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आसना जंगल में जुआ खेल रहे जुआड़ियों पर कोतवाली पुलिस की कार्यवाही

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07 जुआड़ी जुआ खेलते रंगे हाथ पकड़े गये

आरोपियों के कब्जे से 42,690/- रूपये नगदी बरामद

मौके से 05 मोटर सायकल, 07 मोबाईल एवं ताश के पत्ते बरामद

जप्त सम्पत्ति की कुल कीमत 2,50,000/- रूपये (मोटर सायकल, मोबाईल, नगद)

थाना सिटी कोतवाली जगदलपुर को आसना जंगल में चल रहे जुआ के फड़ पर रेड कार्यवाही कर 07 आरोपियों को पकड़ने में सफलता हासिल की गई है । ज्ञात हो कि सूचना प्राप्त हुई थी कि आसना जंगल में कुछ जुआड़ी ताश के पत्तो पर रूपये पैसे का दांव लगाकर जुआ खेल रहे है सूचना पर पुलिस अधीक्षक श्री दीपक कुमार झा, अति. पुलिस अधीक्षक श्री ओम प्रकाश शर्मा के मार्गदर्शन एवं नगर पुलिस अधीक्षक श्री हेमसागर सिदार के पर्यवेक्षण में रेड कार्यवाही हेतु थाना प्रभारी कोतवाली एमन साहू के नेतृत्व में टीम तैयार कर दर्शित स्थल पर रेड कार्यवाही किया गया । रेड कार्यवाही के दौरान 07 जुआड़ी जुआ खेलते रंगे हाथ पकड़े गये जिनके फड़ एवं पास से 42,690/-रूपये नगद, 07 नग मोबाईल, 05 नग मोटर सायकल, ताश के पत्ते बरामद किया गया । उक्त 07 आरोपियों के विरूद्ध धारा 13 जुआ एक्ट के तहत अपराधिक प्रकरण पंजीबद्ध कर गिरफ्तार कर कार्यवाही किया गया है । उक्त जप्त सम्पत्ति की सम्पूर्ण अनुमानित कीमत – 2,50,000/- रूपये ऑकी गई है।

नाम आरोपी –

1. मनीराम मौर्य पिता तातीराम मौर्य निवासी फारेस्ट कालोनी कुम्हारपारा जगदलपुर

2. मंधन पुजारी पिता महाजन पुजारी निवासी पुजारीपारा उलनार

3. पवन त्रिपाठी पिता संतोष त्रिपाठी, निवासी समुंद चौक जगदलपुर

4. अभिषेक नेगी पिता बी0एस0 नेगी, निवासी पुलिस लाईन परपा

5. अंकित पटवा पिता राम संजीव पटवा, निवासी हाटकचोरा जगदलपुर

6. संदीप सिंह पिता स्व0 रघुवीर सिंह निवासी अम्बेडकर चौक के पास नयामुंडा

7. वेद कुमार धनकर पिता श्री एम0एच0 धनकर निवासी- 5 वीं बटालियन कंगोली

महत्वपूर्ण भूमिका अदा करने वाले अधिकारी – निरी0 एमन साहू, उनि0 पीयूष बघेल, आर0 बबलू ठाकुर, प्रकाश नायक, रवि ठाकुर, रवि सरदार, दीपक कुमार

गुजरा हुआ जमाना, आता नहीं दोबारा…भाजपा भूल गई संघर्ष काल के पुराने तेवर

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जगदलपुर – अर्जुन झा

भारतीय जनता पार्टी पंद्रह साल तक सत्ता सुख भोगने के कारण छत्तीसगढ़ में अपने संघर्ष काल के पुराने तेवर भूल गई है। राज्यव्यापी किसान आंदोलन के नाम पर उसने विधानसभा क्षेत्रों में जो आंदोलन किया गया, उसमें भाजपाई राजनीति वह दमखम नहीं दिखा पाई, जो विपक्ष में बैठे दल से अपेक्षित होता है। छत्तीसगढ़ की राजनीति में पंद्रह वर्षों तक सत्ता सुख भोगने वाली राष्ट्रीय पार्टी के नेताओं को कांग्रेस के विरोध के दौरान असहज महसूस किया गया। कुछ नेता अपने प्रभार क्षेत्र को छोड़कर अपनी राजनीति चमकाने में भी कसरत करते देखे गए।

ट्रेक्टर व बैलगाड़ी में सवार होकर फोटो बाजी करते नजर आने वाले नेताओं ने भविष्य की चुनावी तैयारियों की झलक पेश की। लेकिन उन्हें बस्तर में ऐसा भाव कहीं नहीं मिला, जैसी कि वे उम्मीद कर रहे थे। भारतीय जनता पार्टी ने किसानों के जो मुद्दे उठाए, उसमें केंद्रीय मुद्दे थे जिसके कारण धरना- प्रदर्शन स्थलों पर भाषणबाजी के दौरान नेता कई बार बगले भी झांकते नजर आए। किसानों के मुद्दे पर आंदोलन में किसानों की दूरी अपने आप में चर्चा का विषय है। जितने भी शहरी क्षेत्र के नेतागण थे, वह सिर्फ और सिर्फ फोटोबाजी में मशगूल थे और दूसरे क्षेत्र के प्रभारी अपनी सियासी फसल उगाने की फिराक में लगे रहे। बस्तर में भाजपा पूरी तरह उजड़ चुकी है। यहां अंचल की सभी बारह सीटों पर कांग्रेस काबिज है तो लोकसभा चुनाव में पूरे राज्य में शानदार प्रदर्शन के बावजूद बस्तर में कमल नहीं खिल सका। वैसे तो कांग्रेस ने भाजपा से कोरबा लोकसभा सीट भी छीनी है लेकिन बस्तर की बात अलग है।

दोनों जगह परिणाम के कारण अलग अलग हैं। कोरबा में कांग्रेस की जीत के कारण अलग हैं तो बस्तर में यहां जो माहौल विधानसभा चुनाव के दौरान बना, वह लोकसभा चुनाव में भी बरकरार रहा। इसकी वजह है कि बस्तर का भाजपा से मोहभंग हो गया। इसके पीछे भाजपा नेताओं का ही हाथ रहा है। अन्यथा बस्तर तो भाजपा का लगातार साथ दे रहा था। भाजपा जब तक बस्तर में तरती रही, तब तक वह राज्य में सरकार बनाती रही। जब बस्तर में भाजपा विरोधी आंधी चली तो पूरे राज्य में भाजपा विरोधी लहर ने असर दिखा दिया। बस्तर में उजड़ने के बाद भाजपा का मनोबल टूट गया है। यदि लोकसभा चुनाव में उसने बाजी मार ली होती तो भविष्य में उसके लिए उम्मीद पैदा हो सकती थी। मगर विधानसभा चुनाव में सफाए के बाद भाजपा ने संघर्ष नहीं किया। जबकि पंद्रह साल तक हर पल भाजपा से लोहा लेती रही कांग्रेस ने अपने जुझारू तेवर राज्य की सत्ता में काबिज होने के बाद भी कायम रखे, जिसका फायदा उसे मिल रहा है। कहते हैं कि गुजरा हुआ जमाना, आता नहीं दोबारा! अगर भाजपा को इस स्थिति को बदलना है तो अपने पुराने तेवर वापस हासिल करने होंगे। अन्यथा जीतने साल कांग्रेस को इंतजार करना पड़ा, वैसे ही भाजपा को भी बस्तर के कांग्रेस से मोहभंग होने की प्रतीक्षा करनी होगी।

किसान सभा ने लिया संकल्प : अंतिम सांस तक करेंगे किसान विरोधी कानूनों के खिलाफ संघर्ष, 26 को होगी किसान गणतंत्र परेड

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अखिल भारतीय किसान संघर्ष समन्वय समिति और संयुक्त किसान मोर्चा के देशव्यापी आह्वान पर छत्तीसगढ़ किसान सभा ने भी गांव-गांव में लोहड़ी और मकर संक्रांति के पर्व पर संकल्प सभाएं आयोजित की और किसान विरोधी काले कानूनों के प्रमुख पहलुओं को सामने रखा और कृषि कानूनों की प्रतियां व मोदी-अडानी-अंबानी के पुतले जलाए गए।किसान सभा कार्यकर्ताओं और ग्रामीण जनों ने अंतिम सांस तक खेती-किसानी को बर्बाद करने वाले इन कॉर्पोरेटपरस्त कानूनों के खिलाफ संघर्ष करने की शपथ ली। सरगुजा, सूरजपुर, बिलासपुर, कोरबा, मरवाही, बस्तर सहित 12 से ज्यादा जिलों में ये कार्यक्रम आयोजित किये गए। रायगढ़ में किसान संघर्ष समन्वय समिति के बैनर पर अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया गया है। छत्तीसगढ़ किसान सभा ने दूसरे संगठनों के साथ मिलकर 26 जनवरी को ब्लॉक स्तर पर किसान गणतंत्र परेड आयोजित करने की भी घोषणा की है।

छग किसान सभा के अध्यक्ष संजय पराते और महासचिव ऋषि गुप्ता ने बताया कि हमारे देश के किसान न केवल अपने जीवन-अस्तित्व और खेती-किसानी को बचाने की लड़ाई लड़ रहे हैं, बल्कि वे देश की खाद्यान्न सुरक्षा, सार्वजनिक वितरण प्रणाली तथा संप्रभुता की रक्षा के लिए भी लड़ रहे हैं। उनका संघर्ष उस समूची अर्थव्यवस्था के कारपोरेटीकरण के खिलाफ भी हैं, जो नागरिकों के अधिकारों और उनकी आजीविका को तबाह कर देगा। इसीलिए देश का किसान आंदोलन इन काले कानूनों की वापसी के लिए खंदक की लड़ाई लड़ रहा है और अपनी अटूट एकता के बल पर इस आंदोलन को तोड़ने की सरकार की सजिशों को मात दे रहा है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार को यह समझना होगा कि देश की संप्रभुता किसी सरकार या सुप्रीम कोर्ट में नहीं, बल्कि आम जनता में निहित है, जिसे संविधान में ‘हम भारत के लोग’ के जरिये अभिव्यक्त किया गया है।

किसान सभा नेताओं ने बताया कि 23 जनवरी को जगह-जगह अधिकारियों को राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपे जाएंगे। इस ज्ञापन में इन किसान विरोधी काले कानूनों को वापस लेने के साथ ही सी-2 लागत का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य घोषित करने का कानून बनाने, इस मूल्य पर सभी फसलों का खरीदना सुनिश्चित करने व इसका उल्लंघन करने पर संबंधित व्यक्ति को जेल भेजने की मांग की जाएगी।

इंडियन रेडक्रास सोसायटी बालोद द्वारा नगर पालिका परिषद बालोद के स्वच्छता मित्र महिला स्व सहायता समूह को साबुन एवं मास्क वितरण

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जिला प्रशासन इंडियन रेडक्रास सोसायटी बालोद द्वारा नगर पालिका परिषद बालोद के स्वच्छता मित्र महिला स्व सहायता समूह को साबुन एवं माक्स वितरण नगर पालिका अध्यक्ष बालोद विकास चोपडा,व रेडक्रॉस उपाध्यक्ष डाँ. प्रदीप जैन के कर कमलो से किया गया। इस

अवसर पर डां.प्रदीप जैन जी ने स्वच्छता मित्रो से कहा कि आप लोग स्वस्थ्य रहेगे तभी पूरा शहर स्वास्थ्य रहेगा ,क्योंकि सफाई की जिम्मेदारी आप लोगों पर है।एवं अध्यक्ष विकास चोपड़ा जी ने भी अपने उद्बोधन मे कहा कि हमे सावधानी के साथ कोरोना से लडना है साबुन

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और मास्क का उपयोग अनिवार्यतः करना है। इस अवसर पर मुख्य रुप से सभापति निर्देश पटेल, रेडक्रॉस जिला संगठक चन्द्रशेखर पवार, ब्लाक प्रभारी सीमा सुशील जामवन्ते,कमला वर्मा, राकेश सोनटेके, रोहित देशमुख ,आर्य जी के साथ स्वच्छता मित्रो की उपस्थिति रही।

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ख़राब सड़क निर्माण को देखते हुए नपं चिखलाकसा द्वारा मंत्री टी.एस. सिंहदेव जी से शिकायत की गई

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चिखलाकसा – प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत चिखलाकसा से कुरुर्भाट, अड़जाल तक की लंबाई 10, 05 कि.मी. की कार्य ठेकेदार- मेसर्स रत्ना खनिज उद्योग को पैकेज क्रमांक CG-21-104, 5 करोड़ की लागत की राशि से रोड़ बना जा रहा है। जो कि निर्माण दिनांक से 5 दिन भी नहीं टिका रोड़ डामर रोड 5 दिन में ही उखड़ गया व रोड में दरार आ गयी है।

चिखलाकसा एवं आस पास के ग्रामीणों द्वारा लगातार शिकायत नगर पंचायत में की जा रही थी। शिकायत पश्चात् सांसद प्रतिनिधि विक्रम धुर्वे एवं नगर पंचायत अध्यक्ष भिखी मसिया, उपाध्यक्ष अब्दुल इब्राहिम सैययद व पार्षदगण सड़क निरीक्षण में पहुंचे कार्यपालन अभियंता

सुनील नामदेव से इस संबंध में निरीक्षण स्थल में पहुंच कर चर्चा की कार्यपालन अभियंता द्वारा कहां गया कि सड़क खराब होगी तो फिर बन जाएंगी आप लोगो को परेशानी है तो काम को बंद करवा देता हूं। पांच वर्ष की अवधि तक रोड के मरम्मत की जवाबदेही ठेकेदार की है। किन्तु यह सोचकर आज के समय खराब सड़क निर्माण कहां तक उचित है।

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इन सब कारणों को देखते हुए मंत्री जी से हस्तक्षेप हेतु आग्रह किया गया |

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Breaking बालोद जिले में बर्ड फ्लू की आशंका सच साबित हुई, बर्ड फ्लू का पहला मामला सामने आया

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बालोद – सप्ताह भर पहले सिटी मीडिया द्वारा राजहरा माइंस के क्षेत्रों में एवं चिखलाकसा कौओं के मारने पर बर्ड फ्लू की आशंका व्यक्त की गई थी जो कि सच साबित हुई और साथ ही लोगों से सावधान रहने की अपील की गई थी | प्राप्त जानकारी के अनुसार डौंडी लोहारा क्षेत्र के अंतर्गत एक पोल्ट्री फॉर्म में 210 मुर्गियों की मौत हो गई थी जिसके बाद पशु चिकित्सा विभाग द्वारा भोपाल लैब टेस्ट के लिए भेजा गया था जहाँ से 05 मुर्गियों की रिपोर्ट में H5N8 पॉजिटिव अर्थात बर्ड फ्लू की वजह से मौत हुई |

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जिले में बर्ड फ्लू की पुष्टि होने के बाद हडकंप मच गया है | H5N8 ये वायरस बहुत ज्यादा खतरनाक है,ये अपनी चपेट में आए इंसानों और पक्षियों को बहुत अधिक प्रभावित करता है। बर्ड फ्लू इंफेक्शन चिकन और बत्तख की प्रजाति जैसे पक्षियों को सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। इससे इंसान और पक्षियों की मौत तक हो सकती है इसलिए इसके प्रति काफी सावधान रहने की जरूरत है।

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बस्तर ब्लॉक के कोविड वैक्सीन केंद्र का स्थान बदला, शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बालक बस्तर के स्थान पर कन्या शाला को बनाया गया केन्द्र

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जगदलपुर।कोविड वैक्सीन टीकाकरण का कार्य जो कि 16 जनवरी से आरम्भ होना है ,बस्तर ब्लॉक में 7 केन्द्र बनाए गए थे । किंतु टीकाकरण का कार्य 16 जनवरी को शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय कन्या बस्तर में कोविड वैक्सीन का टीका लगाया जाएगा ।पूर्व में शासकीय उत्तर माध्यमिक विद्यालय बालक बस्तर को वैक्सीन सेंटर के रूप में चयनित किया गया था। किंतु परिवार व्यवस्था के अभाव में उक्त केंद्र को बदलकर नजदीक की शाला शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय कन्या बस्तर को नए केंद्र के रूप में चयन किया गया है।

वैक्सीन सेंटर का अवलोकन करने के लिए उप संचालक स्वास्थ्य सेवाएं छत्तीसगढ़ डॉ एसके पामभोई के द्वारा जहां अवलोकन करके केंद्र को वैक्सीन टीकाकरण के लिए उपयुक्त माना एवं आवश्यक निर्देश देते हुए सभी कार्य पूर्ण कर लेने का निर्देश भी दिया। इस अवसर पर बीआरसी राजेन्द्र सिंह ठाकुर,बीई डी पी पांडेय, नेहरू सिंह ठाकुर, शैलेन्द्र तिवारी उपस्थित थे।

अपूर्ण गाय गोठान निर्माण का खामियाजा भुगत रहे किसान, आवारा पशु रात को खेत में घुस कर रहे चराई

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जगदलपुर ।राज्य सरकार द्वारा नरवा घुरवा बाड़ी के अंतर्गत गाय गोठान का निर्माण सभी ग्राम पंचायतों में किया जाना था, किंतु बस्तर जिले के अधिकांश गाय गोठान आज भी अपूर्ण है।
पंचायत सचिवों द्वारा गाय गोठान का निर्माण कराया जाना था लेकिन सचिवों की लापरवाही के चलते अधिकांश गाय गोठा ने अपूर्ण है जिसका खामियाजा कृषकों को भुगतना पड़ रहा है। इसके अधूरे निर्माण के चलते कई स्थानों पर आज भी गायों को नहीं रखा जाता है जिसके चलते आवारा मवेशी कृषकों द्वारा लगाए गए रबि के फसलों को चट कर जा रहे हैं।

ग्राम पंचाय कोलचूर,आड़ावाल, जोनधरागुड़ा, चपटगड़ा, नारायण पाल, परचन पाल, बाघ पाल, टकरा गुड़ा के आसपास के कृषकों ने बताया कि इन दिनों वे सब्जी की खेती कर रहे हैं, लेकिन आवारा मवेशी रात के समय इन फसलों को चट कर जाते हैं जबकि सरकार द्वारा सभी ग्राम पंचायतों में गोठान का निर्माण किया गया है किंतु इन आवारा मवेशियों को इन गाय गोठानो में नहीं नहीं रखा जाता है और कई गाय गोठान आज भी अधूरे हैं जिसके चलते रवि फसल लगाने वाले किसानों को काफी नुकसान हो रहा है। सरकार की यह योजना कर्मचारियों की अनदेखी के चलते पूरी तरह से विफल होती जा रही है जहां एक और इस योजना के माध्यम से गोबर खरीदी कर स्व सहायता समूह द्वारा खाद बनाकर स्वालंबन की योजना भी जुड़ी हुई है कुछ स्थानों पर खाद बनाया जा रहा है किंतु महिला स्व सहायता समूह की महिलाओं ने बताया कि चारह दीवारी व पानी की व्यवस्था नहीं होने के चलते खाद बनाने में काफी परेशानी होती है, इस संबंध में कई बार जनपद पंचायत में शिकायत की गई है पर इस ओर भी कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

बस्तर विधान सभा स्तरीय छ०ग० सरकार की धान खरीदी की अव्यवस्था व किसानों के वादाखिलाफी के विरोध में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन व रैली निकालकर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम ज्ञापन बकावण्ड तहसीलदार को सौपें

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जगदलपुर/बकावण्ड:- बस्तर विधान सभा स्तरीय छ०ग० सरकार की धान खरीदी की अव्यवस्था व किसानों के वादाखिलाफी के विरोध में एक दिवसीय धरना प्रदर्शन व रैली निकालकर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल के नाम ज्ञापन बकावण्ड तहसीलदार को सौपें

वहीं भारतीय जनता पार्टी के दिग्ज नेताओं व किसानो ने छत्तीसगढ़ राज्य सरकार को जमकर निशाना साधा।

आपको बता दे कि बारदाना कि कमी के कारण हो रही परेशानी से निजात पाने हेतु 28 फरवरी तक धान खरीदि करने , खरीदि गई धान की रकम जल्दी भुगतान करने, गिरदावरी मे रकबा कम नही कर वास्तविक रकबा के आधार पर खरीदि करने तथा 2018 मे वादानुसार 300रू/क्विंटल दर से दो वर्षो का वोनस देने जैसे मुद्दो को ले कर धरना प्रदर्शन एवं रैली आयोजन किया गया।

जिसमे भा.ज.पा.जिला मंत्री डाँ.बी.एस.राजपुत,पुर्व विधायक डाँ.सुभाऊ कश्यप ,जिला पंचायत उपाध्यक्ष मनीराम कश्यप के मौजुदगी मे धनुर्जय कश्यप,नारायण बिसाई,परिस बेसरा,वेद प्रकाश पाण्डे ,जितेन्द्र पानिग्राही,जोगेन्द्र चंद्राकर,मोहन जोशी,सुनी श्रीवास्तव,नरेन्द्र जोशी, पुरूषोत्म जोशी,सत्यप्रकाश गुप्ता,महेश कश्यप,हेमकांत ठाकुर,सुनील सेठिया,बलराम बेसरा, श्याम बघेल,खगेश्वर कर्मा, मधु,बैसाखू धनेश्वरी नाग,सालीना सेमसन,कृष्णमोहन साहनी, मोहन मौर्य,राकेश ठाकुर,अरुण परिहार,चुन्नुलाल ठाकुर,रमेश ठाकुर,रमेश बघेल,श्रीधर ओझा, रीमा बघेल,नरेंद सेठिया, जैसे नेता व ग्रामीण किसान उपस्थित थे

वन विभाग ने मटेरियल सप्लाई का कार्य अपने चहते फर्म को दे किया उपकृत एक ही कार्य की निविदा कई बार हुई आमंत्रित एवं निरस्त, नियम कानून को ताक पर रख दिया गया कार्य

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जगदलपुर ।वन विभाग द्वारा वार्षिक समय काल हेतु विभिन्न वस्तुओं के लिए निविदा आमंत्रण के दौरान अपने चहेतों को रेवड़ी बांटने का मामला सामने आया है । मिली जानकारी के अनुसार वन संरक्षक कार्यालय में पिछले दिनों विभिन्न कार्यों के लिए आमंत्रित निविदा खोली जानी थी, लेकिन समय बीत जाने के पश्चात भी निवेदन नहीं खोली जा रही थी। विभाग के जिम्मेदार अधिकारी इस मामले में कुछ बोलने से कतराते फिर रहे थे ।इस निविदा में शामिल ठेकेदार भी कुछ बोलने से बच रहे थे, लेकिन रात्रि पर 9 बजे कुछ जिम्मेदार अधिकारी एवं कुछ चाहते ठेकेदार की उपस्थिति में उक्त निविदा को खोला गया और अपने चहेते ठेकेदार के नाम एवं उस कार्य का आबंटन कर दिया गया।

मिली जानकारी के अनुसार कांकेर के दो फर्म रमन एवं दीपिका एंटरप्राइजेस को उक्त कार्य का आबंटन करने हेतु रायपुर से बराबर दबाव बना हुआ था। इस कारण इस कार्य के लिए आमंत्रित निविदा करीब 5 से 6 बार बिना खुले ही निरस्त कर दी गई ।स्थानीय ठेकेदारों ने इस मामले में इस प्रतिनिधि को बताया कि वन विभाग के अधिकारी पूरी तरह से नियम कानून से परे ऊपरी आदेश का पालन कर उनके चाहतों को कार्य दिलाने हेतु प्रतिबद्द दिख रहे हैं। इस वार्षिक मटेरियल सप्लाई का ठेका कार्य जो कई करोड़ रुपए का होता है उसे अपनों को देकर इस मटेरियल प्रदाय कार्य में भ्रष्टाचार करने को प्रोत्साहित किया जा रहा है ।

इस मामले की जानकारी मिलने पर संबंधित अधिकारी से कई बार इस मामले पर चर्चा करने का प्रयास किया गया किंतु उन से चर्चा नहीं हो पाई इस निविदा प्रकरण में कुछ जानकारों का कहना है कि स्थानीय ठेकेदारों की उपेक्षा कर जिस प्रकार से बाहरी लोगों को उपकृत करने का प्रयास वन विभाग के अधिकारियों द्वारा किया जा रहा है उससे यही साबित हो रहा है कि सत्ता बदलने के बाद भी भ्रष्ट अधिकारी की मिलीभगत से अपने अपनों को कमीशन के आधार पर नियम कानून की उपेक्षा कर करोड़ों के कार्य देकर उन्हें उपकृत किया जा रहा है।

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