन बच्चों की मां है और सबसे छोटा बच्चा दो महीने का है. वह एक मां और पालनहार की भूमिका अच्छे ढंग से निभा रही है.
युवतियों को दिलाएंगे ट्रेनिंग: बैज
हेमवती नाग के हौसले और जज्बे से बेहद प्रभावित बस्तर सांसद दीपक बैज ने कहा है कि हेमवती सचमुच वंदनीय और शक्ति स्वरूपा है. बस्तर की हर युवती और महिला को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए. श्री बैज ने कहा कि वे हेमवती को और आगे बढ़ाने के लिए हर संभव मदद करेंगे. इसके साथ ही उनकी वर्कशॉप में बस्तर की अन्य युवतियों को प्रशिक्षण दिलाने का भी प्रयास करेंगे.

अभाविप ने विरोध प्रदर्शन करते हुवे फुका उच्च शिक्षा मंत्री का पुतला प्रत्यक्ष प्रणाली से की छात्रसंघ चुनाव की माँग

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आज अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद छत्तीसगढ़ प्रांत द्वारा प्रदेश के प्रत्येक विश्वविद्यालय महाविद्यालय परिसर के सम्मुख छात्रसंघ चुनाव प्रत्यक्ष प्रणाली से कराने की माँग को लेकर उच्चशिक्षा मंत्री का पुतला दहन किया गया । ज्ञात हो अभाविप प्रारंभ से ही प्रत्यक्ष प्रणाली से छात्रसंघ चुनाव की मांग कर रहा है और इस संदर्भ में इस वर्ष प्रत्येक महाविद्यालय और विश्वविद्यालयों में ज्ञापन सौंपा था । अभाविप का सुविचारित मत है कि छात्रसंघ चुनाव के माध्यम से ही समाज के सम्मुख एक शसक्त छात्र नेतृत्व उभर कर सामने आती है जो निकट भविष्य में समाज जीवन के विभिन्न क्षेत्रों में समाज का नेतृत्व करती है ।

प्रदेश मंत्री मनोज वैष्णव ने कहां की राजस्थान में जिस तरह से छात्र संघ चुनाव हुए और राजस्थान की युवा शक्ति ने जिस तरह से सत्तारूढ़ पार्टी के छात्र संगठन को नकारा उससे छत्तीसगढ़ सरकार डरी हुई है और कहीं पूरे प्रदेश की युवा शक्ति उसे नकार न दे इस डर से वह छात्र संघ चुनावों से पीछे हट रही है , प्रदेश सरकार छात्र शक्ति से डर रही है। जिला संयोजक वरूण साहनी ने कहा कि अभाविप विद्यार्थियों के अधिकार के लिए सैदव संघर्षरत रही है हम विद्यार्थियों के अधिकार का हनन नही होने देंगे । इसी निमित्त आज बस्तर विश्वविद्यालय के सम्मुख विद्यार्थियों संग अभाविप बस्तर द्वारा उच्च शिक्षा मंत्री उमेश पटेल का पुतला दहन कर विरोध दर्ज किया गया |

चहेते ठेकेदारों के लिए ऐसा हथकंडा

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  • निविदा पेश करने के आखिरी दिन प्रकाशित कराया विज्ञापन
  • ग्रामीण यंत्रिकी सेवा विभाग दंतेवाड़ा ने किया l बड़ा खेल
  • फायदा पहुंचाने वाले ठेकेदारों को उपकृत करने का मामला
  • बचेली नगर पंचायत में भी अपनाया गया ऐसा ही हथकंडा
अर्जुन झा

जगदलपुर/दंतेवाड़ा। आदिवासी अंचल बस्तर में शासकीय विभागों के अधिकारियों द्वारा कुछ चहेते ठेकेदारों से सांठगांठ कर सरकारी धन की किस कदर लूट की जा रही है, इसके कई उदाहरण दंतेवाड़ा जिले में सामने आ रहे हैं . एक नया मामला इस जिले के ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग (आरईएस ) में उजागर हुआ है. विभाग में अधिकारियों के चहेते ठेकेदारों को पिछले दरवाजे से काम दिलाने टेण्डर प्रक्रिया में घालमेल किया गया है। चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने टेण्डर जमा करने के अंतिम दिन निविदा प्रकाशित करवाई गई । इसकी शिकायत जिला कलेक्टर से की गई है.ऐसा ही हथकण्डा पूर्व में बचेली नगर पंचायत में भी अपनाए जाने की खबर है।

दंतेवाड़ा आरईएस में किए गए फर्जीवाड़ा की जानकारी मिलने के बाद कुछ अन्य ठेकेदारों ने दंतेवाड़ा कलेक्टर से शिकायत कर टेण्डर प्रक्रिया नए सिरे से पूर्ण कराने तथा मामले की जांच और दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। दंतेवाड़ा जिले में आरईएस, नगरीय निकाय एवं पंचायत आदि विभागों में कमीशन के फेर में चहेते ठेकेदारों को काम दिलाने का खेल चल रहा है. आरईएस दंतेवाड़ा के मामले की शिकायत करने वाले ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि कई विभागों में अधिकारी नेता अपने चेहते ठेकेदारों को काम दिलाने में कमीशन का खेल चला रहे हैं. ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग दंतेवाड़ा के माध्यम से जिला निर्माण समिति के तहत गीदम हादम पारा के कृषि विज्ञान केन्द्र में 123 लाख की लागत से बाउण्ड्रीवाल का निर्माण कराया जाना है . इसके लिए नोडल अधिकारी कार्यपालन अभियंता ग्रामीण यांत्रिकी सेवा संभाग दंतेवाड़ा को बनाया गया है . इस निर्माण कार्य के लिए निविदा प्रकाशन 13 सितंबर 2022 को कराया गया, जिसमें टेण्डर आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 19 सितंबर शाम 5 बजे निर्धारित की गई थी। नाम नहीं छापने की शर्त पर ठेकेदारों ने आरोप लगाया है कि निविदा क्रमांक 479/ जिनिस/ग्रा.यां.सेवा/ 2022 में निविदा जमा करने के अंतिम तिथि के पूर्व निविदा आमंत्रण विज्ञापन प्रकाशित किया जाना था, लेकिन निविदा आमंत्रण के विज्ञापन का प्रकाशन निविदा जमा करने के अंतिम दिन 19 सितंबर को कराया गया. ऐसा करके चहेते ठेकेदार को निर्माण कार्य देने का प्रयास किया गया. शिकायतकर्ता ठेकेदार इसे लेकर आरईएस कार्यालय में आपत्ति भी दर्ज करा चुके हैं। ठेकेदारों के दफ्तर पहुंचते ही वहां के जिम्मेदार अधिकारी कुर्सी छोड़ चलते बने. अधिकारी ने ठेकेदारों की एक नहीं सुनी। बचेली में भी गोलमाल जानकारी के अनुसार बचेली नगर पालिका में भी चहेते ठेकेदारों को काम दिलाकर कमीशन का खेल चल रहा है। ऐसी खबर है कि वहां भी आरईएस विभाग की तरह ही अंतिम दिनांक को निविदा प्रकाशित कर लगभग साढ़े तीन करोड़ से अधिक का कार्य चहेते ठेकेदारों को दे दिया गया. बताया जा रहा है कि यह कार्य 14वें वित्त आयोग के तहत किया जाना था. वहां 14 सितंबर को निविदा प्रक्रिया में अनियमिता कर टेण्डर देने का खेल किए जाने की खबर है। कलेक्टर से मामले की शिकायत गोपनीय ढंग से टेण्डर दिए जाने को लेकर ठेकेदारों ने दंतेवाड़ा कलेक्टर विनीत नंदनवार से मुलाकात कर मामले की शिकायत की है. मामला उजागर करने वाले ठेकेदारों ने ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग दंतेवाड़ा की निविदा प्रक्रिया को निरस्त कर पुनः निविदा आमंत्रण सूचना प्रकाशित कराने की मांग की है। ठेकेदारों का आरोप निराधार ग्रामीण यांत्रिकी सेवा विभाग के कार्यपालन अभियंता एसआर खरे ने बताया कि 13 सितंबर को जनसंपर्क विभाग को निविदा प्रकाश हेतु पत्र जारी कर दिया गया था, लेकिन उक्त निविदा का प्रकाशन 19 सितंबर को अखबारों में किया गया है जो अंतिम दिनांक था। उन्होंने निविदा निरस्त कर नए सिरे से निविदा प्रकाशन की बात कही। उन्होंने बताया कि चेहते ठेकेदारों को काम देने का आरोप लगता रहा है। ठेकेदारों द्वारा इस प्रकार के आरोप लगाए जाते रहे है।

दुखी परिवार को 4 लाख की मदद

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  • संसदीय सचिव रेखचंद जैन के प्रयासों से टोंडापाल के मृत व्यक्ति के परिजन को मिला 4 लाख का चेक
  • ग्रामीण कमलेश बघेल की पानी में डूबने से हुई थी आकस्मिक मृत्यु
  • आपदा प्रबंधन के तहत दिलाई गई आर्थिक सहायता

जगदलपुर अकाल मौत के मुंह में समा गए एक आदिवासी ग्रामीण के परिवार को क्षेत्रीय विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन की पहल पर छ्ग शासन ने 4 लाख रु. की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई है. मृतक कमलेश बघेल की पत्नी सुहाना बघेल को सहायता राशि का चेक संसदीय सचिव जैन ने सौंपा. उन्होंने दुखी परिवार को ढांढस भी बंधाया. इस अवसर पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि हमारे संवेदनशील मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के निर्देश पर प्राकृतिक आपदा के पीड़ितों को तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करने की व्यवस्था की गई है. जैन के विधानसभा क्षेत्र के ग्राम पंचायत टोंडापाल निवासी कमलेश बघेल की दुखद मृत्यु पानी में डूबने से हो गई थी. उनकी पत्नी सुहाना बघेल बघेल को 4 लाख रुपए का चेक प्रदान किया गया. जैन ने कहा कि हमारी कांग्रेस सरकार प्रदेश की जनता के हर दुख में हमेशा साथ खड़ी रहती है. सुहाना बघेल ने कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल एवं विधायक जगदलपुर व संसदीय सचिव रेखचंद जैन की संवेदनशीलता से आज उन्हें 4 लाख रुपए का चेक प्राप्त हुआ है. इसके लिए वे मुख्यमंत्री एवं विधायक का सदैव आभारी रहेंगी. इस अवसर पर रेखचंद जैन के साथ सरपंच टोंडापाल धनपती नाग, लक्षिनधर नाग, शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री हेमू उपाध्याय, मोहन नाग, मुरली पोयाम, बलदेव साहू उपस्थित थे.

भाजपा किसान मोर्चा द्वारा दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन

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दिनांक 21/9 /2022 किसान मोर्चा के 06 पदाधिकारी पश्चिम बंगाल रवाना न्यू जलपाईगुड़ी में दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर भाजपा किसान मोर्चा द्वारा 21 एवं 22 सितंबर को दो दिवसीय राष्ट्रीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन पश्चिम बंगाल के न्यू जलपाईगुड़ी में किया जा रहा है इस प्रशिक्षण शिविर में भाग लेने के लिए भाजपा किसान मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रदेश के कुल 42 जिसमे बालोद जिले जिला अध्यक्ष सहित 06पदाधिकारी आज पश्चिम बंगाल के लिए रवाना हुए। उपरोक्त जानकारी देते हुए किसान मोर्चा के जिला अध्यक्ष तोमन साहू ने बताया है

कि इस प्रशिक्षण शिविर में 5 राज्य छत्तीसगढ़, उड़ीसा, बिहार ,पश्चिम बंगाल, झारखंड के प्रदेश पदाधिकारी एवं जिला अध्यक्ष शामिल होंगे इस प्रशिक्षण शिविर में किसानों की समस्या एवं निवारण पर चर्चा होगी मोर्चा के राष्ट्रीय पदाधिकारी एवं कृषि विशेषज्ञ प्रशिक्षण देंगे तथा किसान मोर्चा के आगामी कार्यक्रमों की रूपरेखा भी तय करेंगे इस शिविर में प्रदेश उपाध्यक्ष चंदन साहू ,चंदन मनोज शर्मा एवं कुलकित चंद्रा, जिला अध्यक्ष राजानंदगॉव नुरेंद्र साहू बालोद जिला अध्यक्ष तोमन साहू महासमुंद जिला अध्यक्ष दुबये लाल साहू हेमंत साहू मनोहर सिन्हा रोमन सोनकर ओंकार सिन्हा सुदर्शन साहू दिलेस्वर् साहू सहित प्रदेश पदाधिकारी एवं जिला अध्यक्ष प्रमुख रूप से शामिल होंगे।

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दर्जनों ग्रामीण कांग्रेस में शामिल

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सीएम बघेल, विधायक जैन के कार्यों का असर
आड़ावाल के सरपंच समेत 50 से ज्यादा ग्रामीणों ने थामा दामन

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की जनहितकारी नीतियों व लोक कल्याणकारी योजनाएं तथा क्षेत्रीय विधायक एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन द्वारा कराए जा रहे विकास कार्यों का जादू अब लोगों के सिर चढ़कर बोलने लगा है. इसका असर यह होने लगा है कि लोग दूसरी पार्टियों से नाता तोड़कर कांग्रेस का दामन थामने लगे हैं. आड़ावाल के भी दर्जनों ग्रामीणों ने ऐसा ही कदम उठाया है.

मुख्यमंत्री भूपेश बघेल द्वारा जनता के हित में चलाई जा रही योजनाओं तथा संसदीय सचिव रेखचंद जैन द्वारा क्षेत्रीय ग्रामीणों के हितार्थ कराए जा रहे कार्यों व विकास योजनाओं से प्रभावित होकर आड़ावाल की सरपंच जयंती कश्यप सहित 50 से अधिक ग्रामीणों ने कांग्रेस प्रवेश किया.

विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव नगरीय प्रशासन एवं श्रम विभाग रेखचंद जैन ने फूल माला और कांग्रेसी गमछा पहनाकर उन्हें कांग्रेस प्रवेश करवाया. कांग्रेस प्रवेश करने वालों में महिलाएं व युवा शामिल हैं.

इस अवसर पर विधायक जगदलपुर एवं संसदीय सचिव रेखचंद जैन ने कहा कि हमारे कर्मठ मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जकी जनहितैषी नीतियों के कारण आज छत्तीसगढ़ का चहुमुखी विकास हो रहा है. कांग्रेस की रीति नीति से लोग लगातार प्रभावित हो रहे हैं. आज कांग्रेस प्रवेश करने वाले सभी लोगों का मैं कांग्रेस परिवार में स्वागत करता हूं तथा यह आशा करता हूं की वे कांग्रेस की रीति नीति के अनूरूप कार्य करेंगे.

कांग्रेस प्रवेश करने के पश्चात सरपंच आड़ावाल श्रीमती जयंती कश्यप ने कहा कि वे पिछले 15 सालों से भाजपा की सक्रिय कार्यकर्ता रही हैं, पर भाजपा की सरकार ने पिछले पंद्रह सालों में जो कार्य नहीं किया आज कांग्रेस सरकार ने साढ़े तीन सालों में ही उससे तीन गुना अधिक कार्य कर दिखाया है. संसदीय सचिव रेखचंद जैन जिस तरह से बिना भेदभाव के हर ग्राम पंचायत में विकास कार्य करा रहे हैं उससे प्रभावित होकर वे अपने साथियों के साथ कांग्रेस प्रवेश कर रही हैं तथा कांग्रेस की रीति नीति के अनुसार कार्य करेंगी. इस अवसर पर संसदीय सचिव रेखचंद जैन के साथ जनपद सदस्य ज्योति राव नायडू, ब्लाक कांग्रेस अध्यक्ष वीरेन्द्र साहनी, शहर जिला कांग्रेस कमेटी के महामंत्री एल मोहन राव, गौरनाथ नाग, हेमू उपाध्याय, विधि विभाग के जिलाध्यक्ष अवधेश झा, पार्षद सूर्या पाणी, इंटक के प्रदेश महासचिव विजय सिंह, वरिष्ठ नेता उप्पल नायडू, उप सरपंच अमित दास, अभय प्रताप सिंह समेत कई कार्यकर्ता उपस्थित थे.

विश्व हिंदू परिषद के दायित्व वान पदाधिकारियों के द्वारा नगर की समस्या का निराकरण हेतु सीएम भूपेश बघेल से भेंट मुलाकात के तहत मुलाकात की

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विश्व हिंदू परिषद के नगर अध्यक्ष शंकर साहू के नेतृत्व में नगर की विभिन्न मूलभूत सुविधाओं को लेकर एक प्रतिनिधिमंडल राज्य के मुख्य भूपेश बघेल से मुलाकात कर नगर की समस्या को उनके समक्ष रखा जिसमें परिषद की जिला उपाध्यक्ष नीलेश श्रीवास्तव नगर उपाध्यक्ष हरीश बाग बजरंग दल संयोजक शशांक तिवारी मातृ शक्ति की बहने और युवा साथी मौजूद रहे
सीएम भूपेश बघेल के समक्ष इस मांगे रखी गई ।

1 दल्ली राजहरा उप जिला तहसील का दर्जा व जिले के नाम संयुक्त जिला बालोद दल्ली राजरा किया जाए
2 दल्ली राजहरा में केंद्रीय विद्यालय की स्थापना अविलंब की जाए
3 यूपी एस सी एवं पी एस सी परीक्षा की तैयारी हेतु खनिज न्याय मध्य फ्री कोचिंग व लाइब्रेरी की स्थापना की जाए
4 घायलों के इलाज हेतु सर्व सुविधा युक्त ड्रामा सेंटर व ब्लड बैंक की स्थापना की जाए
5 दल्ली राजहरा में बसे समस्त वार्डों एक से 27 तक निवासियों को निशुल्क पट्टा प्रदान किया जाए तथा सभी वार्ड के निवासियों को पीएम आवास प्रदान किया जाए
6 नगर के सभी 64 आंगनबाड़ी केंद्रों के लिए जमीन व भवन निर्माण हेतु राशि प्रदान की जाए
7 दल्ली राजहरा नगर में गौठान का निर्माण कराया जाए
8 दल्ली राजहरा से राजनांदगांव तक रेल लाइन का निर्माण कराया जाए
9 स्थानीय रेलवे स्टेशन में प्रतीक्षालय सीसीटीवी कैमरा व यात्री प्रतीक्षालय का निर्माण कराया जाए
10 कौशल विकास केंद्र की स्थापना हो
11 बीपीएल व निर्धन परिवारों को शादी मृत्यु व जन्म के समय ₹25000 की आर्थिक सहायता प्रदान की जाए
12 सेक्टर 9 अस्पताल भिलाई में राज रा के सभी परिवारों व उसके लगे गांव के परिवार को खूबचंद बघेल स्वास्थ्य योजना से उपचार का लाभ मिले
13 खनिज न्याय मद की राशि का 50% राशि राज राखी नगर के विकास पर खर्च किया जाए ।

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मुख्यमंत्री के रोड शो में उमड़ी भीड़

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हास परिहास के बीच क्षणिक विरोधाभास के हालात बनेे-दिखा सीएम भूपेश बघेल के विनोदी स्वभाव का नजारा भी
दल्लीराजहरा. भेंट मुलाकात कार्यक्रम में दल्लीराजहरा पहुंचे मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का कांग्रेस कार्यकताओं और व्यापारियों ने भव्य स्वागत | व्यापारियों द्वारा बनाए गए मंच के पास क्षणिक विरोधाभास के साथ ही हास परिहास और श्री बघेल के विनोदी स्वभाव का नजारा भी देखने को मिला.


मुख्यमंत्री भूपेश बघेल का सोमवार को बालोद जिले में बेहद व्यस्त कार्यक्रम था. गुंडारदेही, मालीघोरी और कुसुमकसा का कार्यक्रम निपटाने के बाद मुख्यमंत्री श्री बघेल अंतिम पड़ाव में दल्ली राजहरा पहुंचे. भारी वर्षा के कारण कार्यक्रम थोड़ी देरी से प्रारम्भ हुआ| यहां पहले मुख्यमंत्री का रोड शो हुआ. इस दौरान छत्तीसगढ़ी लोकनृत्य के बीच मुख्यमंत्री का भव्य किया गया | रोड शो के दौरान दल्लीराजहरा व्यापारी संघ ने मुख्यमंत्री के स्वागत हेतु मंच बनाया था.

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सीएम के काफिले के मंच के पास पहुंचने पर व्यापारियों ने बघेल से मंच पर आने का आग्रह किया. इस पर बघेल ने व्यापारियों से हंसते हुए कहा कि मेरे पास आओ यार, कभी गादी से नीचे भी उतरा करो. व्यापारियों ने मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपकर उनसे मंच के पास ही चर्चा करने का आग्रह किया. मुख्यमंत्री ने समय कि कमी का हवाला देते हुए व्यापारियों को चर्चा हेतु रेस्ट हाउस में आने के लिए कहा. इसे लेकर क्षणिक विरोधाभास की स्थिति बन गई, लेकिन मुख्यमंत्री के विनोदी स्वभाव ने माहौल में मिठास घोल दी. बाद में वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारीयों ने व्यापारियों से बातचीत की. मुख्यमंत्री ने देर रात तक़ रेस्ट हाऊस में व्यापारियों, विभिन्न सामाजिक संगठनों और नागरिकों के प्रतिनिधि मंडल से चर्चा भी की.

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