पत्रकार की कोरोना से मृत्यु होने पर मिले एक करोड़ मुआवजा,व नौकरी
कोरोना पीड़ित पत्रकारों का हो त्वरित और समुचित उपचार
पत्रकार संघ के संभागीय महासचिव ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर किया ध्यानाकर्षण
नारायणपुर ब्यूरो- देश में लगातार बढ़ते कोरोना के मरीजों और इसकी चपेट में आ रहे पत्रकारों की स्थिति बेहद चिंताजनक हैं छत्तीसगढ़ जर्नलिस्ट यूनियन पत्रकार संघ के संभागीय महासचिव अभिषेक बेनर्जी ने छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल को पत्र लिखकर मांग की है कि कोरोना के दौरान शहीद हुए पत्रकारों के परिवार को एक-एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए. परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी दिए जाने की भी मांग की है.बेनर्जी ने मांग किया कि आज जब देश में कोरोना की भयावह रूप ले रही ऐसी विषम परिस्थितियों में हमारे प्रिंट मीडिया व इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार अपनी जान की परवाह किए बिना महामारी में पल-पल की खबरों को अपने पाठकों व दर्शकों तक पहुँचा रहे, प्रशासन व जनता को इस संदर्भ में सचेत भी कर रहे हैं. बेनर्जी ने माँग किया, राज्य में आपदा से जूझते कई पत्रकार साथी का असमय निधन हो गया है.उनके परिवार को विशेष संवेदनशीलता के साथ आर्थिक सहायता प्रदान की जानी चाहिए.नारायणपुर समेत पूरे बस्तर संभाग में बड़ी संख्या में पत्रकार साथी कोरोना कॉल में कर्तव्य निर्वहन करते हुए संक्रमित हो चुके हैं और लगातार संक्रमित हो भी रहे हैं.इनका त्वरित और समुचित उपचार भी होनी चाहिए.पत्रकारों के विशेष इलाज के लिए मेडिकल अफसरों को स्पष्ट निर्देश देने का भी अनुरोध बेनर्जी ने किया है. कोरोना के साथ-साथ नक्सलवाद जैसे समस्याओं के बीच निष्ठा व निर्भीकता से अपना कर्तव्य पालन कर रहे बस्तर के पत्रकारों पर सरकार को विशेष रुप से ध्यान देना चाहिए।
जगदलपुर। नगर के वरिष्ठ व्यवसासी व जगदलपुर नगर पालिका पूर्व अध्यक्ष सतपाल लखनपाल ने अपने पिता स्व.किशनचंद लखनपाल की स्मृति में संसदीय सचिव व जगदलपुर विधायक रेखचंद जैन, अंकुश लखनपाल व योगेश पानीग्राही की उपस्थिति में भारतीय रेड क्रॉस सोसायटी को कोरोना वैश्विक महामारी से निपटने एक लाख रुपए का चेक बस्तर कलेक्टर रजत बंसल को सौंपा। बस्तर कलेक्टर रजत बंसल ने कोरोना से लड़ने के लिए लखनपाल परिवार द्वारा किए गए सहयोग के लिए उनका तहेदिल से शुक्रिया अदा किया।
राष्ट्र के नाम संबोधन में 20 अप्रैल 2021 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश की अर्थव्यवस्था के दृष्टिगत लॉकडाउन अंतिम विकल्प है। दवाई, वैक्सीन, ऑक्सीजन समेत सभी आवश्यक वस्तुओं की समुचित व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं, देशवासियों को घबराने की आवश्यकता नहीं है, इस संकट की घड़ी में वे धैर्य से काम लें। परंपरागत तरीके से प्रधानमंत्री ने डॉक्टर्स, सफाई कर्मचारी, पुलिस प्रशासन समेत इमरजेंसी ड्यूटी कर रहे शासन से जुड़े लोगों की सराहना की और कोरोना से दिवंगत व उनके परिजनों के प्रति संवेदना प्रकट की। फिर प्रधानमंत्री ने मन की बात में आजादी के बाद के 70 साल पर भारी अपना 07 साल का ज्ञानानुभव उड़ेलाकर व्याकुल देशवासियों के दिल पर मरहम लगाया।
प्रधानमंत्री की इन दिनों की बातें केवल एक फिलॉस्फर और मोटिवेशनल गुरु की तरह लगने लगी है, जो केवल सैद्धांतिक रूप से कर्णप्रिय लगती हैं, लेकिन व्यावहारिक व प्रायोगिक रूप से बेहद कर्कश और कठिन हैं। चारों तरफ लाशों की ढेर, अपनों को खोने का गम, इलाज के नाम पर लूट, लचर स्वास्थ्य व्यवस्था, बर्बाद हो चुके लोग, इसमें भी आत्ममुग्ध सरकार, देखकर हृदय बैठ जाता है। प्रधानमंत्री की आपदा में अवसर की प्रासंगिकता इन दिनों चारों तरफ दिखाई दे रही है। लॉकडाउन को प्रधानमंत्री ने जो अंतिम विकल्प वह आज प्रथम विकल्प हो गया है, क्योंकि आत्मावलोकन व सक्षम नीति निर्माण की कमी की वजह से केंद्र सरकार ने प्रारंभिक विकल्प के अवसर को पहले ही खो दिया है।
आज प्रधानमंत्री को मानवता व मनुष्यता के बजाय अर्थव्यवस्था की चिंता हो रही है, जबकि पिछले वर्ष अर्थव्यवस्था की चिंता होनी थी, तब नहीं की। कोरोना दूसरे चरण में केंद्र सरकार का व्यवहार स्पष्ट रूप से उसकी दूरदर्शिता को परिलक्षित करता है। छत्तीसगढ़ सरकार ने प्रधानमंत्री के बताएं अंतिम विकल्प को प्रथम विकल्प के रूप में अपनाया। इसके लिए मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की सराहना की जा सकती है। उन्होंने दूरदर्शिता का परिचय देते हुए उन जिलों पर पहले लॉकडाउन किया, जहां कोरोना के मरीज कम थे और फिर चरणबद्ध तरीके से संपूर्ण छत्तीसगढ़ में लॉकडाउन किया जबकि दिगर भाजपा शासित प्रदेश व कांग्रेसी गठबंधन वाले प्रदेशों की सरकार ने निर्णय लेने में विलंब कर दिया इससे स्थिति और भी बिगड़ गई। छत्तीसगढ़ में अगर समय रहते लाजबाव नहीं लगाई गई होती तो स्थिति और भी भयावह होती।हालांकि समय रहते जिगर राज्यों सीमा को सील कर दिए होते तो स्थिति और भी बेहतर होती।
बाद में छत्तीसगढ़ सरकार ने यह भी किया। छत्तीसगढ़ सरकार की तर्ज पर ही केंद्र सरकार को यह निर्णय संपूर्ण देश में लेना था जिसमें केंद्र सरकार पीछे रह गई।
फरवरी 2020 में कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने करोना को लेकर जब आगाह किया तो केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन समेत केंद्र सरकार ने उनकी बातों को हल्के में लिया। उस समय कोरोना का प्रथम चरण संपूर्ण विश्व के लिए चिंता का विषय था। देश में आने जाने वालों का ना ही स्वास्थ्य परीक्षण किया गया और ना ही इस बीमारी को गंभीरता लिया गया। जब देश में कोरोना पांव पसार रहा था और मध्यप्रदेश के इंदौर शहर को निगलना शुरू कर दिया था, तब प्रधानमंत्री और गृह मंत्री अमित शाह मध्य प्रदेश के कमलनाथ सरकार को गिराने में लगे थे। जब तक मध्य प्रदेश में वे सरकार गिराते तब तक देश में कोरोना की भयावह स्थिति हो गई थी। तब प्रधानमंत्री ने आनन-फानन में संपूर्ण देश में लॉक डाउन कर दिया।
बिना तैयारी के लॉकडाउन से देश में हजारों लोग मर गए, बेघर हो गए, बर्बाद हो गए और देश की अर्थव्यवस्था चौपट हो गई। जैसे-तैसे देश उबरना शुरू किया था और व्यवस्थाएं धीरे-धीरे सुधरने लगी। मुख्यमंत्री रहते देश के नेतृत्व पर सवाल खड़े करने वाले नरेंद्र मोदी स्वयं केंद्रीय नेतृत्व में आके अपने ही कथनों को भूल गए। प्रधानमंत्री एवं उनकी टीम को लगा कि कोरोना का संकट चला गया है। अब दोबारा नहीं आएगा जबकि विश्व स्तर पर पहले ही आगाह कर दिया गया था कि निकट भविष्य में कोरोना की दूसरी लहर भारतवर्ष में आने वाली है। चेतावनी के बावजूद केंद्र सरकार ने कोई तैयारी नहीं की जब कोरोना का द्वितीय लहर देश में फैलने लगा तो प्रधानमंत्री और गृह मंत्री पश्चिम बंगाल समेत विभिन्न राज्यों के चुनाव में व्यस्त हो गए। कोरोना से निपटने के लिए देश में जब उचित रणनीति व सुविधाएं की आवश्यकता थी, तब वे चुनावी समर भूमि में पार्टी के नफे नुकसान व राजनीतिक सुविधा की रणनीति बना रहे थे। केंद्रीय नेतृत्व ने आपदा से निपटने के लिए कभी भी सर्वदलीय बैठक बुलाना उचित नहीं समझा। स्टार प्रचारक बनकर चुनाव में व्यस्त प्रधानमंत्री भूल गए कि वे किसी राजनीतिक दल और औद्योगिक घराने के नहीं बल्कि देश प्रधानमंत्री हैं। उन्हें किसी राजनीतिक दल या औद्योगिक घराने के लिए काम नहीं करनी है उन्हें देश की जनता के लिए काम करनी है।
प्रधानमंत्री और गृह मंत्री कुछ चाहिए था कि वे अपनी पार्टी के जिम्मेदार पदाधिकारी को संबंधित राज्य के चुनाव की जिम्मेदारी देकर देश संभालते। केंद्रीय नेतृत्व में मिली शक्ति, संसाधन और अधिकार का उपयोग देश की भलाई और विकास में लगाते हैं ना कि किसी राज्य में सरकार बनाने में।
दूसरे चरण के आगमन से पहले अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आने जाने वाले लोगों का स्वास्थ्य परीक्षण करना था। दवाई, अस्पताल, ऑक्सीजन, की व्यवस्था करनी थी। देश के लोगों को पहले वैक्सीन लगना था, निर्यात होता तो बेहतर था। इलाज के लिए पर्याप्त दवाइयों का आयात नहीं किया गया तो क्या देश में बनी दवाइयों का स्टेंडर्ड उससे बेहतर यह भी विचार करना होगा। वैक्सीन को लेकर पूरे देश में भ्रम की स्थिति है केंद्रीय नेतृत्व ने यह फैसला राज्यों पर छोड़ दिया। छत्तीसगढ़ सरकार ने तो 18 वर्ष से 45 वर्ष आयु वर्ग के लगभग एक करोड़ 30 लाख लोगों को निःशुल्क वैक्सीन लगाने का निर्णय ले लिया है, लेकिन केंद्र सरकार की ओर से वैक्सीन की उपलब्धता एवं कीमत पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
केंद्र सरकार की सरकारी अस्पतालों में ऑक्सीजन प्लांट लगाने, सभी वर्ग के लिए वैक्सिंग, दवाई और इलाज की समुचित व्यवस्था की बातें “आग लगने पर कुआं खोदने जैसी” है। शायद केंद्र सरकार के पास कोई जादू की छड़ी है, जिससे यह सब कुछ पल में संभव है। यदि समय रहते यह तैयारियां की गई होती तो लोग इलाज के लिए अस्पताल में और अंतिम संस्कार के लिए श्मशान में नहीं लड़ रहे होते। सुबह चुनावी रैली और शाम को देश के नाम संबोधन में प्रधानमंत्री का करोना गाइड लाइन को लेकर विरोधाभास रहा है। सुबह की भीड़ खुशी और शाम के ज्ञान में सोशल डिस्टेंस का पालन का आह्वान उनकी कथनी और करनी के अंतर को स्पष्ट करता है। अब नरेंद्र मोदी की बातें प्रधानमंत्री पद की गरिमा के अनुकूल नहीं लग रही हैं।
कोरोना के दूसरे चरण के आगमन से पहले राजनीतिक दलों की सर्वदलीय बैठक और राज्यों से उचित संबंध में स्थापित किया जाना था, लेकिन हठधर्मिता और स्वयं की नीति को ही सर्वोत्तम नीति मानकर चलने वाली केंद्र सरकार की घनघोर लापरवाही के कारण देश आज इस स्टेज पर खड़ा है। केंद्रीय नेतृत्व ने गरिमा के विपरीत संवैधानिक ढांचे को छिन्न-भिन्न करने तक का प्रयास करती रही। सुप्रीम कोर्ट, हाईकोर्ट, सीबीआई ईडी, चुनाव आयोग आदि जैसी संस्थाएं वर्तमान कार्यशैली की कारण सवालों के घेरे में है। दरअसल इन संस्थाओं में सर्वोच्च पद पर आसीन पीठासीन अधिकारी सेवानिवृत्त होने के बाद सरकार के महत्वपूर्ण पदों पर उपकृत हो रहे हैं। इससे एक भ्रम की स्थिति पैदा हो रही है और उनकी गतिविधियों पर सहज ही प्रश्नचिन्ह लग रहा है। न्यायिक संस्थाओं में भी राजनीतिक दल की तरह वैचारिक मतभेद हो गए जो उनके कार्य की व्यावहारिकता से झककने लगी है।
70 साल की दुहाई देकर 7 साल तक केंद्र सरकार ने केवल अपनी मनमानी की। परिणाम स्वरूप जाति, धर्म, क्षेत्रवाद की वैमनस्यता गांव-गांव, शहर-शहर में देश के भविष्य और युवा पीढ़ियों के दिलोदिमाग में घर कर रहा है। जिस संचार क्रांति से देश के लोगों में बौद्धिक विकास होना था अब वही अपभ्रम फैलाने का सबसे बड़ा माध्यम बन चुका है। संचार माध्यम से स्वास्थ्य प्रचार और स्वस्थ आलोचना दोनों ही देश के लिए अच्छे हैं, लेकिन दूषित आलोचना और दूषित प्रचार देश के लिए घातक है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पूरे कार्यकाल का अवलोकन करें तो स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण प्रधानमंत्री आवास की राशि बढ़ाना तथा जम्मू कश्मीर से 370 हटाने के अलावा कोई बड़ी उपलब्धि नहीं है। इसमें शौचालय निर्माण एवं प्रधानमंत्री आवास निर्माण पूर्ववर्ती सरकार की योजना है, जिसे अपडेट किया गया है जबकि पूर्ण बहुमत की सरकार होने के कारण जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटाना एक साहसिक और सराहनीय कार्य है। इसके अलावा कोई विशेष उपलब्धि नहीं है।
पूर्ण बहुमत की सरकार होने का केंद्र ने औद्योगिक घरानों को खुश करने के लिए करोना काल में भी अन्नदाताओं के खिलाफ संसद में विवादित बिल पास किए। किसान आंदोलन के खिलाफ तरह-तरह के हथकंडे और दमनकारी नीति केंद्र सरकार के पूर्ण बहुमत के अहंकार को दर्शाता है। इससे देशभर के अन्नदाता हूं के आंखभर आए हैं। भारतीय जनता पार्टी के आईटी सेल और केंद्र सरकार नीतियों समर्थन में खड़े लोग देश की हर छोटी-बड़ी उपलब्धि का श्रेय देश के प्रधानमंत्री को देते हैं। प्रधानमंत्री भी देश की विज्ञान और प्रौद्योगिकी की सफलता, वैज्ञानिकों की कोई खोज व शोध, व्यापार और व्यापारियों की तरक्की,सेना का शौर्य, खिलाड़ी का मैडल से लेकर हर कला और संस्कृति के क्षेत्र में मिलने वाली उपलब्धि के पीछे स्वयं को ही कारक मानते हैं, तो आज कोरोना के आपदा में उपजी भयावह स्थिति के कारक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्यों नहीं?
विगत दिनों हमारे पोर्टल द्वारा प्रमुखता से उठाए गए गुंडरदेही तहसील अंतर्गत रंगकठेरा में रेत के अवैध भंडारण के मुद्दे पर प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई । अवैध रूप से धारसा रोड में भंडारी रेत को रॉयल्टी पर्ची जारी कर अमर इंफ्रा लिमिटेड दुर्ग को शासकीय कार्य में उपयोग के लिए दे दिया। प्रशासन की इस तरह से की गई कार्रवाई से जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास बढ़ा हैं।
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदोन्नति की सूची जारी की गई जिसमे डौंडी लोहारा के अनुविभागीय दंडाधिकारी कुशल प्रशासनिक क्षमता व्यवहार कुशल सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर नगर के नागरिकों एवं जन प्रतिनिधियों व प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया फेसबुक एवं व्हाट्सअप के माध्यम से बधाई दी जा रही है |
इसके साथ सिटी मीडिया परिवार की ओर से डौंडी लोहारा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर शुभकामनाएं एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामना की |
छत्तीसगढ़ शासन द्वारा पदोन्नति की सूची जारी की गई जिसमे डौंडी लोहारा के अनुविभागीय दंडाधिकारी कुशल प्रशासनिक क्षमता व्यवहार कुशल सहज एवं सरल व्यक्तित्व के धनी एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को छत्तीसगढ़ शासन द्वारा संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर नगर के नागरिकों एवं जन प्रतिनिधियों व प्रशंसकों द्वारा सोशल मीडिया फेसबुक एवं व्हाट्सअप के माध्यम से बधाई दी जा रही है |
इसके साथ सिटी मीडिया परिवार की ओर से डौंडी लोहारा एसडीएम ऋषिकेश तिवारी जी को संयुक्त कलेक्टर के पद पर पदोन्नत होने पर शुभकामनाएं एवं उज्जवल भविष्य की शुभकामना की |
फर्जी पत्रकार और पुलिस अधिकारी बनकर उगाही करने वाले आरोपियों पर कार्यवाही की गई है।️ ये आरोपी वाहन चेकिंग के नाम पर उगाही कर रहे थे।️ बिना कागजात के गाड़ी चलाने का धौंस देकर उगाही किया गया था।️
आरोपी शंकर सिंह अपने आप को अखबार का पत्रकार बताकर उगाही करता था।️ आरोपी प्रमोद कंवर जिला पुलिस बस्तर का बर्खास्तशुदा आरक्षक है।
शहर में अपने आप को पत्रकार और पुलिस अधिकारी बताकर वाहनों की अवैध रूप से चेकिंग कर रूपये पैसे की उगाही करने वाले 02 आरोपियों को बोधघाट पुलिस द्वारा कार्यवाही कर गिरफ्तार करने में सफलता हासिल की गई है ।
ज्ञात हो कि दिनांक 01.05.2021 को ग्राम करकापाल में एक ट्रेक्टर चालक सुखराम कश्यप को ट्रेक्टर ट्राली में ईंटा लेकर जाते समय 02 लोंगो के द्वारा अपने आप को पत्रकार और पुलिस अधिकारी होना बताए।
आरोपी शंकर सिंह उर्फ सोनू एवं प्रमोद कंवर की पहचान की गई एवं 02 संदिग्ध आरोपियों को पकड़ा गया जिन्होंने पूछताछ पर अपना नाम शंकर सिंह उर्फ सोनू एवं प्रमोद कंवर होना बताये एवं अपना जुर्म स्वीकार किये है एवं आरोपी शंकर सिंह अपने आप को पत्रकार कहकर अवैध रूप से वाहनों से चेकिंग के नाम पर पैस वसूलना।
आरोपी प्रमोद सिंह कंवर पूर्व में बस्तर जिले में आरक्षक के पद पर पदस्थ होना एवं अगस्त 2020 में उक्त पूर्व आरक्षक को सेवा से पृथक कर देना बताया गया है । मामले में दोनों आरोपियों के कब्जे से 400/- रूपये नगद, 02 नग मोबाईल, छत्तीसगढ़ पुलिस लिखा हुआ पर्स जप्त किया गया है ।
मामले में दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमाण्ड पर रवाना किया जा रहा है ।️
ज्ञात हो कि मामले में प्रयुक्त दु-पहिया वाहन अब तक पुलिस ने जपत नहीं की है. साथ ही, सूत्रों से प्राप्त जानकारी के मुताबिक, इनका एक साथी दिनेश अब भी फरार बताया जा रहा है.
जगदलपुर… बस्तर सांसद दीपक बैज ने विश्व प्रेस स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर पत्रकारों को बधाई देते हुए शुभकामनाएं प्रेषित की हैं और पत्रकारों के योगदान पर टिप्पणी करते हुए उन्होंने कहा कि पत्रकार समाज के हर वर्ग की समस्याओं को लेकर हमेशा संजीदा रहते हैं तथा विपरीत परिस्थितियों में काम करते हुए भी हमेशा धैर्य का परिचय देते हैं तथा सामान्य जनमानस की समस्याओं के निदान के लिए शासन-प्रशासन का आकृष्ट कराना उनका मूल उद्देश्य होता है जिसका पत्रकार साथी अपना कर्तव्य समझते हुए जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहे हैं…
उन्होंने विशेष तौर पर बस्तर क्षेत्र में काम कर रहे पत्रकारों के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि बस्तर के पत्रकार अंदरूनी क्षेत्रों में काम करते हुए भी साहस का परिचय देते हैं और लगातार अपनी खबरों के माध्यम से लोगों की समस्याओं को दूर करने में लगे हुए हैं… सांसद महोदय ने आगे कहा कि कोविड-19 के इस दौर में भी जहां लोग खुद को सुरक्षित करने की कवायद में लगे हुए हैं वहीं पत्रकार साथी लगातार लोगों की समस्याओं को दूर करने के कार्य में पूरी निष्ठा के साथ लगे हुए हैं… उन्होंने पत्रकार साथियों के लिए ईश्वर से प्रार्थना करते हुए उनके इस तन मन धन से सफल और स्वस्थ रहने की मंगल कामना की है…
क्षेत्र के पत्रकारों ने भी बस्तर सांसद के प्रति आभार व्यक्त किया है साथ ही साथ पत्रकार साथियों ने सांसद महोदय से आग्रह करते हुए कहा है कि कोविड-19 के इस दौर में अधिकतर पत्रकारों को संपादकों के माध्यम से आर्थिक सहायता नहीं मिल पा रही है जिसकी वजह से वर्तमान में कई पत्रकारों की आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली जा रही है उन्होंने बस्तर सांसद के माध्यम से छत्तीसगढ़ शासन से मांग की है कि ऐसे पत्रकारों को चिन्हित कर उचित आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाए
18 से 44 वर्ष के अंत्योदय कार्डधारी अधिक से अधिक कराएं वैक्सीनेशन- कलेक्टर धर्मेश साहू
बाहर से आने वाले एवं शहर में घूमने वालों का होगा कोरोना टेस्ट- कलेक्टर साहू
सैय्यद वली आज़ाद – नारायणपुर
कलेक्टर धर्मेश कुमार साहू की अध्यक्षता में आज कलेक्टोरेट के सभाकक्ष में जिला स्तरीय कोर कमेटी की बैठक संपन्न हुई। कलेक्टर ने कोविड-19 की समीक्षा बैठक के दौरान कहा कि जिले में 18 से 44 वर्ष के अंत्योदय कार्डधारियों के कोविड वैक्सीनेशन की संख्या में तेजी लायी जाये। स्वास्थ्य विभाग की टीम तथा नगर पालिका का अमला एवं वालेंटियर की टीम टीकाकरण के लिए लोगों को जागरूक करें। उन्होंने कहा कि जिले में पहले ही डॉक्टर, पैरामेडिकल स्टाफ एवं फ्रंट लाइन वर्कर तथा 45 वर्ष से अधिक उम्र वाले लोगों का वैक्सीनेशन किया गया हैं, यह पूर्ण रूप से सुरक्षित है। जिन लोगों ने वैक्सीन लगवाया हैं, उनके संक्रमित होने की संभावना बहुत ही कम होती है। कोरोना संक्रमित होने पर गंभीर स्थिति उत्पन्न नहीं होती है और शीघ्र ही स्वस्थ हो जाते है। कोरोना संक्रमण से बचने के लिए 18 से 44 वर्ष के अंत्योदय कार्डधारियों, 45 वर्ष से अधिक एवं हेल्थ वर्कस एवं फ्रंट लाइन वर्कस का वैक्सीनेशन कराया जा रहा है। ये सभी लोग अधिक से अधिक वैक्सीन लगाए।
कलेक्टर श्री धर्मेश कुमार साहू ने कोविड केयर सेंटर की व्यवस्थाओं की जानकारी लेते हुए कहा कि वहां तकनीकी तथा अन्य समस्या आने पर तत्काल ठीक किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में मितानिनों द्वारा घर-घर सर्वे कर एवं शहरी क्षेत्रों में नगर पालिका दल एवं वालेंटियर द्वारा तथा राशन दुकानों में वैक्सीनेसन हेतु लोगो को प्रोत्साहित करें। बैठक में पुलिस अधीक्षक श्री मोहित गर्ग, वन मण्डलाधिकारी श्री एन आर खूंटे, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री नीरज चंद्राकर, एस डी एम श्री दिनेश कुमार नाग, संयुक्त कलेक्टर सुश्री निधि साहू, डिप्टी कलेक्टर श्री गौरीशंकर नाग, श्री वैभव क्षेत्रज्ञ, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. एआर गोटा, सिविल सर्जन डॉ सूर्यवंशी, मुख्य नगर पालिका अधिकारी श्री मोबिन अली सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
कलेक्टर श्री साहू ने बैठक में कहा कि जिले में कोविड-19 की जांच अधिक से अधिक किया जाए। जिले के बाहर से आने वाले एवं लॉक डाउन अवधि में बाहर निकलने वालों का टेस्ट करने के निर्देश दिए,। इसके लिए एड़का मोड़ एवं कोतवाली थाना के सामने टीम लगाने कहा। इसके साथ ही पॉजिटिव पाये गये लोगों के कांटेक्ट ट्रेसिंग का भी काम पूरी गंभीरता और निरंतरता से किया जाये, इस बात का विशेष ध्यान रखनक कहा। उन्होंने जिले में बनाये जा रहे नये कोविड केयर सेंटर की जानकारी ली और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जो भी काम शेष है, उन्हें तय समय सीमा में पूरा कर लिया जाये। जिससे जिले में मिलने वाले कोरोना पॉजिटिव मरीजों को वहां रखकर उनका ईलाज किया जा सके। कलेक्टर ने कहा कि पॉजिटिव व्यक्ति के सम्पर्क में आने वाले जो होम आइसोलेशन में है वे लोग अपने घर में ही सावधानी और सर्तकता से रहे, बाहर निकलने की शिकायत मिलती है, तो उन पर कार्यवाही किया जाए। ऐसे व्यक्तियों की शिकायत कंट्रोल रूम में करे। होम आइसोलेशन में रहने वाले लोगो के घर के बाहर पोस्टर चस्पा करे।
कोरोना माहमारी के संक्रमण को नियत्रिंत करने शासन के निर्देशानुसार कलेक्टर एवं जिला दण्डाधिकारी नारायणपुर द्वारा जिला नारायणपुर में धारा 144 एवं लाॅकडाउन की घोषणा किया गया है। इस कोरोना माहमारी के दौर में लाॅकडाउन के दौरान श्री मोहित गर्ग, पुलिस अधीक्षक नारायणपुर के निर्देशानुसार जरूरतमंद गरीब परिवार जिनके पास खाद्य सामग्री उपलब्ध नहीं है, ऐसे गरीब परिवारों का पताकर उनके घरों में निशुल्क राशन एवं मास्क पहुंचाने का कार्य पुलिस विभाग के अधिकारी/कर्मचारी तथा करूणा फाउण्डेशन की टीम द्वारा किया जा रहा है। राशन सामग्री में चांवल, दाल, आलू, प्याज, हल्दी, मिर्च, धनिया, नमक, तेल, साबून की पैकेट बनाकर एवं साथ में मास्क का निशुल्क वितरण कर लोगों से लाॅकडाउन के समय अपने परिवार के साथ घरों में रहने का अपील किया जा रहा है।
नारायणपुर पुलिस आम नागरिकों से अपील करता है कि अपने आसपास रहने वाले ऐसे जरूरतमंद गरीब परिवार जिनके पास दो वक्त का भी राशन उपलब्ध नहीं है ऐसे लोगों की जानकारी मिलने पर उनका हरसंभव मदद् करें या नारायणपुर पुलिस व करूणा फाउण्डेशन को सूचित करें ताकि उन जरूरतमंद परिवारों को समय पर आवश्यक खाद्य सामग्री उपलब्ध करायी जा सके, ऐसी विषम परिस्थिति में नारायणपुर पुलिस, आम नागरिकों के साथ है एवं आपकी सुरक्षा व्यवस्था में लगी हुई है। नारायणपुर पुलिस पुनः आम नागरिकों से अपील करता है कि लाॅकडाउन के दौर में अपने परिवार सहित अपने-अपने घरो में सुरक्षित रहे तथा कोरोना दिशा निर्देशों का कड़ाई से पालन करतें हुए कोरोना महामारी के नियत्रंण में हमारा सहयोग करें।