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साय और शर्मा की बड़ी विजय, पहली बार नक्सलियों ने माना कि मारे गए हैं, उनके 35 साथी

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  •  निरीह आदिवासियों का दोष मढ़ने वालों का कबूलनामा
  • 12 नक्सलियों के घायल होने की भी स्वीकारोक्ति 

अर्जुन झा

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के इतिहास में पहली बार ऐसा हुआ है कि नक्सलियों ने बस्तर संभाग के नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिलों के सीमावर्तीअबूझमाड़ के जंगलों में हुई मुठभेड़ में अपने 35 साथियों के मारे जाने की पुष्टि की है। दर्जन भर नक्सलियों के मारे जाने का कबूलनामा भी सामने आया है। यह राज्य के लिए बड़ी बात है। वहीं इसे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और गृहमंत्री विजय शर्मा की बड़ी जीत के रूप में भी देखा जा रहा है। नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की पूर्व बस्तर डिवीजनल कमेटी ने इस बात की पुष्टि की है। कमेटी ने अपने मारे गए सभी 35 सदस्यों की सूची भी जारी की है। संगठन ने आरोप लगाया है उसके सदस्यों को अलग अलग जगहों से इकट्ठा कर उनका नरसंहार किया गया है।

इससे पहले पुलिस ने सूची जारी कर 31 नक्सलियों के मारे जाने तथा कई नक्सलियों के घायल होने की बात कही थी। इसके अलावा पुलिस ने 3-4 और घायल नक्सलियों की इलाज के अभाव में मौत हो जाने और उन नक्सलियों का उनके साथियों द्वारा जंगल में ही दाह संस्कार किए जाने की संभावना जताई थी। अब नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी ने 35 नक्सलियों के मारे जाने की पुष्टि कर दी है। इस नक्सली संगठन ने अपने मारे गए साथियों की जो सूची जारी की है उसमें शीर्ष पर नीति उर्फ उर्मिला एसजेडसीएम पूर्व बस्तर डिवीजन इंचार्ज सचिव का नाम रखा है। नीति पर 25 लाख का ईनाम घोषित था और वह बीजापुर जिले के

ग्राम हिरमागुंडा की निवासी थी। इसके अलावा नक्सली संगठन की सूची में नंदू मंडावी सीवायपीसी कंपनी नंबर 6 कमांडर निवासी ग्राम कोतराम, जिला बीजापुर, मुरली मतलामी ग्राम मंडानार अंतागढ़, सुरेश उर्फ जानकू सलाम छोटे फरसगांव, मीना अजिता उर्फ श्यामबती मड़काम ग्राम मोहंदी ओरछा, महेश मंडावी ग्राम घोटिया भैरमगढ़, जुगनी कौड़ो ग्राम किलेनार अंतागढ़, विजय उर्फ सुकलू कोर्राम ग्राम कोंगेरा नारायणपुर, बसंती वडद्दा ग्राम आलदंड कोयलीबेड़ा कांकेर, अर्जुन लेकाम ग्राम फल्ली भैरमगढ़ बीजापुर, जगनी वड्डे ग्राम अड्डेमपाड़ नारायणपुर, सोनू कोर्राम ग्राम सुलेंगा नारायणपुर, सीमा उर्फ जोगाय कोर्राम ग्राम सुलेगा नारायणपुर, जमली मंडावी ग्राम तोयामेट्टा नारायणपुर समेत सभी 35 मृत नक्सलियों के नामों का उल्लेख है। इससे पहले यही होता रहा है कि जब भी मुठभेड़ में नक्सली मारे जाते थे नक्सली संगठन पुलिस और सरकार पर निरीह आदिवासियों की हत्या करने का दोष मढ़ना शुरू कर देते थे। इसके बाद विपक्ष आक्रामक हो उठता था। नक्सलियों की बातों पर यकीन कर विपक्षी नेता विधवा विलाप करने लग जाते थे, जांच दल गठित कर संबंधित गांवों में भेजे जाते थे। दोनों प्रमुख दलों की यही रीत रही है। पहली बार हमने मुठभेड़ में मौतों के आंकड़ों और मारे गए लोगों के नक्सली होने का कबूलनामा किसी नक्सली संगठन की ओर से आया है। हालांकि यह कबूलनामा जारी करने वाला नक्सली संगठन भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (माओवादी) की पूर्व बस्तर डिवीजन कमेटी का आरोप है कि पुलिस ने उसके साथियों को अलग अलग जगहों से इकट्ठा कर एक स्थान पर गोलियों से भूना है। यह आरोप अपनी जगह है, मगर इस सच्चाई से मुंह नहीं मोड़ा जा सकता कि अबूझमाड़ की यह मुठभेड़ इतिहास रच गई है। यह साय सरकार की बड़ी उपलब्धि है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन में और डिप्टी सीएम एवं गृहमंत्री विजय शर्मा की रणनीतिक कुशलता और पुलिस के अधिकारियों की सूझबूझ से पहली बार ऎसी बड़ी कामयाबी हाथ लगी है कि नक्सलियों को खुद मानना पड़ गया कि हां हमारे 35 साथी मारे गए हैं।

हमदर्दी के साथ जनसेवा

डिप्टी सीएम और गृहमंत्री विजय शर्मा की दाद देनी होगी कि वे नक्सल पीड़ितों के साथ पूरी हमदर्दी रखते हुए उनकी सेवा में जुटे रहते हैं। वे गाहे बगाहे नक्सल प्रभावित गांवों में जाकर ग्रामीणों का दुख दर्द साझा करते हैं, उनकी समस्याओं का निदान करवाते हैं। इसका असर यह हो रहा है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था, सरकार और प्रशासन तंत्र के प्रति ग्रामीणों का भरोसा काफी बढ़ गया है। यही भरोसा नक्सलियों के खिलाफ अचूक हथियार साबित हुआ है। साफ बात है कि बस्तर वासियों का दिल जीतकर ही नक्सलियों पर विजय पाई जा सकती है। विजय के इस फार्मूले को उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा ने बखूबी अपनाया है।गृहमंत्री विजय शर्मा को जब पता चला कि बीजापुर, सुकमा, दंतेवाड़ा, कांकेर, कोंडागांव और नारायणपुर जिलों के पचासों ग्रामीण नक्सलियों द्वारा प्लांट किए गए आईईडी की चपेट में आकर अपने हाथ पैर गंवा बैठे हैं, तो शर्मा ने उनके कृत्रिम हाथ पैर लगवाने का फैसला किया। दर्जनभर लोगों के कृत्रिम पैर रायपुर में लग भी गए। ये लोग नकली पैरों के सहारे चलकर गृहमंत्री विजय शर्मा के निवास में मुख्यमंत्री साय और उप मुख्यमंत्री शर्मा के प्रति आभार जताने पहुंचे थे। मुख्यमंत्री और गृहमंत्री की यही संवेदनशीलता केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह द्वारा नक्सल समस्या के खात्मे के लिए दी गई डेड लाइन की ओर सरकार, पुलिस और सुरक्षा बलों को निरंतर आगे बढ़ा रही है।

रामलला दर्शन योजना के तहत 87 तीर्थयात्री रवाना

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  •  कलेक्टर ने हरीझंडी दिखाकर बस को किया रवाना 

जगदलपुर  रामलला दर्शन योजना के अंतर्गत 87 तीर्थयात्रियों को रवाना किया गया। रविवार की शाम इन यात्रियों को लालबाग मैदान से दुर्ग के लिए रवाना किया गया। जहां से दुर्ग और बस्तर संभाग के दर्शनार्थी यात्री ट्रेन के माध्यम से अयोध्या के लिए जाएंगे। कलेक्टर हरिस एस, जिला पंचायत सीईओ प्रकाश सर्वे, रामलला योजना की जिला समिति के सदस्य रामाश्रय सिंह ने बस को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यात्रा से पहले सभी यात्रियों का टाउन हॉल में स्वास्थ्य परीक्षण भी किया गया।

 

 

एसपी दंपत्ति ने कोसा सिल्क स्टॉल में की शॉपिंग

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जगदलपुर बस्तर के पुलिस अधीक्षक शलभ कुमार सिन्हा रविवार की शाम क्षेत्रीय सरस मेला में सपरिवार शॉपिंग करते नजर आए। सिन्हा अपनी धर्मपत्नी और बिटिया के साथ मेले में पहुंचे थे। सिन्हा दंपत्ति ने सरस मेले में लगे विभिन्न स्टालों का अवलोकन किया। इस दौरान उन्होंने जांजगीर-चांपा जिला से आए हुए कोसा सिल्क स्टाल में खरीददारी की। एसपी ने अपने लिए सिल्की कुर्ता पायजामा का कपड़ा और श्रीमती सिन्हा के लिए कोसा सिल्क की साड़ी खरीदी। उन्होंने दुकानदार महिला को ऑनलाइन भुगतान भी किया। साथ ही महिला स्व-सहायता समूहों के प्रयास की सराहना भी की।

अबूझमाड़ में मारे गए हैं 34 नक्सली, जंगल में अपने 3 साथियों का दाह संस्कार किया नक्सलियों ने

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  • मारे गए 29 नक्सलियों की हुई शिनाख्त, ईनाम राशि पहुंची 2 करोड़ के पार 

अर्जुन झा

जगदलपुर बस्तर संभाग के नारायणपुर और दंतेवाड़ा जिलों के सीमाई इलाके के अबूझमाड़ के जंगलों में हुई मुठभेड़ में तीन और नक्सलियों के मारे जाने के संकेत मिले हैं। इन तीनों के शवों का दाह संस्कार नक्सलियों द्वारा जंगल में ही कर दिए जाने की खबर है। वहीं मारे गए ज्यादातर नक्सलियों की शिनाख्तगी के बाद ईनाम राशि दो करोड़ के पार पहुंच गई है।

अबूझमाड़ इलाके में नक्सलियों के पूर्वी बस्तर व अबूझमाड़ डिवीजन के नक्सलियों के साथ हुई मुठभेड़ में मारे गए नक्सलियों की संख्या बढ़कर 34 होने के पुख्ता इनपुट पुलिस को मिले हैं। खबर है कि मुठभेड़ के दौरान घायल कुछ नक्सली किसी तरह बचकर भाग निकलने में कामयाब रहे, लेकिन उचित इलाज के अभाव में कम से कम 3 नक्सलियों की मौत होने की जानकारी पुलिस को मिली है। इन तीनों नक्सलियों के शवों का दाह संस्कार उनके नक्सलियों द्वारा जंगल में किए जाने की खबर है। पुलिस इसकी तस्दीक करने में जुटी है। मौके पर मौजूद मोस्ट वांटेड डीवीसीएम नक्सली कमलेश के भी जख्मी होेकर भाग निकलने की खबर आ रही है। मुठभेड़ स्थल से पुलिस ने 31 शव बरामद किए थे, जिनमें 13 महिला व 18 पुरूष नक्सली शामिल थे। इन मृतकों में अब तक कुल 29 नक्सलियों की शिनाख्त हो चुकी है, 2 की शिनाख्त अब तक नहीं हुई है। जिन नक्सलियों की शिनाख्त हो चुकी है, उन पर घोषित कुल ईनामी राशि 2 करोड़ 15 लाख तक पहुंच चुकी है। बस्तर रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुंदरराज पी. ने बताया कि मुठभेड में 1 डीकेएसजेडसी, 1 सीवायपीसी कमांडर, 3 डीवीसीएम, 14 पीएलजीए कंपनी नंबर 6 के सदस्य, 2 डीकेएसजेडसी गार्ड, 6 एरिया कमेटी सदस्य व 2 एरिया कमेटी के पार्टी सदस्य कैडर की पहचान की जा चुकी है। उप पुलिस महानिरीक्षक दंतेवाड़ा कमलोचन कश्यप ने बताया कि शेष 2 नक्सलियों की शिनाख्त के प्रयास जारी हैं।

पहचाने गए ये नक्सली

दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय और नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक नारायणपुर प्रभात कुमार ने नक्सलियों की पहचान की पुष्टि की है। 29 नक्सलियों में नीति उर्फ उर्मिला एसजेडसीएम पूर्व बस्तर डिवीजन इंचार्ज सचिव 25 लाख ईनामी, निवासी ग्राम हिरमागुंडा, जिला बीजापुर, नंदू मंडावी सीवायपीसी कंपनी नंबर 6 कमांडर 10 लाख ईनामी, निवासी ग्राम कोतराम, जिला बीजापुर, सुरेश सलाम उर्फ जानकू डीवीसीएम आमदई एरिया कमेटी 8 लाख ईनामी निवासी ग्राम छोटे फरसगांव, जिला नारायणपुर, मीना नेताम, डीवीसीएम, 8 लाख ईनामी निवासी ग्राम मोहंदी जिला नारायणपुर, महेश डीवीसीएम 8 लाख ईनामी, निवासी ग्राम घोटिया थाना मालेवाही, जिला दंतेवाड़ा, अर्जुन उर्फ रंजीत, पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी ग्राम डुंगा-पल्लेवाया, जिला नारायणपुर, सुंदर उर्फ कमलू पीएलजीए पीपीसीएम कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी ग्राम मदूम जिला बीजापुर, बुधराम मड़काम, पीपीसीएम पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी निवासी जिला बीजापुर, मोहन मंडावी, पीपीसीएम पीएलजीए 6 सदस्य ईनामी 8 लाख निवासी ग्राम बोदली थाना मालेवाही, बसंती पति साकेत, पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्या ईनामी 8 लाख निवासी कोयलीबेड़ा कांकेर, जगनी कोर्राम कंपनी नंबर 6 सदस्या ईनामी 8 लाख निवासी अडेंगपाल थाना बैंगलूर जिला नारायणपुर, अनिल पार्टी सदस्य पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी, निवासी ग्राम मदूम जिला बीजापुर, दशमती पोयाम पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी निवासी ग्राम रोताड, पोचावाड़ा थाना ओरछा नारायणपुर, मासे उर्फ शकीला पिता स्व. बुडता पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी, निवासी ग्राम तोयामेटा थाना छोटेडोंगर जिला नारायणपुर, सावन उर्फ लोकेश पोयाम पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी, निवासी ग्राम एरपुंड सालेपाल जिला दंतेवाड़ा, सोमरू मंडावी पिता बलधर मंडावी पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी निवासी ग्राम तोयामेटा थाना छोटेडोंगर जिला नारायणपुर, मड़कम मंगू पिता मड़कम पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी निवासी ग्राम बुड़जी, बीजापुर, मनोज उर्फ संपोर मंडावी पिता स्व. सोनारू पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी, निवासी ग्राम ताड़नार, नारायणपुर, सोमे पति टुगे उर्फ मानसिंग पीएलजीए कंपनी नंबर 6 सदस्य 8 लाख ईनामी, निवासी ग्राम रेखावट्टी थाना कोयलीबेड़ा जिला कांकेर, जनीला उर्फ बुधरी पद- नीति की गार्ड 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम कोटमेटा, थाना पुंगारपाल जिला कोंडागांव, मंगलदई कश्यप पिता स्व. जगन्नाथ, नीति की गार्ड, 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम कुधुर फुंगारपाल कोंडागांव, रामदेर पद -एसीएम बयनार एरिया कमेटी सदस्य 5 लाख ईनामी, निवासी ग्राम उसरी थाना मर्दापाल जिला कोंडागांव, सुक्कू यादव एसीएम बयानार एरिया कमेटी सदस्य 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम कानागांव नारायणपुर, सुकलू उर्फ विजय उर्फ पंडरू कोर्राम पद – एसीएम बयानार एरिया कमेटी सदस्य 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम कोंगेरा नारायणपुर, सोनू कोर्राम एसीएम आमदई एरिया कमेटी सदस्य, 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम सुलेंगा, जिला नारायणपुर, जमली, एसीएम आमदई एरिया कमेटी सदस्या, 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम मोडोनार छोटेडोंगर नारायणपुर, सोहन उर्फ रोहन पदम एसीएम आमदई एरिया कमेटी सदस्य, 5 लाख ईनामी निवासी ग्राम कुमुरगुंडा, कोयलीबेड़ा कांकेर, फुलो उर्फ सुंदरी आमदई एरिया पार्टी सदस्य, 2 लाख ईनामी निवासी भैरमगढ़, बीजापुर 2 लाख की ईनामी फूलमती पदामी पिता घसियाराम आमदई एरिया पार्टी सदस्य निवासी ग्राम ईरपानार जिला दंतेवाड़ा शामिल हैं।

बस्तर मड़ई में आयोजित विभागीय प्रदर्शनी में उमड़ रही है अपार भीड़

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  •  सरस मेला को लेकर उत्साह, स्टालों में उत्पादों की कर रहे खरीदारी 

जगदलपुर बस्तर मड़ई और क्षेत्रीय सरस मेले में विभिन्न विभागों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी में नागरिकों की गहरी रुचि देखी जा रही है। प्रदर्शनी में विभिन्न शासकीय योजनाओं की जानकारी नागरिकों को प्रदान की जा रही है, जिससे वे सरकारी योजनाओं और कार्यक्रमों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित हो रहे हैं।

प्रदर्शनी में पुलिस, ग्रामीण विकास, कृषि, वन, महिला एवं बाल विकास, जल संसाधन, स्वास्थ्य विभाग, जनसंपर्क और हथकरधा जैसे प्रमुख विभागों ने अपने स्टॉल लगाए हैं। नागरिकों को इन स्टॉलों पर नियद नेल्लानार, प्रधानमंत्री आवास योजना, स्वच्छ भारत मिशन, प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि, आजीविका मिशन के साथ- साथ केंद्रीय और राज्य की जनकल्याणकारी योजनाओं के बारे में विस्तार से बताया जा रहा है। मेले में आए स्थानीय कुम्हारपारा निवासी पंकज झा ने कहा कि सरकारी योजनाओं के बारे में यहां जो जानकारी मिल रही है, उससे हमें यह समझने में मदद मिल रही है कि हम किस तरह से इन योजनाओं का लाभ उठा सकते हैं। प्रदर्शनी में शासकीय योजनाओं के लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जिससे अन्य नागरिकों को प्रेरणा मिली और वे योजनाओं से जुड़ने के प्रति उत्साहित नजर आए। मैदान में चल रहे क्षेत्रीय सरस मेले में जनता का जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है। मेले में आए लोग बड़ी संख्या में विभिन्न स्टालों पर पहुंचकर स्व-सहायता समूहों और स्थानीय उद्यमियों द्वारा बनाए गए उत्पादों की सराहना करते हुए जमकर खरीदारी भी कर रहे हैं। मेले में प्रदर्शित वस्तुओं में हस्तशिल्प, कृषि आधारित उत्पाद, वनोपज, और स्थानीय पारंपरिक खाद्य सामग्री शामिल हैं। विशेष रूप से कोदो, कुटकी, रागी, बेलमेटल उत्पाद, आचार, पापड़, बड़ी, अगरबत्ती, और कपड़ा बुनाई के स्टॉल लोगों का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं। मेले में आई भावना ने कहा यह मेला हमारे स्थानीय कारीगरों और किसानों के उत्पादों को जानने और खरीदने का बेहतरीन अवसर प्रदान करता है। यहां के उत्पाद न केवल गुणवत्ता में श्रेष्ठ हैं बल्कि हमारी सांस्कृतिक धरोहर को भी दर्शाते हैं

उद्घाटन के बाद से ही मेले में लोगों की भीड़ बढ़ती जा रही है, और स्थानीय उत्पादों की बिक्री में भी इजाफा हो रहा है। मेले में आए प्रतिभागी और आगंतुक न केवल खरीदारी का आनंद ले रहे हैं, बल्कि वे लखपति महिला पहल के तहत सफल महिलाओं की कहानियों से भी प्रेरित हो रहे हैं।

राजनांदगांव की संस्कृति और परंपराओं का कोई मुकाबला नहीं: दीपक बैज

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  • दशहरा उत्सव में शामिल हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष

राजनांदगांव छत्तीसगढ़ प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज कल शाम राजा दिग्विजय दास महोत्सव समिति राजनांदगांव द्वारा कमला कॉलेज ग्राउंड पर आयोजित भव्य दशहरा उत्सव कार्यक्रम में शामिल हुए।

रावण दहन के बाद समारोह को संबोधित करते हुए प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने कहा कि राजनांदगांव को यूं ही संस्कारधानी नहीं कहा जाता। संस्कार तो इस शहर के हर आयु वर्ग के लोगों के रोम रोम में रचा बसा हुआ है। जिस धरती पर गजानंद माधव मुक्तिबोध, पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी, नंदूलाल चोटिया, शरद कोठारी, गिरीश बख्शी जैसे साहित्यकारों और शिक्षाविदों के चरण रज पड़े हों, वह राजनांदगांव की धरती प्रणम्य है। यह पावन माटी संस्कारों से उर्जित है। यहां की आज की पीढ़ी भी अपने पुराने संस्कारों को आत्मसात कर इस शहर की पुरानी परंपराओं को आगे बढ़ाने का काम कर रही है। श्री बैज ने कहा कि महंत राजा दिग्विजय दास ने राजनांदगांव को बहुत कुछ दिया।

शहर के एक हिस्से में स्थित पॉवर हाउस और शिवनाथ नदी के तट पर स्थित रानी जोतकुंवर बाई जल प्रदाय योजना यह साबित करने के लिए काफी है कि राजा दिग्विजय दास जी पुरातन परंपराओं के संवाहक ही नहीं बल्कि विज्ञान एवं संसाधन के सदुपयोग के मामले में भी सदैव अग्रणी रहे हैं। यहां स्थित दिग्विजय स्टेडियम प्रदेश के सर्वश्रेष्ठ स्टेडियमों में गिना जाता है। यहां हर विधा के खिलाड़ी विद्यमान हैं। हॉकी के मामले में राजनांदगाव आज भी अव्वल है। बैज ने कहा कि साहित्यिक, सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक गतिविधियों का जो संगम राजनांदगांव में देखने को मिलता है, उसका और कहीं मुकाबला नहीं है। राजनांदगांव हर साल अखिल भारतीय स्तर का कवि सम्मलेन आयोजन होना यहां के लोगों के साहित्य प्रेम को दर्शाता है। पीसीसी चीफ दीपक बैज ने राजनांदगांव की इस शानदार परंपरा को बनाए रखने की अपील करते हुए उपस्थित जन समुदाय को विजयादशमी पर्व की शुभकामनाएं दी। इस अवसर पर आयोजन समिति के पदाधिकारी एवं सदस्य, जिला कांग्रेस कमेटी के शहर अध्यक्ष कुलबीर सिंह भाटिया, ग्रामीण अध्यक्ष भागवत साहू, वरिष्ठ नेता कमलजीत सिंह पिंटू, युवा नेता शाहिद भाई, नवाज खान आदि विशेष रूप से उपस्थित थे।

मृत आदिवासी का पहले फर्जी व्यक्ति को बनाया वारिस, फिर वारिस की पत्नी के नाम पर भूमि का नामांतरण

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  •  तहसीलदार ने एक ही प्रकरण में जारी की अलग अलग दो आर्डर शीट 

अर्जुन झा-

 जगदलपुर बस्तर में भू-माफिया, राजस्व कर्मियों का संगठित गिरोह नित नए- नए कारनामों को अंजाम देता आ रहा है। लोगाें की जमीन नक्शे से गायब करने से लेकर भूत-प्रेत तक के नाम से फर्जी नामांतरण किया जा रहा है। ऐसा ही एक मामला यहां से लगे ग्राम तुसेल में सामने आया है।

            माड़िया जनजाति के बुजुर्ग मासे की मौत के 15 साल बाद उसकी जमीन पर फर्जी दस्तावेजों के आधार पर कब्जा करवा दिया गया। भू-माफियाओं ने तत्कालीन पटवारी की मिलीभगत और फर्जी गवाहों की दस्तखत के आधार पर कोंडागांव निवासी मुरिया जाति के भदरू के नाम पर फर्जी फौती नामांतरण करवा लिया गया। अब भदरू की मौत के बाद उसकी पत्नी रूकाय बाई के नाम नामांतरण का आदेश करवा लिया गया है। भू-स्वामी व वारिसान की जाति अलग-अलग होने तथा बिना परीक्षण के इस प्राकर का नामांतरण करना अपने आप में फर्जीवाड़े को प्रशासनिक संरक्षण प्राप्त होने की तस्दीक करने लिए काफी है। ज्ञात हो कि जगदलपुर से सटे ग्राम तुसेल निवासी मासे पिता डोरा की मृत्यु

के बाद उनकी जमीन को हड़पने की साजिश रची गई। घोटाले में स्थानीय अधिकारियों, विशेषकर पटवारियों की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। जिन्होंने राजस्व अभिलेखों में बिना दस्तावेजों के नाम दर्ज किया और आदिवासी की जमीन को गलत तरीके से दूसरों के नाम पर दर्ज किया। घोटाले की शुरुआत तब हुई जब मासे पिता डोरा, जो माड़िया जनजाति से थे, की मृत्यु हो गई। उसके बाद उनकी ज़मीन पर भूमाफियाओं ने अपनी नजरें गड़ा दी। मासे की जमीन को कोंडागांव निवासी भदरू पिता चैतू के नाम राजस्व अभिलेखों में फर्जी तरीके से दर्ज कराया गया। इसमें स्थानीय पटवारी की मिलीभगत की पुष्टि होती है। जिसने बिना किसी दस्तावेज़ या वैध दावे के यह बदलाव कर दिया। इस प्रकार 15 वर्ष तक एक डमी के माध्यम से यह भूमि माफियाओं के कब्जे में रही। इसे बेचने मोटे आसामी की तलाश की जाती रही।

 तहसीलदार और बाबू की भूमिका

इस घोटाले में तहसीलदार और बाबू की भूमिका सबसे ज्यादा सवालों के घेरे में है। पहले तहसीलदार रुपेश मरकाम ने 31 मई 2024 को मामले का निपटारा

नियमानुसार किया था, लेकिन दो महीने बाद, एक अन्य नायब तहसीलदार ने बिना दस्तावेजों का परीक्षण किए जमीन फौती करने का आदेश जारी कर दिया। वहीं ग्राम पंचायत की लिखित आपत्ति के बावजूद अवैध रूप से नामांतरण आदेश जारी करना जमीन दलालों से मिलीभगत को दर्शाता है।

अबपत्नी को बनाया मोहरा

भदरू की मृत्यु के बाद, उसकी पत्नी रुकाय ने तहसील न्यायालय फ्रेजरपुर में फौती का आवेदन पेश किया। इसमें उसने जमीन को अपने पति की निजी संपत्ति बताया, जबकि असल में यह ज़मीन शासन द्वारा 1961 में आदिवासी मासे पिता डोरा जाति माड़िया को आबंटित की गई थी। रुकाय ने अपने आवेदन में यह दावा किया कि वह मुरिया जनजाति से है। जबकि असल खातेदार कि जाति अभिलेखों में माड़िया दर्ज थी। यह दावा भी प्रशासनिक फर्जीवाड़े का हिस्सा था, जिसे भूमाफियाओं ने तहसील स्तर पर आगे बढ़ाया।

वर्सन

दर्ज कराएं अपील

एसडीएम के समक्ष पंचायत की ओर से पेश की गई आपत्ति के बारे में मुझे पता नहीं है। अगर नियम विरूद्ध फौती नामांतरण किया गया है तो पंचायत या असली वारिसान की ओर

से एसडीएम न्यायालय में नियमानुसार अपील दायर करनी चाहिए।

     रूपेश कुमार सोरी, तहसीलदार जगदलपुर

बस्तर जिले में चल रहा है जमीन फर्जीवाड़े का बड़ा खेल, पटवारी से लेकर ऊपर तक बहुत से लोग हैं मिले हुए

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  • निजी जमीन भी दूसरों के नाम करवा ले रहे हैं लोग
  • मृत निसंतान आदिवासी की जमीन फर्जी वारिस ने करवा ली नाम
  • भूमाफिया और पटवारी की सांठगांठ से जलसाजी

अर्जुन झा-

जगदलपुर बस्तर जिले में जमीन फर्जीवाड़े का बड़ा खेल चल रहा है। पटवारी से लेकर ऊपर तक कई लोग इस खेल में लिप्त हैं और करोड़ों के वारे न्यारे कर रहे हैं। हद तो तब हो जाती है जब किसी मृत आदिवासी की जमीन फर्जी वारिस खड़े कर उसके नाम कर दी जाती है और फिर वह जमीन किसी और के पास बेच दी जाती है। ऐसा ही एक बड़ा ही गंभीर मामला जगदलपुर से लगे ग्राम तुसेल का सामने आया है। इस मामले में पटवारी, राजस्व कर्मियों, अधिकारियों और भू माफियाओं की सांठगांठ स्पष्ट नजर आ रही है। बस्तर जिले में जमीन की फर्जी रजिस्ट्री, नामांतरण व सरकारी भूमि को बेचने, उस पर कब्जा करवाने के दर्जनों मामले सामने आ चुके हैं। अब तो यह गठजोड़ गिरोह मरे हुए लोगों की भूमि को भी नहीं बख्श रही है।

शहर से सटे ग्राम तुसेल में ऐसा ही मामला सामने आया है। तुसेल एक बुजुर्ग आदिवासी के निधन के बाद उसकी चार एकड़ मरहान जमीन पर न केवल कब्जा कर लिया गया, बल्कि जमीन खाते में भी मृतक का फर्जी वारिसान दर्शाकर फौती उठवा ली गई और नामांतरण भी करवा लिया गया है। वहीं मृतक के वास्तविक नाती ग्राम जाटम निवासी युवक को इसकी भनक तक नहीं लगी। आरोप है कि कुछ

भू-माफियाओं ने स्थानीय पटवारी की मिलीभगत से इस धोखाधड़ी को अंजाम दिया है। इन लोगों मृतक के नाम से दर्ज जमीन अपने एक ऐसे परिचित के नाम करवा ली, जो दीगर जिले का निवासी है। मृतक मासे पिता डोरा जाति माड़िया निवासी ग्राम तुसेल को 1961

के आसपास शासन द्वारा खसरा नंबर 104 की चार एकड़ भूमि खेती के लिए

आवंटित की गई थी। यह भूमि उनके परिवार के जीवनयापन का प्रमुख साधन थी। डोरा की मृत्यु के बाद यह ज़मीन उनके बेटे मासे के नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज कर दी गई। जिससे उसकी ज़मीन पर पूरी तरह कानूनी हकदारी सुनिश्चित हो गई। वर्ष 2009 में मासे की भी मृत्यु हो गई। इसके बाद भू-माफियाओं ने इसका फायदा उठाते हुए फर्जी दस्तावेज तैयार करवाए। उन्होंने तात्कालीन पटवारी की मिलीभगत से जमीन का फौती नामांतरण अपने संपर्क में रहने वाले कोंडागांव निवासी भदरू पिता चैतू के नाम करवा लिया, जो कि भू-माफियाओं का डमी बताया जा रहा है।

जाति में भी फर्जीवाड़ा

राजस्व अभिलेखों का अवलोकन करने पर ज्ञात हुआ कि डोरा ‘माड़िया’ जनजाति से संबंधित थे, जबकि फर्जी कागज़ों में ज़मीन का नामांतरण जिस भदरू के नाम हुआ, उसकी जाति मुरिया बताई जा रही है। यह भी एक प्रमुख बिंदु है कि किस प्रकार आदिवासी जातियों के नाम का हेरफेर कर धोखाधड़ी की गई, वह इस मामले को और भी गंभीर बनाता है।

तत्कालीन पटवारी का बड़ा रोल

इस फर्जीवाड़े में तत्कालीन पटवारी ने फौती नामांतरण के लिए प्रस्तुत दस्तावेजों का बिना परीक्षण किए ग्राम तुसेल के दो गवाहों सुबराय व अमलसाय के साथ

सांठगांठ कर नियमों का उल्लंघन करते हुए फर्जी दस्तावेज़ के आधार पर

ज़मीन के फौती नामांतरण की प्रक्रिया को भी गुपचुप तरीके से अंजाम दे दिया।इसके बाद कुछ भू-माफियाओं ने इसे दूसरे लोगों के पास बेचने का प्रयास शुरू कर दिया। तब कहीं इसकी भनक ग्राम पंचायत को लगी।

पंचायत ने दिया है आवेदन

वहीं इस मामले में तुसेल ग्राम पंचायत के उप सरपंच सुरेंद्र त्रिपाठी का कहना है कि मासे की मौत के 15 साल बाद शहर के कुछ भू-माफिया गांव में आकर लोगों को जमीन दिखवा रहे थे। तब पंचायत को यह जानकारी मिली कि फर्जी गवाहों की मदद से मासे की जमीन का फौती नामांतरण कोंडागांव निवासी भदरू पिता चयतू के नाम पर हो चुका है, जबकि इस व्यक्ति का मृतक के परिवार से कोई संबंध ही नहीं है। इसके बाद पंचायत ने तीन माह पूर्व एसडीएम जगदलपुर के समक्ष शिकायत दर्ज कराई थी, पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।

वर्सन

*होगी जांच, करेंगे कार्रवाई

संभव है शिकायत मिली हो, लेकिन मामला फिलहाल मेरे नॉलेज में नहीं है। पंचायत वालों को चाहिए कि फिर से आवेदन दें। जांच होगी और प्रक्रिया के मुताबिक करवाई भी की जाएगी।

भरत कौशिक,

 एसडीएम जगदलपुर

दशहरा पर्व पर बालोद पुलिस का अभिनव पहल बनाया साइबर रावण

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आज बालोद नगर के सरदार वल्लभभाई पटेल स्टेडियम में सार्वजनिक दुर्गोत्सव कार्यक्रम का आयोजन किया गया था जिसके प्रवेश द्वार पर पुलिस द्वारा साइबर रावण एवं साइबर प्रहरी साइबर जागरूकता सेल्फी स्टैंड बनाया गया था जो नागरिकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र रहा ,जहां लोगों में सेल्फी लेने के लिए होड़ लगी रही l संजारी बालोद विधायिका श्रीमती संगीता सिंहा जी ने भी सेल्फी लेते हुए पुलिस के अभिनव पहल की तारीफ की l साइबर रावण लोगों से अपील कर रहा था कि ओटीपी बता दो मुझे,

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साइबर रावण के द्वारा इस तरीके से आपको साइबर फ्रॉड का शिकार बनाने के लिए बताया जाता है इस पर जीत पाने के लिए साइबर जागरूकता होना जरूरी है इसी साइबर जागरूकता के ज्ञानी के तीर से आप इस साइबर फ्रॉड रूपी रावण का दहन कर सकते हैं और यदि साइबर फ्रॉड के शिकार होते हैं तो टोल फ्री नंबर 1930 रुपए तीर से फ्रॉड के शिकार से बच सकते हैं साइबर जागरूकता पखवाड़ा के अंतर्गत लोगों को साइबर फ्रॉड से बचने सीखाने की इस अभिनव पहल की लोगों ने तारीफ की l

दंतेवाड़ा में एसपी और अन्य पुलिस अफसरों ने दी बलि

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  • दशहरा पर पुलिस लाइन दंतेवाड़ा में शस्त्र पूजन 
  • शस्त्र पूजन के दौरान दी गई बलि राखिया की
  • एसपी समेत अफसर व जवान हुए शामिल

जगदलपुर बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय में तमाम पुलिस अफसरों की मौजूदगी में विधि विधान से शास्त्रों का पूजन किया गया।इसके बाद बलि दी गई। एक रखिये को बलि स्वरूप काट कर शास्त्रों को अर्पित किया गया। पूजा विधि दंतेवाड़ा के पुलिस अधीक्षक गौरव राय ने पूरी की। फिर बारी बारी से एएसपी, डीएसपी निरीक्षकों और अन्य पुलिस कर्मियों ने शास्त्रों की पूजा की।

दशहरा पर्व पर पुलिस महकमे में शस्त्र पूजन की परंपरा प्रचलित है। इसी परंपरा का पालन करते हुए दंतेवाड़ा पुलिस बल ने एसपी गौरव राय की अगुआई में पुलिस लाइन कारली में पारंपरिक मान्यताओं के मद्देनजर शस्त्र पूजन कार्यक्रम आयोजित किया। जिसमे पुलिस अधीक्षक गौरव राय सहित दंतेवाड़ा पुलिस के सभी राजपत्रित अधिकारी शामिल हुए।एसपी समेत तमाम अधिकारी धोती कुर्ता अथवा पाजामा कुर्ता पहनकर पूजा में शामिल हुए। वहीं महिला पुलिस अधिकारी साड़ी पहनी हुई थीं। इस दौरान सांकेतिक रूप से एक रखिया फल की बलि दी गई। इसके बाद रक्षित केंद्र दंतेवाड़ा में शस्त्रों की भी पूजा की गई। कार्यक्रम में पुलिस अधीक्षक गौरव राय, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक स्मृतिक राजनाला, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रामकुमार बर्मन, उप पुलिस अधीक्षक कल्पना वर्मा, आशा सेन, कमलजीत पाटले, रुचि वर्मा, नसर सिद्धीकी, राहुल उईके, ठाकुर गौरव सिंह, आकांक्षा पांडे, रक्षित निरीक्षक सुशील नौटियाल व रक्षित केंद्र दंतेवाड़ा के अधिकारी कर्मचारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। पुलिस अधिकारियों और कर्मकारियों के परिजन भी पूजा में शामिल हुए।

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