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सरकारी स्कूल मूली के प्राचार्य ने कबाड़ी के हाथों बेच दी स्कूल की अच्छी भली 400 टेबल कुर्सियां

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  • मामला शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मूली का
  • संवाददाता के कैमरे को देख भाग निकला कबाड़ी

अर्जुन झा-

बकावंड विकासखंड बकावंड की शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मूली के प्राचार्य ने शाला की 400 पुरानी टेबल कुर्सियों को कबाड़ी के हाथों बेच दिया। जबकि इन टेबल कुर्सियों की मरम्मत कराकर उन्हें फिर से उपयोग में लाया जा सकता था। वहीं इस संवाददाता के कैमरे को देखते ही कबाड़ी मौके से भाग निकला।

जनपद पंचायत बकावंड के अंतर्गत शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय मूली संकुल केंद्र मूली के प्राचार्य दीपक देवांगन द्वारा स्कूल के छात्र छात्राओं के बैठने के उपयोग में लाई जाने वाली अच्छी कंडीशन वाली 400 टेबल कुर्सियों और बेंच को क्लास रुम्स से निकलवाया और कबाड़ी वाले को बुलाकर उन सभी फर्नीचर्स को बेच दिया गया। मूली संकुल केंद्र के कर्मचारियों ने स्कूल के पिछले भाग में ले जाकर 200 नग टेबल और 200 बेंच कुर्सियों समेत कुल 400 नग लोहे के फर्नीचर्स को कबाड़ी वालों हवाले कर दिया था। वहां इन टेबल, कुर्सियों और बेंचेज को हथौड़े से तोड़कर लोहे के स्ट्रक्चर से लकड़ी की सीट को तोड़कर अलग किया जा रहा था। जानकारी मिलने पर यह संवाददाता कैमरा लेकर वहां पहुंच गया। मामले की फोटो वीडियो बनाने पर कबाड़ी वाले सारा फर्नीचर छोड़कर भाग गए। लोहे के स्ट्रक्चर का ढेर एक जगह लगा दिया गया था।

बीईओ मिश्रा ने झाड़ा पल्ला

जब इस संवाददाता ने मूली स्कूल के फर्नीचर्स को कबाड़ी वाले हाथों बेचे जाने के संबंध में बकावंड के विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्रीनिवास मिश्रा से चर्चा करनी चाही, तो वे पल्ला झाड़ते नजर आए। बीईओ श्रीनिवास मिश्रा ने साफ कह दिया कि यह मेरा जिम्मेदारी नहीं है, आप जिला शिक्षा अधिकारी भारती मैडम से जानकारी ले लीजिए। जबकि इस पूरे मामले में बीईओ श्री मिश्रा की ही पहली जिम्मेदारी बनती है। उनका प्रथम कर्तव्य बनता था कि वे तुरंत शासकीय उच्चतर माध्यमिक शाला मूली पहुंचते, फर्नीचर्स को कबाड़ियों के हाथों बिकने से रोकते और प्राचार्य दीपक देवांगन की करतूत से अपने वरिष्ठ अधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी बस्तर को पूरे मामले की जानकारी देते। मगर बीईओ श्रीनिवास मिश्रा ने अपना दायित्व नहीं निभाया। वहीं प्रकरण में प्राचार्य दीपक देवांगन से चर्चा करने पर उन्होंने चुप्पी साध ली

कराई जा सकती थी मरम्मत

जिन 400 नग कुर्सी, टेबल, बेंचेज को चंद रुपयों के लालच में कबाड़ी वालों के हवाले कर दिया गया, उनकी मामूली मरम्मत कराकर उन्हें नया स्वरूप दिया जा सकता था और फिर से काम लाया जा सकता था। कुर्सियों और बेंचेज की सीट की लकड़ी और टेबलों के ऊपर के लकड़ी से निर्मित पटरे भर को बदलवाने की जरूरत थी। कई कुर्सी, टेबलों और बेंचेज की स्क्रू, किलें ही निकली हुई थीं, जिन्हें आसानी से बदला जा सकता था। यह काम स्कूल स्टॉफ भी कर सकता था। वहीं कुर्सियों, बेंचों और टेबलों पर नई लकड़ी लगाने का काम गांव के ही किसी बढ़ई को बुलाकर कराया जा सकता था। बढ़ई ज्यादा से ज्यादा 700 रुपए प्रतिदिन की दर से मजदूरी लेता। वहीं साइज वाली लकड़ियां, स्क्रू और कीलें बाजार से खरीदकर लाई जा सकती थीं। इतनी रकम शाला विकास समिति मद से ली जा सकती थी, मगर इतनी सी भी जहमत प्रचार्य ने नहीं उठाई। एक सच्चाई तो यह भी है कि स्कूलों में जो फर्नीचर्स उपलब्ध कराए जाते हैं, वे निहायत ही घटिया स्तर के होते हैं। फर्नीचर आपूर्ति करने वालों से कमीशनखोरी के फेर में बड़े अधिकारी फर्नीचर्स की गुणवत्ता पर ध्यान नहीं देते।

रतनजोत बीज खाकर आंगनबाड़ी के बच्चे हुए बीमार, जिला अस्पताल में ईलाज जारी

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  •  कोंडागांव के बनजुगानी गांव का है यह मामला

कोंडागांव कोंडागांव जिले की ग्राम पंचायत बनजुगानी के आंगनबाड़ी केंद्र के करीब दस बच्चे रतनजोत के बीज खाकर बीमार पड़ गए। हालत बिगड़ने पर सभी बच्चों को कोंडागांव लाकर यहां जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।

मंगलवार की सुबह 7 बजे ग्राम बनजुगानी के बच्चे आंगनबाड़ी केंद्र गए थे। वहां से लगभग 9 बजे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता द्वारा छुट्टी दी जाने के बाद बच्चे अपने घर वापस लौट रहे थे। बताया जा रहा है इसी दौरान 8 से 10 बच्चों ने रतन जोत पेड़ के बीज तोड़कर खा लिए। घर पहुंचने के बाद ये बच्चे लगातार उल्टी करने लगे। जिसकी सूचना परिजनों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ता को दी, जिसके बाद उन्हें एंबुलेंस संजीवनी 108 से जिला अस्पताल कोंडागांव लाया गया। जहां बच्चों का उपचार जारी है आंगनबाड़ी कार्यकर्ता सुखयारिन पोयाम ने बताया कि आज आंगनबाड़ी में यूनिसेफ का एक कार्यक्रम आयोजित होना था इसलिए बच्चों को निधार्रित समय से पहले छुट्टी दे दी गई। वहीं सुपरवाइजर ऋतु देवांगन ने बताया कि बच्चे जब हॉस्पिटल आ गए तब उन्हें कार्यकर्ता ने सूचना दी। उन्होंने बताया कि सहायिका बच्चों को घर तक छोड़ने गई थी या नहीं यह उन्हें जानकारी नहीं है। फिलहाल 7 बच्चों का इलाज जिला अस्पताल में जारी है।

वर्सन

खतरे से हैं बाहर

रतनजोत बीज खाने वाले आंगनबाड़ी के सात बच्चों को जिला अस्पताल में लाए हैं, जिनका उपचार जारी है। सभी बच्चे फिलहाल खतरे से बाहर हैं।

  डॉ. सीआर ठाकुर,

सिविल सर्जन, जिला चिकित्सालय कोंडागांव

जनता के विश्वास और कार्यकर्ताओं की कर्मठता से भाजपा को मिली जीत: किरण देव

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  •  प्रदेश भाजपा अध्यक्ष किरण देव का भव्य स्वागत
  •  किरण देव ने छत्तीसगढ़ की जनता व कार्यकर्ताओं का माना आभार

जगदलपुर भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व विधायक किरण देव के बस्तर आगमन पर सोमवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने उनका जोशीला स्वागत किया। बस्तर सहित छत्तीसगढ़ में भाजपा की एकतरफा शानदार विजय और तीसरी बार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केन्द्र में सरकार बनने की बधाई कार्यकर्ताओं ने दी।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने श्री दंतेश्वरी मंदिर मे मत्था टेका और मांईजी के दर्शन कर पूजा अर्चना की। प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष किरण देव ने कहा कि देश की जनता का विश्वास व आशीर्वाद भाजपा के साथ है। लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदीजी प्रधानमंत्री बने हैं, विकसित भारत का सपना अब तेजी से साकार होगा। डबल इंजन की सरकार के रहते छत्तीसगढ़ में भी अब विकास की गति तीव्र होगी। किरण देव ने कहा कि छत्तीसगढ़ की जनता ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दस वर्ष के विकास कार्यो व मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन पर मुहर लगाई है। भाजपा के सभी कार्यकर्ताओं ने कर्मठता से कार्य किया और छत्तीसगढ़ में कमल खिलाया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण देव ने प्रदेश की जनता और कार्यकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त किया और तीसरी बार देश का नेतृत्व कर रहे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की।

मोटरसाइकिल चालक पत्थर से टकराकर गिरा हुई मौत

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आज करीब 11:30 बजे के आस पास दल्ली राजहरा लोहारा मार्ग में मोटरसाइकिल से अपने गांव जाते समय से अनियंत्रित होने पर रोड के किनारे रखे पत्थर में जाकर टकराकर घायल हो गया जिसे उपचार हेतु सी एच सी डोंडी लोहारा ले जाया गया जहां डॉक्टर द्वारा मृत घोषित कर दिया गया मृतक चालक डोमन पिस्दा पिता उदय राम पिस्दा उम्र 48 वर्ष ग्राम सहगांव का रहने वाला बताया जा रहा है मौके पर पुलिस पहुंच कर आगे की कार्यवाही कर रही।

राज्य की भाजपा सरकार की लापरवाही से जल उठा बलौदाबाजार: दीपक बैज

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  •  पीसीसी चीफ ने घटना को बताया दुर्भाग्यपूर्ण
  • लोगों से की शांति बनाए रखने की अपील की बैज ने

अर्जुन झा

जगदलपुर बलौदा बाजार की घटना से बस्तर के आदिवासी नेता एवं प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष दीपक बैज बुरी तरह मर्माहत हैं। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर घटना को दुर्भाग्यजनक बताते हुए इसके लिए राज्य की भाजपा सरकार को जिम्मेदार ठहराया है।

सहृदय युवा आदिवासी नेता एवं पीसीसी चीफ दीपक बैज ने एक्स पर पोस्ट कर लिखा है कि बलौदा बाजार की घटना दुर्भाग्यपूर्ण है। मै लोगो से शांति बनाए रखने का आग्रह करता हूं। सरकार की लापरवाही से यह अप्रिय स्थित निर्मित हुई है। पंद्रह दिनों पहले असामाजिक तत्वों द्वारा पवित्र जैतखाम को नुकसान पहुंचाने के मामले मे त्वरित कठोर कार्रवाई की गई होती तो शायद यह दुर्भाग्यपूर्ण घटना नहीं होती। दीपक बैज ने लोगों से संयम और शांति बनाए रखने तथा क़ानून को हाथ मे न लेने की अपील की है। उन्होंने कहा है कि सभ्य समाज मे हिंसा हरगिज बर्दाश्त नहीं की जा सकती। बाबा साहेब के बनाए क़ानून पर भरोसा रखें। दरअसल बलौदाबाजार में सतनामी समुदाय के प्रदर्शन के दौरान सोमवार को जमकर बवाल हो गया। लोगों ने कलेक्ट्रेट में खड़ी अधिकारियों की गाड़ियों में तोड़फोड़ की, बल्कि कलेक्ट्रेट, तहसील और जिला पंचायत कार्यालय में भी आग लगा दी।प्रदर्शनकारियों ने पथराव भी किया। वहीं प्रदर्शनकारियों को रोकने में पुलिस नाकाम रही। सतनामी समाज के करीब चार हजार लोग पहुंचे थे। हालात लगातार बिगड़ने पर राजधानी से भी बड़ी संख्या में फोर्स मौके पर भेजी गई है।

हालात बिगड़ने की वजह

पुलिस ने जैतखाम को नुकसान पहुंचाने के मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। सतनामी समाज के लोगों का आरोप है कि पकड़े गए लोग असली आरोपी नहीं हैं। समाज के लोग स्थानीय पुलिस पर असली दोषियों को बचाने का आरोप लगा रहे हैं। बताया जा रहा है कि सोमवार को प्रदर्शन के दौरान लोग इसी बात को लेकर आक्रोशित हो गए और हालात बिगड़ते चले गए। जैतखाम सतनामी पंथ का ध्वज स्तंभ और संप्रदाय की आस्था का सबसे बड़ा प्रतीक है। आमतौर पर सतनाम समुदाय के लोग मोहल्ले या गांव में किसी चबूतरे या प्रमुख स्थल पर खंभे में सफेद झंडा लगाते हैं।

दुबके रहे पुलिसकर्मी

पथराव के दौरान पुलिसकर्मी जान बचाने कार्यालयों में छिपे रहे। बताया जा रहा है कि भीड़ उग्र हो रही थी, लेकिन लाठीचार्ज के आदेश नहीं मिले। इसके चलते पुलिसकर्मियों को वहां से भागना पड़ा। प्रदर्शनकारी इमारतों पर चढ़ गए और जमकर उत्पात मचाया। आगजनी की खबर पर दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंची तो दमकल गाड़ियों में तोड़फोड़ करते हुए कई गाड़ियों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया।

शर्मा ने की थी शांति की अपील

एक दिन पहले ही रविवार को उप मुख्यमंत्री विजय शर्मा ने जैतखाम में हुई तोड़फोड़ मामले की न्यायिक जांच कराने की घोषणा की थी। उन्होंने कहा था कि प्रदेश में कही भी सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाली घटनाओं को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ऐसे कृत्य करने वाले दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी से सामाजिक सौहार्द्र बनाए रखने की अपील भी की थी।वहीं तीन दिन पहले ही बलौदाबाजार कलेक्टर केएल चौहान और एसएसपी सदानंद कुमार ने शांति समिति की बैठक ली थी। इसमें सभी समाज के लोग और प्रमुख शामिल हुए थे।

नक्सलियों की घर वापसी की पहल ‘लोन वर्राटू’ ने दंतेवाड़ा जिले में मचाई धूम, फिर तीन नक्सली लौटे राह पर

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  •  एक महिला समेत तीन नक्सलियों का समर्पण
  • अब तक 820 नक्सली कर चुके आत्मसमर्पण

अर्जुन झा

जगदलपुर छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और उप मुख्यमंत्री एवं गृहमंत्री विजय शर्मा के मार्गदर्शन में बस्तर संभाग के विभिन्न जिलों में नक्सलियों और उनके सहयोगी ग्रामीणों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए अलग अलग नामों से चलाई जा रही विशेष मुहिम व्यापक असर दिखा रही है। मुहिम और राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर रोज बड़ी संख्या में नक्सली आत्म समर्पण कर रहे हैं। इसी कड़ी में आज फिर दंतेवाड़ा जिले में एक महिला नक्सली समेत तीन नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है। दंतेवाड़ा जिले में इस वर्ष अब तक 820 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं।

दंतेवाड़ा जिले में चलाए जा रहे अभियान ‘लोन वर्राटू’ घर वापस आईए तथा छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास नीति के तहत विगत कुछ माह में जिला पुलिस बल और सीआरपीएफ द्वारा भटके हुए माओवादियों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए लगातार संपर्क एवं संवाद किया जा रहा है। साथ ही शासन की नक्सल पुनर्वास नीति का व्यापक प्रचार-प्रसार गांव गांव में किया जा रहा है। इसके सकारात्मक और उत्साह जनक परिणाम भी सामने आ रहे हैं। बड़ी संख्या में माओवादी कैडर का आत्मसमर्पण हो रहा है। बाहरी और कुछ पुराने स्थानीय नक्सलियों के अमानवीय, आधारहीन विचारधारा एवं उनके शोषण, अत्याचार तथा स्थानीय आदिवासियों पर की जाने वाली हिंसा से तंग आकर नक्सलवाद की ओर भटके युवा अब समाज की मुख्यधारा से जुड़ने का संकल्प लेकर आगे आ रहे हैं।

इन्होंने किया समर्पण

गंगालूर, भैरमगढ़ एवं कटेकल्याण एरिया कमेटी के प्रतिबंधित संगठन में मनकेली, पेद्दाकोरमा पंचायत जनमिलिशिया सदस्य संजय बारसे, कुन्ना पंचायत कमेटी सदस्य सुकड़ा मड़कामी, ग्राम फुलगट्टा संघम सदस्या रीना कोरसा ने आज 10 जून को डीआरजी कार्यालय दंतेवाड़ा में आत्मसमर्पण किया। पुलिस अधीक्षक दंतेवाड़ा ने इन आत्मसमर्पित नक्सलियों को छत्तीसगढ़ शासन की पुनर्वास योजना के तहत 25- 25 हजार रूपए की प्रोत्साहन राशि दी एवं पुनर्वास योजना के तहत मिलने वाले सभी प्रकार के लाभ प्रदान कराने की बात कही। लोन वर्राटू अभियान के तहत् अब तक 180 ईनामी नक्सलियों सहित कुल 820 नक्सली आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा से जुड़ चुके हैं।

अभी से जवाब देने लगी है मेसर्स अरोड़ा कंस्ट्रक्शन की बनाई किंजौली -राजनगर पक्की सड़क

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  •  दरारों और गड्ढों से भरी नजर आ रही है यह सड़क
  • निर्माण में बरती गई है जमकर अनियमितता

अर्जुन झा

बकावंड ब्लॉक मुख्यालय बकावंड से पहुंच मार्ग राजनगर रोड से किंजौली पांच चौक तक घटिया डामर रोड का निर्माण कराया गया है। कुछ माह पहले बनी इस पक्की सड़क पर दरारें पड़ गई हैं और गड्ढे हो गए हैं। पटरियों पर बहुत कम मुरुम मिट्टी डाली गई थी और उसे रोलर से दबाया भी नहीं गया था। अब पटरियों पर मुरुम नजर ही नहीं आ रही है।

इस सड़क का निर्माण लोक निर्माण विभाग द्वारा अरोड़ा कंस्ट्रक्शन के माध्यम से कराया गया है। यह ठेका फर्म निर्माण कार्यों में गुणवत्ता की अनदेखी और सार्वजनिक एवं सरकारी जगहों से गौण खनिज का अवैध खनन कर उसका इस्तेमाल सड़क निर्माण में करने के लिए बेहद चर्चित है। लोक निर्माण विभाग के अधिकारी मेसर्स अरोड़ा कंस्ट्रक्शन पर कुछ ज्यादा ही मेहरबान हैं। यही वजह है कि उसके कराए गए निर्माण कार्यों की खामियों को नजर अंदाज कर दिया जाता है और बाद में इसका खामियाजा संबंधित क्षेत्र के ग्रामीणों को भुगतना पड़ता है। कुछ ऎसी ही कारगुजारी मेसर्स अरोड़ा कंस्ट्रक्शन ने राजनगर से किंजौली तक डामरीकृत मार्ग के निर्माण में भी की है। हाल ही में बनकर तैयार हुई यह सड़क अभी से जवाब देने लगी है। सड़क पर जगह जगह गड्ढे और दरारें नजर आने लगी हैं। रोड के दोनों किनारों से मुरुम की पटरियां अस्तित्व हीन हो चुकी हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पुरानी सड़क पर गिट्टी मुरुम का ढंग से भराव नहीं किया गया और न ही उसे रोड रोलर के जरिए अच्छे से दबाया गया। डामर रोड की बुनियाद ही कमजोर रखी गई थी और उस पर मिक्स तारकोल की बहुत ही पतली परत बिछा दी गई। वहीं पटरियों को भी दबाया नहीं गया था। इसी के चलते यह पक्की सड़क अभी से उखड़ने लगी है। अरोड़ा कंस्ट्रक्शन द्वारा कराए गए रोड चौड़ीकरण और पुलिया निर्माण के दौरान बड़ी दुर्घटना भी हो चुकी है। इसे लेकर ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने ऐसे लापरवाह ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और उनके टेंडर को रद्द करने की मांग की है।

ग्राम पंचायत पाहुरबेल के मेडार तालाब से मुरुम का बेतहाशा अवैध खनन और परिवहन जारी

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  •  तहसीलदार और खनिज अधिकारी हैं बेखबर

अर्जुन झा-

बकावंड विकासखंड बकावंड की ग्राम पंचायत पाहुरबेल में अवैध रूप से मुरुम खनन और परिवहन का खेल चल रहा है। इस मुरुम का उपयोग एक ठेकेदार द्वारा सड़क निर्माण में किया जा रहा है। दूसरी ओर खनिज विभाग इस खेल से बेखबर बना हुआ है। अब तक हजारों ट्रिप मुरुम यहां से निकाली जा चुकी है।

बकावंड ब्लाक अंतर्गत ग्राम पंचायत पाहुरबेल के मेडार तालाब में पिछले करीब एक सप्ताह से मुरुम की अवैध खोदाई बिना अनुमति लिए की जा रही है। खनिज विभाग के स्थानीय कर्मियों के संरक्षण में सत्येंद्र सिंह ठाकुर, ठेकेदार अरोड़ा कंस्ट्रक्शन और जेसीबी मलिक द्वारा तालाब के एक हिस्से की बेतहाशा खोदाई जेसीबी से कराई जा रही है। वहां से निकलने वाली मुरुम को ट्रैक्टर भर भरकर बाहर ले जाया जा रहा है। मुरुम को पाहुरबेल और जैतगिरी के बीच बन रही डमरीकृत रोड के निर्माण में इस्तेमाल किया जा रहा है। रोड की पटारियों में ले जाकर डाला जा रहा है। सरकारी तालाब से मुरूम का अवैध खनन और परिवहन सरकारी सड़क निर्माण के लिए किया जा रहा है। इसके एवज ने ग्राम पंचायत और खनिज विभाग में रायल्टी राशि भी नहीं दी जा रही है। इस संबंध में जेसीबी मालिक से चर्चा करने पर उन्होंने बताया कि अब तक पाहुरबेल के मेडार तालाब से लगभग 8 हजार से से 10 हजार ट्रिप मुरूम निकाल कर जैतगिरी पाहुरबेल के बीच बन रही सड़क पर डाली जा चुकी है।. मुरुम खोदाई के परमिशन के लिए माइनिंग विभाग में जानकारी दी गई है। वहीं ठेकेदार अरोड़ा कंस्ट्रक्शन का दावा है कि उनके पास मुरुम खोदाई का परमिशन है, आप लोग मेरे कार्यालय में आकर परमिट देख सकते हैं।

बना दिया मौत का कुंआं

बेतहाशा मुरुम खनन कर तालाब के एक हिस्से को मौत के कुंए के रूप में तब्दील कर दिया गया है। तालाब के जिस हिस्से में खोदाई की जा रही है, उसी हिस्से से गांव के मवेशी तालाब में पानी पीने जाते हैं। ऐसे में मवेशियों के गड्ढे में गिरने का खतरा बना हुआ है। मुरुम निकालने के लिए गड्ढा इतना गहरा बना दिया गया है कि अगर वहां मवेशी या कोई इंसान गिर जाए, तो वे बाहर निकल ही नहीं पाएंगे। ऐसे में वे गड्ढे में ही तड़प तड़प कर दम तोड़ देंगे। बरसात का मौसम करीब है। जब बरसात होगी तब तालाब लबालब भर जाएगा और तालाब में मुरुम के लिए खोदे गए गड्ढे का अनुमान लगाना भी मुश्किल हो जाएगा। ऐसे हालातों में यह गड्ढा भविष्य के खतरे की ओर इशारा कर रहा है। प्रशासन ने इस ओर जल्द ध्यान नहीं दिया तो आगे चलकर बड़ी अनहोनी से इंकार नहीं किया जा सकता।

वर्सन

नहीं लिया परमिशन

पाहुरबेल के तालाब से मुरुम खोदाई के लिए मेरे कार्यालय से किसी ने भी परमिशन नहीं लिया है। मौका निरीक्षण कर जेसीबी और ट्रैक्टर को जप्त करूंगा।

आरसी मंडावी,

तहसीलदार, करपावंड

कलेक्टर साहब आपके रहते बस्तर जिले के लोग कभी नहीं रह सकते उदास

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  • सचमुच एक जिंदादिल इंसान हैं कलेक्टर विजय दयाराम के.
  • जितना कोमल ह्रदय है, उतनी ही मधुर है उनकी आवाज भी

अर्जुन झा

जगदलपुर विजय दयाराम के. उस शख्स का नाम है जिन्होंने अल्प कार्यकाल में ही बस्तर जिले के लोगों के दिलो दिमाग पर विजय हासिल कर ली है। कोमल ह्रदय, जज्बाती और दूसरों के दर्द को अपना दर्द समझकर दर्द के साझीदार बनने वाले ये शख्स कोई और नहीं बल्कि हमारे बस्तर जिले के कलेक्टर विजय दयाराम के. हैं। इनके नाम में ही सब कुछ समाया हुआ है। जिसके मन में दया होती है, करुणा होती है, परोपकार की भावना होती है, वह शख्स हर दिल अजीज तो होगा ही, सबके दिल पर विजय तो हासिल करेगा ही।

बस्तर जिले के बहुत कम लोगों को अपने कलेक्टर विजय की एक खासियत के बारे में शायद पता ही नहीं होगा कि वे बहुत अच्छे गायक भी हैं। उनकी आवाज में वो कशिश है कि सुनते ही दिल की सारी उदासी काफूर हो जाती है। हमारे दयावान कलेक्टर विजय दयाराम के. की गायकी का गजब अंदाज हमें बादल अकादमी के स्टूडियो में एक बार फिर देखने को मिला। दरअसल बस्तर कलेक्टर फिर बादल अकादमी के रिकॉर्डिंग स्टूडियो में पहुंचे थे। उन्होंने वहां 2 मिनट 14 सेकंड का गाना रिकॉर्ड कराया। इस बार उन्होंने पुराने फिल्मी गाने की रिकॉर्डिंग कराई। उनका यह गाना प्यार के संदेश से भरा था। गाने के बोल थे प्यार कभी मरता नहीं, मरते हैं हम तुम, होते हैं वो लोग अमर प्यार जो करते हैं। इसके गीत का दूसरा अंतरा था – न हो उदास, तेरे पास पास मैं रहूंगा जिंदगी भर…। कलेक्टर विजय वैसे तो हैं दक्षिण भारतीय, मगर इस हिंदी गीत के सुर ताल और शब्दों पर उनकी अच्छी पकड़ की झलक साफ दिखाई दी। कलेक्टर विजय दयाराम के. इससे पहले बस्तरिया बोली में गीत की रिकॉर्डिंग करा चुके हैं। बस्तरिहा बोली में भी उनकी पकड़ की कोई सानी नहीं है। बंसल न्यूज़ के खास कार्यक्रम ‘अफसरनामा’ में भी कलेक्टर विजय ने यही गीत गुनगुनाया था।

सबने देखा है दयावान रूप

बहरहाल हम कलेक्टर विजय के गाए ताजा गाने की ओर रुख करते हैं। इस गीत में कलेक्टर ने जो अंतिम पंक्तियां गाईं, वो बस्तर वासियों के प्रति उनके प्रेम की ओर इंगित करती नजर आईं। कलेक्टर साहब जब तक आप बस्तर के डीएम हैं, तब तक बस्तर के लोग हरगिज उदास नहीं रह सकते। क्योंकि हमने कई बार आपको गरीब आदिवासियों का दर्द साझा करते देखा है। एक बूढ़ी मां को उसकी आंख के इलाज के लिए तुरंत जगदलपुर भेजते की आपकी पहल को देखा है, एक और बूढ़ी आदिवासी मां की युवा बेटी के इलाज की व्यवस्था करते आपको देखा है। भरे बाजार में आम आदमी की तरह आपको सब्जियां खरीदते देखा है, किसानों को पर्याप्त खाद बीज मिले, गरीब ग्रामीणों को उनके हिस्से का पूरा राशन दिलाने की व्यवस्था करते आपको देखा है। कुछ दिनों पहले ही बकावंड ब्लॉक में गरीबों को प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ न मिलने पर पहली बार आपको इतने गुस्से में देखा है। फिर भला आपके रहते बस्तर के लोग भला कैसे उदास रह सकते हैं। बस्तर के लोग तो अपनी आराध्य देवी मां दंतेश्वरी से प्रार्थना करते हैं कि हमारे कलेक्टर विजय दयाराम के. सदा सर्वदा के लिए बस्तर में रहें, माता रानी उन्हें दीर्घायु बनाए।

एनएमडीसी प्रबंधन की वादाखिलाफी को लेकर फूटा स्थानीय ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, विरोध में आंदोलन

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  •  पांच दिवसीय क्रमिक भूख हड़ताल जारी, उग्र आंदोलन की दी गई चेतावनी 
    -अर्जुन झा-
    नगरनार एनएमडीसी के नगरनार संयंत्र में स्थानीय बेरोजगारों और ट्रांस्पोर्टरों को काम न देने और प्लांट द्वारा फैलाए जा रहे प्रदूषण के विरोध में क्रमिक भूख हड़ताल और धरना प्रदर्शन शुरू हो गया है। भूख हड़ताल और धरने पर जय झाडेश्वर परिवहन संघ के पदाधिकारी, सदस्य एवं स्थानीय नागरिक बैठे हुए हैं।
    जय झाड़ेश्वर परिवहन सहकारिता समिति मर्यादित, नगरनार के तत्वावधान में यह आंदोलन 7 जून से शुरू हुआ है और फिलहाल 11 जून तक चलेगा। समिति की प्रतिनिधि एवं नगरनार मंडल भाजपा महिला मोर्चा की अध्यक्ष गीता मिश्रा भी हड़ताल पर बैठी हैं। गीता मिश्रा ने कहा कि नगरनार इस्पात संयंत्र की स्थापना के समय एनएमडीसी ने जितने भी शर्त ग्रामीणों से की थी, उनमें से एक भी शर्त को एनएमडीसी प्रबंधन ने पूरा नहीं किया है। आसपास के तमाम गांवों में संयंत्र से उठने वाली गर्द का प्रदूषण फैल रहा है।एनएमडीसी ने कहा था कि संयंत्र स्थापना के साथ साथ मल्टी सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल की भी स्थापना नगरनार में कर दी जाएगी, मगर आज तक हॉस्पिटल की नींव भी नहीं रखी जा सकी है। संयंत्र के प्रदूषण से अंचल के ग्रामीण बीमार पड़ रहे हैं, वे अपना इलाज कराने कहां जाएं। गीता मिश्रा ने कहा कि संयंत्र में स्थानीय बेरोजगारों और ट्रांसपोर्टरों को काम भी नहीं दिया जा रहा है।

बाहरी लोगों की भर्ती: नाग
जय झाड़ेश्वर परिवहन सहकारी समिति के सदस्य एवं नगरनार के प्रतिष्ठित ग्रामीण सियाराम नाग ने कहा कि एनएमडीसी ने क्षेत्र के गांवों के किसानों की जमीन लेते समय जो पांच वादे किए थे, उन वादों से एनएमडीसी प्रबंधन पूरी तरह मुकर गया है। यहां मजदूरों की भर्ती भी बाहर से की जा रही है। जबकि प्रबंधन ने कहा था कि संयंत्र स्थापना के लिए जिन ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों की जमीन अधिग्रहित की गई है, उनके परिवारों के सदस्यों तथा बस्तर संभाग के ही बेरोजगारों की भर्ती संयंत्र में की जाएगी। मगर शुरू से टेक्निकल भर्ती के नाम पर मजदूरों के रूप में दूसरे राज्यों के लोगों को नगरनार संयंत्र में नौकरियां दी जा रही हैं। वायु, ध्वनि और जल प्रदूषण का दंश हम झेल रहे हैं और यहां बाहरी लोग मौज कर रहे हैं। अगर प्रबंधन ने वादा पूरा नहीं किया तो हम उग्र आंदोलन करेंगे। सियाराम नाग ने कहा कि हमारे परिवारों के युवा सदस्यों ने इस उम्मीद में कर्ज लेकर वाहन खरीदे थे कि संयंत्र में माल परिवहन का काम मिल जाएगा। लेकिन परिवहन का काम भी बाहरी लोगों को दिया जा रहा है। प्रबंधन का यह चरित्र असहनीय हो गया है। अब हम और ज्यादती बर्दाश्त नहीं कर सकते।

प्रबंधन रवैया बदले: बघेल
जय झाड़ेश्वर परिवहन सहकारी समिति के सदस्य लखीधर बघेल ने कहा कि 22 साल से नगरनार इस्पात संयंत्र का काम चल रहा है। संयंत्र स्थापना के शुरूआती दौर में एनएमडीसी प्रबंधन ने नगरनार समेत आसपास की 11 ग्राम पंचायतों के ग्रामीणों के साथ जो करार किया था, उससे प्रबंधन पीछे हट गया है। यहां न हॉस्पिटल खोला गया है, न प्रदूषण नियंत्रण के उपाय किए गए हैं। संयंत्र से निकलने वाला केमिकल युक्त काला पानी हमारे खेतों को बंजर बना रहा है और तालाबों को प्रदूषित कर रहा है। प्रदूषण के चलते ग्रामीण तरह तरह की बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। उनके उपचार की व्यवस्था तक एनएमडीसी प्रबंधन ने नहीं की है। स्कूल खोला भी गया है, तो वहां बाहरी लोगों के बच्चों को प्रवेश दिया जा रहा है। हमने जमीन गंवाई और हमारे ही बच्चे अच्छी शिक्षा से वंचित हैं। रोजगार देने के मामले में भी प्रबंधन ने स्थानीय लोगों के साथ छल किया है। नगरनार इस्पात संयंत्र में सभी श्रेणियों की भर्ती में बाहरी लोगों को प्राथमिकता दी जा रही है। जबकि करार में कहा गया है कि स्थानीय और बस्तर संभाग के बेरोजगारों को नौकरियों में प्राथमिकता दी जाएगी। लखीधर बघेल ने कहा कि परिवहन का काम भी बाहरी ट्रांसपोर्टरों से कराया जा रहा है। हमारे स्थानीय लोगों ने कर्ज लेकर गाड़ियां खरीदी हैं जो आज काम न होने के कारण ब्याज तक अदा नहीं कर पा रहे हैं। श्री बघेल ने कहा कि प्रबंधन हमारे सब्र की परीक्षा न ले।

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